आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 269न

कुछ ऋण या जमा की अदायगी की विधि

धारा

धारा संख्या

269न

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXख - करापवंचन प्रतिक्रिया करने के लिए कुछ मामलों में स्वीकृति, भुगतान या भुगतान की विधि के रूप में आवश्यकता

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2002

कुछ ऋण या जमा की अदायगी की विधि

कुछ ऋण या जमा की अदायगी की विधि

18-24[कुछ उधारों और निक्षेपों25 के प्रतिसंदाय का ढंग

269न. किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की कोर्इ शाखा और कोर्इ अन्य कंपनी या सहकारी सोसाइटी और कोर्इ फर्म या अन्य व्यक्ति, उसको दिए गए किसी उधार या किए गए निक्षेप का प्रतिसंदाय ऐसे व्यक्ति के, जिसने ऐसा उधार दिया है या निक्षेप किया है, नाम लिखे गए, पाने वाले के खाते में देय चैक द्वारा, या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा ही करेगा अन्यथा नहीं, यदि–

(क) उधार या निक्षेप की, उस पर संदेय ब्याज सहित यदि कोर्इ है, रकम; या

(ख) ऐसे प्रतिसंदाय की तारीख को, ऐसे व्यक्ति द्वारा, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की शाखा में या अन्य कंपनी या सहकारी सोसाइटी या फर्म या अन्य व्यक्ति के पास, चाहे अपने नाम में या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्तत: धारित उधारों और निक्षेपों की ऐसे उधारों या निक्षेपों पर संदेय ब्याज सहित, यदि कोर्इ हो, कुल रकम,

बीस हजार रुपए या उससे अधिक है :

परंतु जहां प्रतिसंदाय किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की शाखा द्वारा किया जाना है वहां ऐसा प्रतिसंदाय ऐसी शाखा में उस व्यक्ति के, जिसको ऐसे उधार या निक्षेप या प्रतिसंदाय किया जाना है, बचत बैंक खाते में या चालू खाते में (यदि कोर्इ है) ऐसे उधारों या निक्षेपों की रकम जमा करके भी किया जा सकेगा।

स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) "बैंककारी कंपनी" का वही अर्थ है जो उसका धारा 269धध के स्पष्टीकरण के खंड (i) में है;

(ii) "सहकारी बैंक" का वही अर्थ है जो उसका बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में है;

(iii) "उधार या निक्षेप" से धन का कोर्इ उधार या निक्षेप अभिप्रेत है जो सूचना के पश्चात् प्रतिसंदेय है या किसी अवधि के पश्चात् प्रतिसंदेय है और कंपनी से भिé किसी व्यक्ति की दशा में इसके अंतर्गत किसी भी प्रकृति का उधार और निक्षेप है।]

 

18-24. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व आयकर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1981 द्वारा 11.7.1981 से, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से, वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से संशोधित धारा 269न इस प्रकार थी :

"269न. कुछ निक्षेपों के प्रतिसंदाय का ढंग*–(1) कोर्इ कंपनी (जिसके अंतर्गत बैंककारी कंपनी भी है), सहकारी सोसाइटी या फर्म किसी व्यक्ति को किसी निक्षेप की वापसी, जहां निक्षेप की रकम या जहां निक्षेप की रकम की वापसी ब्याज सहित की जानी है अर्थात् निक्षेप और ऐसे ब्याज की कुल रकम दस हजार रुपए या उससे अधिक है, वहां पाने वाले के खाते में देय चैक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा ही करेगी :

परन्तु जहां प्रतिसंदाय किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक द्वारा किया जाना है वहां ऐसा प्रतिसंदाय ऐसे निक्षेप की रकम उस व्यक्ति के, जिसके निक्षेप का प्रतिसंदाय किया जाना है, ऐसी कंपनी या बैंक के खाते में (यदि कोर्इ हो) जमा करके भी किया जा सकेगा:

परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोर्इ बात उस तारीख को या उसके पश्चात्, जिसको आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1981 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, किसी निक्षेप के प्रतिसंदाय को या उसके संबंध में लागू नहीं होगी।

(2) कोर्इ बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की कोर्इ शाखा और कोर्इ अन्य कंपनी या सहकारी सोसाइटी और कोर्इ फर्म या अन्य व्यक्ति उन्हें किए गए किसी निक्षेप का प्रतिसंदाय, ऐसे व्यक्ति के जिसने ऐसा निक्षेप किया है, नाम लिखे गए, पाने वाले के खाते में देय चैक द्वारा या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट द्वारा ही करेगी, अन्यथा नहीं, यदि

() निक्षेप की रकम, उस पर संदेय ब्याज सहित, यदि कोर्इ है; या

() ऐसे प्रतिसंदाय की तारीख को ऐसे व्यक्ति द्वारा, यथास्थिति, बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की शाखा में या, अन्य कंपनी या सहकारी सोसाइटी या फर्म में चाहे अपने नाम से या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त रूप से धारित निक्षेपों की कुल रकम, ऐसे निक्षेपों पर संदेय ब्याज सहित यदि कोर्इ है,

बीस हजार रुपए या उससे अधिक है:

परन्तु जहां प्रतिसंदाय किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक की शाखा द्वारा किया जाना है, वहां ऐसा प्रतिसंदाय ऐसी शाखा में उस व्यक्ति के, जिसको ऐसा निक्षेप किया जाना है, बचत बैंक खाते में या चालू खाते में (यदि कोर्इ है) ऐसे निक्षेप की रकम जमा करके भी किया जा सकेगा :

परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोर्इ बात उस तारीख के पूर्व, जिसको आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1981 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है, किसी निक्षेप के प्रतिसंदाय को या उसके संबंध में लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए

(i) "बैंककारी कंपनी" का वही अर्थ है जो धारा 269धध के स्पष्टीकरण के खंड (i) में उसका है;

(iक) "सहकारी बैंक" का वही अर्थ है, जो बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) के भाग 5 में उसका है;

(ii) "निक्षेप" से धन का कोर्इ ऐसा निक्षेप अभिप्रेत है, जो सूचना के पश्चात् प्रतिसंदेय है या किसी अवधि के पश्चात् प्रतिसंदेय है, और कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति की दशा में, इसके अंतर्गत किसी भी प्रकृति का निक्षेप है।"

*परिपत्र सं. 479, तारीख 16.1.1987, परिपत्र सं. 522, तारीख 18.8.1988, और परिपत्र सं. 556, तारीख 23.2.1990 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इंकम टैक्स ऐक्ट।

25. "निक्षेप" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

 

 

[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

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