राजस्व संरक्षण के लिए अनन्तिम कुर्की का आदेश करने की समझौता आयोग की शक्ति
36[राजस्व संरक्षण के लिए अनन्तिम कुर्की का आदेश करने की समझौता आयोग की शक्ति
245घघ. (1) जहां समझौता आयोग की, अपने समक्ष लंबित किसी कार्यवाही के दौरान, यह राय है कि राजस्व के हितों के संरक्षण के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है, तो वह, आदेश द्वारा आवेदक की किसी संपत्ति को दूसरी अनुसूची में उपबंधित रीति से अनंतिम रूप से कुर्क करवा सकेगा :
परन्तु जहां धारा 281ख के अधीन की गर्इ अनंतिम कुर्की, धारा 245ग के अधीन आवेदन किए जाने के ठीक पूर्व लंबित है, वहां इस उपधारा के अधीन आदेश ऐसे अनंतिम कुर्की को, उस अवधि तक बनाए रखेगा जिस तक धारा 281ख के अधीन किया गया आदेश बनाए रखता, यदि ऐसा आवेदन नहीं किया गया होता :
परन्तु यह और कि जहां समझौता आयोग पूर्वगामी परंतुक में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पश्चात् इस उपधारा के अधीन कोर्इ आदेश पारित करता है, वहां उपधारा (2) के उपबंध उस आदेश को इस प्रकार लागू होंगे मानो उक्त आदेश समझौता आयोग द्वारा मूलत: पारित किया गया हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन समझौता आयोग द्वारा की गर्इ प्रत्येक अनंतिम कुर्की, उपधारा (1) के अधीन किए गए आदेश की तारीख से छह मास की अवधि की समाप्ति के पश्चात्, प्रभावहीन हो जाएगी :
परन्तु समझौता आयोग, ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएं, पूर्वोक्त अवधि को इतनी और अवधि या अवधियों के लिए बढ़ा सकेगा जो वह ठीक समझे 37[***]।]
36. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
37. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2008 से लोप किया गया।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

