अपील अधिकरण को अपीलें
41अपील अधिकरण को अपीलें
42253. (1) कोर्इ निर्धारिती, जो निम्नलिखित आदेशों में से किसी से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील कर सकेगा–
(क) वह आदेश जो 43[1 अक्तूबर, 1998 से पूर्व] 44[***] 45[धारा 154], 46[***] धारा 250, 46क[धारा 270क ,]47[धारा 271, धारा 271क या धारा 272क] के अधीन 48[यथास्थिति, 49[उपायुक्त (अपील)] या आयुक्त (अपील)] द्वारा पारित किया गया है, या
50[(ख) वह आदेश जो 30 जून, 1995 के पश्चात् किन्तु 1 जनवरी, 1997 से पूर्व, धारा 132 के अधीन आरम्भ की गर्इ तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किया गया हो; या]
51[(खक) वह आदेश जो धारा 115फयग की उपधारा (1) के अधीन किसी निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किया गया हो;]
(ग) वह आदेश जो 52[धारा 12कक के अधीन 53[या धारा 80छ की उपधारा (5) के खंड (vi) के अधीन]] या धारा 263 के अधीन 53क[या धारा 270क के अधीन] 54[या धारा 271 के अधीन] 55[या धारा 272क के अधीन] 56[***] 56क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा पारित किया गया है, या वह आदेश जो उसके द्वारा धारा 263 के अधीन अपने आदेश का संशोधन करते हुए धारा 154 के अधीन पारित किया गया है 57[या वह आदेश जो धारा 272क के अधीन किसी 56क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 56क[प्रधान महानिदेशक या] महानिदेशक या 56क[प्रधान निदेशक या] निदेशक द्वारा पारित किया गया है 57क[; या]]
57क[(घ) विवाद समाधान पैनल के निदेशों के अनुसरण में धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 147 57ख[या धारा 153क या धारा 153ग] के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित कोर्इ आदेश या ऐसे आदेश की बाबत धारा 154 के अधीन पारित कोर्इ आदेश;]
57ग[(ड़) धारा 144खक की उपधारा (12) में यथानिर्दिष्ट 57घ[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त के अनुमोदन से धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 147 या धारा 153क या धारा 153ग के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित कोर्इ आदेश या ऐसे आदेश की बाबत धारा 154 या धारा 155 के अधीन पारित कोर्इ आदेश;]
57घघ[(च) विहित प्राधिकारी द्वारा धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अधीन पारित कोर्इ आदेश;]
(2) 57ड़[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त, यदि वह 58[यथास्थिति] 59[उपायुक्त (अपील)] 58[या आयुक्त (अपील)] द्वारा 60[1 अक्तूबर, 1998 से पूर्व] 61[धारा 154 या] धारा 250 के अधीन पारित किसी आदेश के संबंध में आपत्ति करता है, तो 62[निर्धारण] अधिकारी को उस आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील करने का निदेश दे सकेगा।
(2क) 62क[***]
(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन प्रत्येक अपील उस तारीख से साठ दिन के भीतर फाइल की जाएगी जिसको वह आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की जानी र्इप्सित है, यथास्थिति, निर्धारिती को या 57ड़[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त को, संसूचित किया जाता है :
63[परन्तु उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन किसी अपील की बाबत इस उपधारा का वही प्रभाव होगा मानो ''साठ दिन'' शब्दों के स्थान पर ''तीस दिन'' शब्द रखे गए हों।]
(3क) 64[***]
65-68[(4) यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या निर्धारिती, यह सूचना प्राप्त होने पर कि, आयुक्त (अपील) के आदेश के विरुद्ध उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन अपील दूसरे पक्षकार द्वारा की गर्इ है, इस बात के होते हुए भी कि उसके द्वारा ऐसे आदेश या उसके किसी भाग69 के विरुद्ध अपील न की गर्इ हो, सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर, आयुक्त (अपील) के आदेश के किसी भाग के विरुद्ध विहित रीति में सत्यापित प्रत्याक्षेपों का एक ज्ञापन फाइल कर सकेगा और ऐसे ज्ञापन का निपटारा अपील अधिकरण द्वारा इस प्रकार किया जाएगा मानो वह उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत की गर्इ अपील हो।]
(5) अपील अधिकरण उपधारा (3) या उपधारा (4) में निर्दिष्ट सुसंगत अवधि की समाप्ति के पश्चात् किसी अपील को ग्रहण करेगा या प्रत्याक्षेपों का ज्ञापन फाइल करने की अनुज्ञा दे सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि उस अवधि के भीतर उसे पेश न करने के लिए पर्याप्त कारण था।
70[(6) अपील अधिकरण को अपील विहित प्ररूप71 में की जाएगी और उसका सत्यापन विहित रीति से किया जाएगा और उससे संबंधित निर्धारण कार्यवाहियों के प्रारम्भ की तारीख पर विचार किए बिना, 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् की गर्इ अपील की दशा में, उसके साथ–
(क) जहां निर्धारण अधिकारी द्वारा संगणित निर्धारिती की कुल आय, ऐसे मामले में जिससे अपील संबंधित है, एक लाख रुपए या उससे कम है, वहां पांच सौ रुपए की फीस होगी;
(ख) जहां पूर्वोक्त रूप में संगणित निर्धारिती की कुल आय, ऐसे मामले में जिससे अपील संबंधित है, एक लाख रुपए से अधिक है किंतु दो लाख रुपए से अधिक नहीं है, वहां एक हजार पांच सौ रुपए की फीस होगी;
(ग) जहां उपरोक्त रूप में संगणित निर्धारिती की कुल आय, ऐसे मामले में जिससे अपील संबंधित है, दो लाख रुपए से अधिक है वहां निर्धारित आय की एक प्रतिशत फीस होगी, जो अधिक से अधिक दस हजार रुपए होगी;
72[(घ) जहां अपील की विषयवस्तु खंड (क), (ख) और (ग) में विनिर्दिष्ट मामलों से भिन्न किसी मामले के संबंध में है; वहां पांच सौ रुपए की फीस होगी :]
72क[परंतु उपधारा (2) या उपधारा (2क) में निर्दिष्ट किसी अपील या उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रत्याक्षेपों के किसी ज्ञापन के मामले में कोर्इ फीस संदेय नहीं होगी जैसा कि वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा इसके संशोधन के पूर्व था।]
(7) मांग को रोकने संबंधी आवेदन के साथ पांच सौ रुपए की फीस होगी।]
41. अपील अधिकरण के अपील के प्ररूप और प्रत्याक्षेपों के प्ररूप के लिए देखिये नियम 47(1) और प्ररूप सं. 36 और 36क.
42. आय-कर अपील अधिकरण द्वारा जारी अनुदेश भी देखिये।
43. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
44. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से ''धारा 131 की उपधारा (2),'' शब्दों और अंकों का लोप किया गया।
45. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।
46. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से ''धारा 246क'' शब्दों और अंकों का लोप किया गया। इससे पूर्व ये प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से अंत:स्थापित किए गए थे।
46क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से इटैलिक में दिए गए शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे।
47. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से ''या धारा 271'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
48. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
49. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''सहायक आयुक्त (अपील)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
50. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1997 द्वारा 1.1.1997 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व खंड (ख), जो वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था :
''(ख) धारा 158खग के खंड (ग) के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित आदेश; या''
इससे पूर्व खंड (ख), प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से संशोधित की गर्इ थी और बाद में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से उसका लोप किया गया था।
51. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
52. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।
53. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से अंत:स्थापित।
53क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से इटैलिक में दिए गए शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे।
54. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।
55. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।
56. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से ''या धारा 285क के अधीन'' का लोप किया गया। लोप किए गए शब्द पूर्व में प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित किए गए थे।
56क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
57. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
57क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से अंत:स्थापित।
57ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.10.2009 भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
57ग. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2016 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व खंड (क) वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से अंत:स्थापित किया गया था और वित्त अधिनियम 2013 द्वारा 1.4.2013 से उसका लोप किया गया था।
57घ. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
57घघ. वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.6.2015 से अंत:स्थापित।
57ड़. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
58. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से अंत:स्थापित।
59. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''सहायक आयुक्त (अपील)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
60. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।
61. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।
62. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आय-कर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
62क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से लोप किया गया। लोप से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से संशोधित उपधारा (2क) इस प्रकार थी:
"(2क) प्रधान आयुक्त या आयुक्त, यदि वह धारा 144ग की उपधारा (2) के अधीन निर्धारिती द्वारा 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात् फाइल किए गए किसी आक्षेप की बाबत धारा 144ग की उपधारा (5) के अधीन विवाद समाधान पैनल द्वारा जारी किए गए ऐसे किसी निदेश के प्रति आक्षेप करता है, जिसके अनुसरण में निर्धारण अधिकारी ने निर्धारण या पुनर्निर्धारण पूरा करते हुए आदेश पारित किया है, निर्धारण अधिकारी को उस आदेश के विरुद्ध अपील अधिकरण को अपील करने का निदेश दे सकेगा।"
63. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित।
64. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से लोप किया गया। लोप से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित उपधारा (3क) इस प्रकार थी:
"(3क) उपधारा (2क) के अधीन प्रत्येक अपील उस तारीख के, जिसको धारा 144ग की उपधारा (5) के अधीन विवाद समाधान पैनल के निदेशों के अनुसरण में निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किए गए आदेश के विरुद्ध अपील किए जाने की वांछा की गर्इ है, साठ दिन के भीतर फाइल की जाएगी।"
65-68. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से संशोधित उपधारा (4) इस प्रकार थी:
"(4) यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या निर्धारिती, यह सूचना प्राप्त होने पर कि, यथास्थिति, उपायुक्त (अपील) या आयुक्त (अपील) या विवाद समाधान पैनल के निदेशों के अनुसरण में निर्धारण अधिकारी के आदेश के विरुद्ध उपधारा (1) या उपधारा (2) या उपधारा (2क) के अधीन अपील दूसरे पक्षकार द्वारा की गर्इ है, इस बात के होते हुए भी कि उसने ऐसे आदेश या उसके किसी भाग के विरुद्ध अपील न की हो, सूचना की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर, यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी (विवाद समाधान पैनल के निदेशों के अनुसरण में) या उपायुक्त (अपील) या आयुक्त (अपील) के आदेश के किसी भाग के विरुद्ध विहित रीति में सत्यापित प्रत्याक्षेपों का एक ज्ञापन फाइल कर सकेगा और ऐसा ज्ञापन अपील अधिकरण द्वारा इस प्रकार निपटाया जाएगा मानो वह उपधारा (3) या उपधारा (3क) में विनिद्रिष्ट समय के भीतर प्रस्तुत की गर्इ कोर्इ अपील हो।"
69. ''आदेश के किसी भाग'' पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
70. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से उपधारा (6) के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, उपधारा (6), का कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.6.1981 से और वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से संशोधन किया गया था और बाद में वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.6.1992 से भूतलक्षी प्रभाव से वह प्रतिस्थापित की गर्इ थी।
71. नियम 47 और प्ररूप सं. 36 एवं 36क देखिए।
72. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.6.1999 से अंत:स्थापित।
72क. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.7.2012 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, परन्तुक इस प्रकार था।
"परन्तु उपधारा (2) में निर्दिष्ट किसी अपील की दशा में या उपधारा (4) में निर्दिष्ट प्रत्याक्षेपों के ज्ञापन की दशा में, ऐसी कोर्इ फीस संदेय नहीं होगी।"
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

