कतिपय संव्यवहारों की बाबत जानकारी और दस्तावेज रखने और बनाए रखने में असफल रहने के लिए शास्ति
88[कतिपय संव्यवहारों की बाबत जानकारी और दस्तावेज रखने और बनाए रखने में असफल रहने के लिए शास्ति
271कक.88क[(1)] 88ख[धारा 270क या] धारा 271 या धारा 271खक के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि कोर्इ व्यक्ति किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार 88ग[या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार] की बाबत,–
(i) ऐसी कोर्इ जानकारी और दस्तावेज रखने और बनाए रखने में असफल रहता है जो धारा 92घ की उपधारा (1) या उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित है;
(ii) ऐसे संव्यवहार की रिपोर्ट देने में, जिसको देना उससे अपेक्षित है, असफल रहता है; या
(iii) गलत जानकारी या दस्तावेज बनाए रखता है या प्रस्तुत करता है,
तो निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) यह निदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार89[या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार] के मूल्य के दो प्रतिशत के बराबर राशि का शास्ति के रूप में संदाय करेगा।]
89क[(2) यदि कोर्इ व्यक्ति धारा 92घ की उपधारा (4) के अधीन यथा अपेक्षित जानकारी और दस्तावेज देने में असफल रहता है तो उक्त उपधारा में निर्दिष्ट विहित आय-कर प्राधिकारी यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा व्यक्ति शास्ति के रूप में पांच लाख रुपए की राशि का संदाय करने का दायी होगा।]
88. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित, धारा 271कक इस प्रकार थी :
"271कक. अन्तर्राष्ट्रीय संव्यवहार के संबंध में जानकारी और दस्तावेज रखने और बनाए रखने में असफल रहने पर शास्ति–धारा 271 के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि कोर्इ व्यक्ति ऐसी जानकारी और दस्तावेज रखने और बनाए रखने में असफल रहता है जो धारा 92घ की उपधारा (1) या उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित है, तो निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) यह निदेश दे सकेगा कि ऐसा व्यक्ति शास्ति के रूप में ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए प्रत्येक अन्तर्राष्ट्रीय संव्यवहार के मूल्य के 2 प्रतिशत के बराबर राशि का संदाय करेगा।"
88क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से धारा 271कक को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुन:संख्याकित किया गया।
88ख. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।
88ग. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।
89. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित।
89क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

