आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 246

अपीलीय आदेश

धारा

धारा संख्या

246

अध्याय शीर्षक

अध्याय XX - अपील और संशोधन

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

अपीलीय आदेश

अपीलीय आदेश

अध्याय 20

अपीलें और पुनरीक्षण

16[क.–उपायुक्त (अपील) और आयुक्त (अपील) को अपीलें 17[* * *]

अपीलीय आदेश

246. (1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए कोर्इ निर्धारिती, जो (उपायुक्त से भिन्न) निर्धारण अधिकारी के निम्नलिखित किसी आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध उपायुक्त (अपील) को 18[1 जून, 2000 के पूर्व] अपील कर सकेगा–

() निर्धारिती के विरुद्ध आदेश, जहां निर्धारिती इस अधिनियम के अधीन निर्धारित किए जाने के अपने दायित्व से इंकार19 करता है, 20[या धारा 143 की उपधारा (1) या उपधारा (1ख) के अधीन किसी संसूचना, जहां निर्धारिती समायोजन किए जाने पर आपत्ति करता है] या धारा 143 या उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन निर्धारण का कोर्इ आदेश जहां निर्धारिती, निर्धारित आय की रकम या अवधारित कर की रकम या संगणित हानि की रकम या ऐसी प्रास्थिति, जिसके अधीन, उसका निर्धारण किया गया है, पर आपत्ति करता है;

() धारा 147 या धारा 150 के अधीन निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना का आदेश;

() धारा 154 या धारा 155 के अधीन ऐसा आदेश, जिसका निर्धारण में वृद्धि करने, या रिफंड में कमी करने का प्रभाव है, या ऐसा आदेश जिसके द्वारा उक्त धाराओं में से किसी के अधीन निर्धारिती द्वारा किए गए दावे को मंजूर करने से इंकार किया गया है;

() धारा 163 के अधीन किया गया कोर्इ ऐसा आदेश जिसमें निर्धारिती को अनिवासी के अभिकर्ता के रूप में माना गया है;

() धारा 170 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन आदेश;

() धारा 171 के अधीन आदेश;

() 21[* * *] 22[1 अप्रैल, 1992 को या उसके पूर्व प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण की बाबत] धारा 185 की उपधारा (1) खंड () के अधीन या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (5) के अधीन आदेश;

() 23[* * *] 24[1 अप्रैल, 1992 को या उसके पूर्व प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण की बाबत] कोर्इ ऐसा आदेश, जिसमें धारा 186 की उपधारा (1) के अधीन या उपधारा (2) के अधीन फर्म या रजिस्ट्रीकरण रद्द किया गया है;

() धारा 201 के अधीन आदेश;

() 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पहले के निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण की बाबत धारा 216 के अधीन आदेश;

() धारा 237 के अधीन आदेश;

() कोर्इ ऐसा आदेश जिसमें–

(i) धारा 221, या

(ii) धारा 271, धारा 271क, धारा 271ख, 25[* * *] 26[धारा 272क, धारा 272कक, या धारा 272खख];

(iii) 1 अप्रैल, 1988 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किन्हीं पहले के निर्धारण वर्षों के लिए किसी निर्धारण की बाबत 27[* * *] धारा 272, धारा 272ख या धारा 273 जैसे कि वे 1 अप्रैल, 1989 के ठीक पूर्व विद्यमान थीं।

28[(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, 1 अक्तूबर, 1998 को या उसके पश्चात् किन्तु 1 जून, 2000 से पूर्व उपायुक्त (अपील) के समक्ष फाइल की गर्इ प्रत्येक अपील और ऐसी अपील से उत्पन्न होने वाला या उससे संबंधित कोर्इ मामला जो इस प्रकार लंबित है, आयुक्त (अपील) को अंतरित माना जाएगा और आयुक्त (अपील) ऐसी अपील या मामले के संबंध में उस प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस दिन था।]

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी कोर्इ निर्धारिती, जो निम्नलिखित आदेशों में से किसी से (चाहे आदेश नियत दिन के पूर्व किया गया हो या उसके पश्चात्) व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध आयुक्त (अपील) को 29[1 जून, 2000 से पूर्व] अपील कर सकेगा।

() 30[उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट संसूचना या आदेश, जहां ऐसी संसूचना भेजी जाती है या ऐसा आदेश] धारा 120 या धारा 124 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए या सौंपे गए कृत्यों का पालन करते हुए उपायुक्त द्वारा किया जाता है;

() उपधारा (1) के खंड () से खंड () (दोनों सहित) और खंड () से खंड () (दोनों सहित) में विनिर्दिष्ट आदेश 31[या 1 अप्रैल, 1987 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पहले के निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण की बाबत धारा 104 के अधीन, जैसी वह 1 अप्रैल, 1988 के ठीक पूर्व विद्यमान, थी कोर्इ आदेश] जो ऐसे निर्धारिती के, जो कंपनी है, विरुद्ध किया जाता है;

() धारा 144क के अधीन उपायुक्त द्वारा जारी किए गए निदेशों के आधार पर 30 सितम्बर, 1984 के पश्चात् किया गया निर्धारण आदेश;

() धारा 154 के अधीन उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;

32[(घक) 1 जनवरी, 1997 को या उसके पश्चात् धारा 132 के अधीन आरंभ की गर्इ तलाशी या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षित लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की बाबत, धारा 158खग के खंड () के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया निर्धारण आदेश;

(घख) धारा 158खचक की उपधारा (2) के अधीन शास्ति अधिरोपित करने संबंधी आदेश;

() धारा 271ख 33[या धारा 271खख] के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी आदेश;

34[(ड़ड़) धारा 271ग, धारा 271घ या धारा 271ड़ के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;]

() धारा 272क के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी उपायुक्त या उप निदेशक द्वारा किया गया आदेश;

35[(चच) धारा 272कक के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;]

36[() अध्याय 21 के अधीन शास्ति अधिरोपित संबंधी आय-कर अधिकारी या सहायक आयुक्त का आदेश, जहां ऐसी शास्ति धारा 274 की उपधारा (2) के अधीन उपायुक्त के पूर्व अनुमोदन से अधिरोपित की गर्इ है;]

() ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्गों की दशा में, जो बोर्ड, मामलों की प्रकृति, जटिलताओं और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए, निदेश दे, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन (उपायुक्त से भिन्न) निर्धारण अधिकारी द्वारा किया गया आदेश।

(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड या महानिदेशक या मुख्य आयुक्त या आयुक्त यदि वह बोर्ड द्वारा इस प्रकार प्राधिकृत किया जाए, लिखित आदेश द्वारा, ऐसी किसी अपील को जो उपायुक्त (अपील) के समक्ष लंबित है, और ऐसी अपील से उद्भूत होने वाले या उससे संबंधित किसी मामले को, जो इस प्रकार लंबित है, आयुक्त (अपील) को अंतरित कर सकेगा, यदि यथास्थिति, बोर्ड या महानिदेशक या मुख्य आयुक्त या आयुक्त का (अपीलाथ्र्ाी के अनुरोध पर या अन्यथा) यह समाधान हो जाता है कि मामले की प्रकृति, जटिलताओं और अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए, ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है और आयुक्त (अपील) ऐसी अपील या मामले में उस प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस समय था, जब उसे इस प्रकार अंतरित किया गया था :

परन्तु अपीलाथ्र्ाी यह मांग कर सकेगा कि ऐसी अपील या मामले में आगे कार्यवाही करने के पूर्व, पूर्व कार्यवाही या उसके किसी भाग पर नए सिरे पर विचार किया जाए या उसकी फिर से सुनवार्इ की जाए।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

() "नियत दिन" से 10 जुलार्इ, 1978 अभिप्रेत है, जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 (1977 का 29) की धारा 39 के अधीन नियत किया गया दिन है;

() "प्रास्थिति" से वह प्रवर्ग अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत निर्धारिती का निर्धारण "व्यष्टि", "हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब" आदि के रूप में किया जाता है।

 

16. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "शीर्षक" और "धारा 246" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "उपशीर्षक" और "धारा 246" जो वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से, वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1967 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 10.7.1978 से, वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.6.1979 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से, वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988/1.6.1987 से भूतलक्षी रूप से, संशोधित किए गए थे, इस प्रकार थे :

'क–आयुक्त (अपील) और उपायुक्त (अपील) को अपीलें

246. अपीलीय आदेश–(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए कोर्इ निर्धारिती जो किसी निर्धारण अधिकारी के निम्नलिखित आदेशों में से किसी आदेश से व्यथित है, ऐसे आदेश के विरुद्ध उपायुक्त (अपील) के समक्ष अपील कर सकेगा–

() [* * *]

() धारा 131 की उपधारा (2) के अधीन जुर्माना अधिरोपित करने वाला आदेश;

() निर्धारिती के विरुद्ध आदेश, जहां निर्धारिती इस अधिनियम के अधीन निर्धारित किए जाने के अपने दायित्व से इंकार करता है, अथवा धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन कोर्इ निर्धारण आदेश, जहां निर्धारिती निर्धारित आय की रकम पर अथवा अवधारित कर राशि पर अथवा संगणित हानि की राशि पर अथवा इस हैसियत पर जिसके अधीन उसका कर निर्धारण किया गया है, आपत्ति करता है;

() धारा 144 के अधीन किए गए निर्धारण को पुन: खोलने से इंकार करने संबंधी धारा 146 के अधीन पारित आदेश;

() धारा 147 या धारा 150 के अधीन निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना का कोर्इ आदेश;

() धारा 154 या धारा 155 के अधीन आदेश, जिसके निर्धारण बढ़ाने या रिफंड घटाने का प्रभाव है अथवा ऐसा आदेश जिसके द्वारा उक्त धाराओं में से किसी भी धारा के अधीन निर्धारिती के दावे को मानने से इंकार किया गया है;

() निर्धारिती को अनिवासी का एजेंट मानते हुए धारा 163 के अधीन किया गया आदेश;

() धारा 170 की उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन आदेश;

() धारा 171 के अधीन आदेश;

() धारा 185 की उपधारा (1) के खंड () या उपधारा (2) या उपधारा (3) या उपधारा (5) के अधीन आदेश;

() धारा 186 की उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन फर्म का रजिस्ट्रेशन रद्द करने वाला आदेश;

() धारा 201 के अधीन आदेश;

() धारा 216 के अधीन आदेश;

(ढ़) धारा 237 के अधीन आदेश;

() निम्नलिखित धाराओं के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश–

(i) धारा 140क, या

(iक) धारा 221, या

(ii) धारा 270, या

(iii) धारा 271, या

(iiiक) धारा 271क, या

(iv) धारा 272, या

(ivक) धारा 272ख, या धारा 272खख, या

(v) धारा 273 [* * *]

[* * *]

स्पष्टीकरण.–[* * *]

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, निम्नलिखित आदेशों में से किसी से व्यथित कोर्इ निर्धारिती (चाहे नियत दिन से पूर्व किया गया हो या बाद में) ऐसे आदेश के विरुद्ध आयुक्त (अपील) को अपील कर सकेगा–

() 1 अप्रैल, 1987 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या इससे पहले के किसी निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण की बाबत उपधारा (1) के खंड () से () (दोनों सहित) और खंड () से () (दोनों सहित) में विनिर्दिष्ट आदेश अथवा 1 अप्रैल, 1988 से ठीक पूर्व यथा विद्यमान धारा 104 के अधीन आदेश, जो निर्धारिती के विरुद्ध, जो कंपनी है, किया गया हो;

() उपधारा (1) के खंड () से () (दोनों सहित) में विनिर्दिष्ट आदेश, जहां ऐसा आदेश उपायुक्त द्वारा धारा 125 या धारा 125क के अधीन उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए या सौंपे गए कार्यों का पालन करते हुए किया जाता है;

() धारा 131 की उपधारा (2) के अधीन उपायुक्त द्वारा जुर्माना अधिरोपित करने संबंधी आदेश;

() धारा 144क के अधीन उपायुक्त द्वारा जारी निदेशों के आधार पर, 30 सितम्बर, 1984 के पश्चात् किया गया निर्धारण आदेश;

() [* * *];

() धारा 144ख के अधीन उपायुक्त द्वारा जारी निदेशों के आधार पर, धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 के अधीन किया गया निर्धारण आदेश;

(चच) धारा 154 के अधीन उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;

() धारा 271 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश, जहां ऐसी शास्ति उस धारा की उपधारा (1) के खंड (iii) के परन्तुक के अधीन उपायुक्त के पूर्व अनुमोदन से अधिरोपित की गर्इ है;

(छछ) धारा 271ख के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश;

() धारा 272क के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला उपायुक्त द्वारा किया गया आदेश;

() इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा ऐसे व्यक्तियों या व्यक्ति के वर्गों के मामले में किया गया आदेश जो बोर्ड मामले की प्रकृति को, उसकी जटिलताओं और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए निदेश दे।

(3) उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट आदेश के विरुद्ध प्रत्येक अपील जो सहायक आयुक्त (अपील) या आयुक्त के समक्ष नियत दिन के ठीक पूर्व लम्बित हो और ऐसी अपील से उत्पन्न या सम्बद्ध कोर्इ मामला जो इस प्रकार लम्बित हो उस दिन आयुक्त (अपील) को अंतरित हो जाएगा तथा आयुक्त (अपील) उस अपील या मामले पर उसी प्रक्रम से कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस दिन था :

परन्तु अपीलार्थी यह मांग कर सकेगा कि अपील या मामले में आगे कार्यवाही करने से पहले, पूर्व कार्यवाही या उसका कोर्इ भाग पुन: खोला जाए और उसे उस पर सुना जाए।

(4) निर्धारिती जो कंपनी हो, के विरुद्ध उपधारा (1) के खंड () से () (दोनों सहित) और खंड () से () (दोनों सहित) के आदेश के विरुद्ध प्रत्येक अपील, जो सहायक आयुक्त (अपील) के समक्ष 1 जून, 1979 के ठीक पूर्व लम्बित हो और ऐसी अपील से उत्पन्न तथा सम्बद्ध कोर्इ मामला जो इस प्रकार लम्बित है, आयुक्त (अपील) को उस दिन अंतरित हो जाएगा तथा आयुक्त (अपील) उसी प्रक्रम से उस अपील या मामले में आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह उस दिन था :

परन्तु अपीलार्थी यह मांग कर सकेगा कि उस अपील या मामले में आगे कार्यवाही करने से पहले, पूर्व कार्यवाही या उसका कोर्इ भाग पुन: खोला जाए या उसे सुना जाए।

(5) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, बोर्ड लिखित आदेश द्वारा, किसी अपील को जो उपायुक्त (अपील) के समक्ष लम्बित है और ऐसी अपील से उत्पन्न या सम्बद्ध किसी मामले को, जो लम्बित है, आयुक्त (अपील) को अंतरित कर सकेगा, यदि बोर्ड का यह समाधान हो जाता है कि मामले की प्रकृति, उसकी जटिलताओं और सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तथा आयुक्त (अपील) ऐसी अपील या मामले में उसी प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस प्रक्रम पर वह इस प्रकार अंतरित किए जाने से पूर्व था :

परन्तु अपीलार्थी यह मांग कर सकेगा कि अपील या मामले में आगे कार्यवाही करने से पहले, पूर्व कार्यवाही या उसका कोर्इ भाग पुन: खोला जाए और उसे सुना जाए।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "नियत दिन" से वह तारीख अभिप्रेत है जो वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 (1977 का 29) की धारा 39 के अनुसार नियत है;

() [* * *]

() "हैसियत" से वह प्रवर्ग अभिप्रेत है जिसके अन्तर्गत निर्धारिती का निर्धारण "व्यष्टि", "हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब" और इसी प्रकार किया जाता है।'

17. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "या आवेदन" शब्दों का लोप किया गया।

18. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से अंत:स्थापित।

19. "निर्धारित किए जाने के अपने दायित्व से इंकार" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

20. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से अंत:स्थापित।

21. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "1अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या पहले के किसी निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण की बाबत" शब्दों का लोप किया गया।

22. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।

23. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या पहले के किसी निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण की बाबत" शब्दों का लोप किया गया।

24. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।

25. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से "धारा 271ग, धारा 271घ, धारा 271ड़" का लोप किया गया।

26. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से "धारा 271ड़ या धारा 272क" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

27. यथोक्त द्वारा "धारा 271 की उपधारा (1)" शब्दों का लोप किया गया।

28. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.6.2000 से अंत:स्थापित।

29. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

30. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.6.1994 से "उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट आदेश, जहां ऐसा आदेश" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

31. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

32. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1997 द्वारा 1.1.1997 से अंत:स्थापित।

33. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1990 से अंत:स्थापित।

34. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

35. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

36. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से निम्नलिखित के स्थान पर प्रतिस्थापित :

"() 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या पहले के किन्हीं निर्धारण वर्षों के किसी निर्धारण की बाबत 1 अप्रैल, 1989 से ठीक पूर्व विद्यमान धारा 271 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन शास्ति अधिरोपित करने वाला आदेश, जहां ऐसी शास्ति उस धारा की उपधारा (1) के खंड (iii) के परंतुक के अधीन उपायुक्त के पूर्व अनुमोदन से अधिरोपित की गर्इ है।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

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