शास्ति से उन्मुक्ति प्रदान किए जाने की प्रधान आयुक्त या आयुक्त की शक्ति
शास्ति से उन्मुक्ति प्रदान किए जाने की प्रधान आयुक्त या आयुक्त की शक्ति
273कक. (1) कोर्इ व्यक्ति शास्ति से उन्मुक्ति प्रदान किए जाने के लिए प्रधान आयुक्त या आयुक्त को आवेदन कर सकेगा, यदि,–
(क) उसने धारा 245ग के अधीन समझौते के लिए आवेदन किया है और समझौते की कार्यवाहियों का धारा 245जक के अधीन उपशमन हो गया है; और
(ख) इस अधिनियम के अधीन शास्ति की कार्यवाहियां आरंभ कर दी गर्इ हैं।
(2) उपधारा (1) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त को आवेदन उपशमन के पश्चात् शास्ति के अधिरोपण के पश्चात् नहीं किया जाएगा।
(3) प्रधान आयुक्त या आयुक्त ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो वह अधिरोपित करना ठीक समझे, उस व्यक्ति को इस अधिनियम के अधीन किसी शास्ति के अधिरोपण से उन्मुक्ति प्रदान कर सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उस व्यक्ति ने, उपशमन के पश्चात्, आय-कर प्राधिकारी को उसके समक्ष की कार्यवाहियों में सहयोग किया है और अपनी आय का और उस रीति का, जिसमें ऐसी आय व्युत्पन्न की गर्इ है, पूर्ण और सही प्रकटन किया है।
(3क) आवेदन को पूर्णत: या भागत: मंजूर या नामंजूर करने वाला उपधारा (3) के अधीन आदेश, उस मास के अंत से, जिसमें प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा उक्त उपधारा के अधीन आवेदन प्राप्त हुआ है, बारह मास की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा :
परंतु आवेदन को पूर्णत: या भागत: नामंजूर करने वाला कोर्इ भी आदेश तब तक पारित नहीं किया जाएगा, जब तक निर्धारिती को सुनवार्इ का कोर्इ अवसर न दे दिया गया हो :
परंतु यह और कि जहां कोर्इ आवेदन 1 जून, 2016 को लंबित है, वहां आदेश 31 मर्इ, 2017 को या उससे पहले पारित किया जाएगा।
(4) उपधारा (3) के अधीन किसी व्यक्ति को प्रदान की गर्इ उन्मुक्ति, वापस ले ली जाएगी, यदि ऐसा व्यक्ति ऐसी किसी शर्त का पालन करने में असफल रहता है, जिसके अधीन रहते हुए उन्मुक्ति प्रदान की गर्इ थी और तदुपरि इस अधिनियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसी उन्मुक्ति प्रदान ही नहीं की गर्इ थी।
(5) उपधारा (3) के अधीन किसी व्यक्ति को प्रदान की गर्इ उन्मुक्ति प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा किसी भी समय वापस ली जा सकेगी, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उस व्यक्ति ने, उपशमन के पश्चात्, किन्हीं कार्यवाहियों के दौरान निर्धारण के लिए तात्विक किन्हीं विशिष्टियों को आय-कर प्राधिकारी से छिपाया था या मिथ्या साक्ष्य दिया था तथा तदुपरि ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन ऐसी किसी शास्ति के अधिरोपण के लिए दायी हो जाएगा, जिसके लिए ऐसा व्यक्ति तब दायी होता यदि ऐसी उन्मुक्ति प्रदान न की गर्इ होती।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

