पेनल्टी कुछ मामलों में लगाया जा नहीं
97[कुछ दशाओं में शास्ति अधिरोपित न किया जाना
273ख. 98[धारा 271 99[की उपधारा (1) का खंड (ख),] धारा 271क, 1[धारा 271कक,] धारा 271ख, 1[271खक,] 2[धारा 271खख], धारा 271ग, 3[धारा 271गक,] धारा 271घ, धारा 271ड़, 4[धारा 271च 5[धारा 271चक] 6[धारा 271चख] 7[धारा 271छ]], धारा 272क की उपधारा (1) के खंड (ग) या खंड (घ) या उपधारा (2), धारा 272कक की उपधारा (1) या] 8[धारा 272ख या] 9[धारा 272खख की उपधारा (1) 10[या उपधारा (1क)] या] 9[धारा 272खखख की उपधारा (1) या] धारा 273 की उपधारा (1) के खंड (ख) या उपधारा (2) के खंड (ख) या खंड (ग) में की किसी बात के होते हुए भी, यथास्थिति, किसी व्यक्ति या निर्धारिती पर उक्त उपबंधों में उल्लिखित किसी असफलता के लिए कोर्इ शास्ति अधिरोपणीय नहीं होगी यदि वह यह साबित कर देता है कि उक्त असफलता के लिए उचित कारण था।]
97. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 10.9.1986 से अंत:स्थापित।
98. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, "धारा 270, धारा 271 की उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख), धारा 271क, धारा 271ख, धारा 272क की उपधारा (2), धारा 272कक की उपधारा (1), धारा 272ख की उपधारा (1)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
99. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
1. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।
2. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।
3. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से अंत:स्थापित।
4. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
5. वित्त (संñ 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
6. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
7. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित।
8. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।
9. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.6.1987 से अंत:स्थापित।
10. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2007 तथा कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

