अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश
अपील अधिकरण के आदेश
254. (1) अपील अधिकरण, अपील के दोनों पक्षकारों को सुनवार्इ का अवसर देने के पश्चात् उस पर ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जो वह ठीक समझे73।
(1क) 74[* * *]
(2) अपील अधिकरण, आदेश की तारीख से चार वर्ष के भीतर किसी समय उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा पारित किसी आदेश का संशोधन, किसी ऐसी भूल को75 ठीक करने की दृष्टि से कर सकेगा जो अभिलेख से प्रकट है75 और यदि भूल की ओर उसका ध्यान निर्धारिती या 76[निर्धारण] अधिकारी द्वारा दिलाया जाता है तो ऐसा संशोधन करेगा :
परन्तु ऐसा संशोधन, जिसके परिणामस्वरूप निर्धारण में वृद्धि होती है, या प्रतिदाय में कमी हो जाती है या निर्धारिती का दायित्व अन्यथा बढ़ जाता है, इस उपधारा के अधीन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि अपील अधिकरण ने निर्धारिती को ऐसा करने के अपने आशय की सूचना न दे दी हो और निर्धारिती को सुनवार्इ का उचित अवसर न दे दिया गया हो:
77[परन्तु यह और कि 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् इस उपधारा में निर्धारिती द्वारा फाइल किए गए किसी आवेदन के साथ पचास रुपए की फीस होगी।]
78[(2क) प्रत्येक अपील में, अपील अधिकरण, उस वित्तीय वर्ष के अंत से, जिसमें ऐसी अपील धारा 253 की उपधारा (1) 79[या उपधारा (2)] के अधीन फाइल की जाए, चार वर्ष की अवधि के भीतर, जहां संभव हो, ऐसी अपील की सुनवार्इ और उस पर विनिश्चय कर सकेगा :
80[परन्तु अपील अधिकरण निर्धारिती द्वारा किए गए आवेदन के गुणागुण पर विचार करने के पश्चात् धारा 253 की उपधारा (1) के अधीन फाइल की गर्इ किसी अपील से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों में, ऐसे आदेश की तारीख से एक सौ अस्सी दिन से अनधिक की अवधि के लिए रोक आदेश पारित कर सकेगा और अपील अधिकरण उस आदेश में विनिर्दिष्ट रोक की उक्त अवधि के भीतर अपील का निपटारा करेगा :
परन्तु यह और कि जहां ऐसी अपील का उस प्रकार निपटारा रोक आदेश में यथाविनिर्दिष्ट रोक की उक्त अवधि के भीतर नहीं किया जाता है वहां अपील अधिकरण निर्धारिती द्वारा इस निमित्त किए गए आवेदन पर और यह समाधान हो जाने पर कि अपील का निपटारा करने में विलंब निर्धारिती के कारण नहीं हुआ है, रोक की अवधि को बढ़ा सकेगा या ऐसी अतिरिक्त अवधि या अवधियों के लिए रोक आदेश पारित कर सकेगा, जो वह ठीक समझे; किंतु आरंभिक रूप से अनुज्ञात अवधि और इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ या अनुज्ञात अवधि या अवधियों का योग किसी भी दशा में तीन सौ पैंसठ दिन से अधिक नहीं होगा और अपील अधिकरण इस प्रकार बढ़ार्इ गर्इ या अनुज्ञात की गर्इ रोक की अवधि या अवधियों के भीतर अपील का निपटारा करेगा :
80क[परन्तु यह भी कि यदि ऐसी अपील का पहले परंतुक के अधीन अनुज्ञात अवधि या दूसरे परंतुक के अधीन विस्तारित या अनुज्ञात अवधि या अवधियों के भीतर, जो किसी भी दशा में तीन सौ पैंसठ दिन से अधिक की नहीं होगी या होंगी, इस प्रकार निपटारा नहीं किया जाता है तो रोक आदेश ऐसी अवधि या अवधियों की समाप्ति के पश्चात् निष्प्रभावी हो जाएगा भले ही अपील का निपटारा करने में विलंब निर्धारिती की ओर से नहीं हुआ है।]]
(2ख) अपील प्राधिकरण में अपील का खर्चा उस अधिकरण के विवेकानुसार होगा।]
(3) अपील अधिकरण इस धारा के अधीन पारित किन्हीं आदेशों की प्रति निर्धारिती को और 81[82[* * *] आयुक्त] को भेजेगा।
(4) 83[राष्ट्रीय कर अधिकरण अधिनियम, 2005] में उपबंधित के सिवाय, अपील अधिकरण द्वारा अपील में पारित आदेश अंतिम होंगे।
73. "........ ऐसे आदेश पारित कर सकेगा जो वे ठीक समझे" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
74. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1972 द्वारा 1.1.1973 से लोप किया गया। मूल उपधारा, वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। इस संशोधन के संबंध में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1972 की धारा 25 द्वारा निम्नलिखित स्वतंत्र उपबंध किया गया है :
"व्यावृतियां और विशेष उपबंध.–(1) इस अधिनियम की धारा 3 द्वारा आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 254 की उपधारा (1क) के लोप के बावजूद उस उपधारा के प्रति निर्देश करने के लिए अपीलाथ्र्ाी द्वारा प्रत्येक अध्यपेक्षा और ऐसे लोप से पूर्व उस उपधारा के अधीन किया गया प्रत्येक निर्देश पर इस प्रकार कार्यवाही की जाएगी मानो उक्त धारा का लोप न किया गया हो और उपरोक्त के सिवाय ऐसे लोप के बाद कोर्इ निर्देश नहीं किया जाएगा।"
75. "भूल ........ जो अभिलेख से प्रकट है" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
76. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
77. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
78. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से उपधारा (2क) और उपधारा (2ख) अंत:स्थापित की गर्इ।
79. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से अंत:स्थापित।
80. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से अंत:स्थापित परन्तुक इस प्रकार थे :
"परन्तु जहां धारा 253 की उपधारा (1) के अधीन फाइल की गर्इ अपील से संबंधित किन्हीं कार्यवाहियों में कोर्इ रोक आदेश किया जाए वहां अपील अधिकरण अपील का निपटारा ऐसे आदेश की तारीख से 180 दिन की अवधि के भीतर करेगा :
परन्तु यह और कि यदि ऐसी अपील का निपटारा प्रथम परन्तुक में दी गर्इ अवधि के भीतर इस प्रकार नहीं किया जाता है तो रोक आदेश उक्त अवधि बीतने के पश्चात् निष्प्रभाव हो जाएगा।"
80क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.10.2008 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व परन्तुक इस प्रकार था :
"परन्तु यह भी कि यदि ऐसी अपील का उस प्रकार निपटारा पहले परंतुक के अधीन अनुज्ञात अवधि या दूसरे परंतुक के अधीन बढ़ार्इ गर्इ या अनुज्ञात अवधि या अवधियों के भीतर नहीं किया जाता है तो रोक आदेश ऐसी अवधि या अवधियों के बीतने के पश्चात् निष्प्रभावी हो जाएगा।"
81. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
82. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 27.9.1991 से "मुख्य आयुक्त या" शब्दों का लोप किया गया।
83. राष्ट्रीय कर अधिकरण अधिनियम, 2005 द्वारा, इसके अधिसूचित किए जाने की तारीख से, "धारा 256 या धारा 260क" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "धारा 256" के स्थान पर "धारा 256 या धारा 260क" शब्द वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से प्रतिस्थापित किए गए थे।
[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

