प्रतिदायों पर ब्याज
76[प्रतिदायों पर ब्याज
77244क. (1) 78[जहां इस अधिनियम के अधीन किसी रकम का प्रतिदाय निर्धारिती को देय हो जाता है], वहां वह इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उक्त रकम के अतिरिक्त उस पर साधारण ब्याज प्राप्त करने का हकदार होगा जो निम्नलिखित रीति से संगणित किया जाएगा, अर्थात् :–
79-82[(क) जहां प्रतिदाय, निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 206ग के अधीन स्रोत पर संगृहीत किया जाता है या धारा 199 के अधीन अग्रिम के रूप में संदत्त या संदत्त किया गया समझा जाता है, वहां ऐसा ब्याज निम्नलिखित अवधि में सम्मिलित प्रत्येक मास या उसके किसी भाग के लिए आधे प्रतिशत की दर से संगणित किया जाएगा:–
(i) यदि आय की विवरणी धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन नियत तारीख को या उसके पूर्व प्रस्तुत की जाती है तो निर्धारण वर्ष के 1 अप्रैल से उस तारीख तक जब प्रतिदाय अनुदत्त किया जाता है; या
(ii) उपखंड (1) के अंतर्गत न आने वाली दशा में आय की विवरणी प्रस्तुत किए जाने की तारीख से उस तारीख तक जब प्रतिदाय अनुदत्त किया जाता है;
(कक) जहां प्रतिदाय धारा 140क के अधीन संदत्त किसी कर में से है, वहां ऐसा ब्याज, आय की विवरणी देने या कर के संदाय की तारीख, जो भी पश्चात्वर्ती हो, से उस तारीख तक, जिसको प्रतिदाय मंजूर किया गया है, अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के किसी भाग के लिए, आधे प्रतिशत की दर से परिकलित किया जाएगा:
परंतु यदि प्रतिदाय की रकम धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन या नियमित निर्धारण पर यथा अवधारित कर के दस प्रतिशत से कम है तो खंड (क) या खंड (कक) के अधीन कोर्इ ब्याज संदेय नहीं होगा;]
(ख)किसी अन्य दशा में, ऐसा ब्याज, कर या शास्ति देने की, यथास्थिति तारीख या तारीखों से उस तारीख तक की जिसको प्रतिदाय मंजूर किया जाता है, अवधि या अवधियों में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के भाग के लिए 83[आधा प्रतिशत] की दर से संगणित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''कर या शास्ति के संदाय की तारीख'' से अभिप्रेत है वह तारीख जिसको और जिससे धारा 156 के अधीन जारी की गर्इ मांग सूचना में विनिर्दिष्ट कर या शास्ति की रकम ऐसी मांग से अधिक दी जाती है।
84[(1क) उस दशा में जहां प्रतिदाय नया निर्धारण या पुनर्निर्धारण करने से अन्यथा पूर्णत: या भागत: धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश को प्रभावी करने के परिणामस्वरूप उद्भूत होता है, वहां निर्धारिती उपधारा (1) के अधीन संदेय ब्याज के अतिरिक्त, धारा 153 की उपधारा (5) के अधीन अनुज्ञात अवधि के अवसान की तारीख की पश्चात्वर्ती तारीख से, उस तारीख तक जिसको प्रतिदाय मंजूर किया जाता है, आरंभ होने वाली अवधि के लिए तीन प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर पर परिकलित ऐसे प्रतिदाय की रकम पर अतिरिक्त ब्याज प्राप्त करने का हकदार होगा ।]
84क[(1ख) जहां अध्याय 17ख के अधीन केंद्रीय सरकार के खाते में संदत्त किसी रकम के संबंध में किसी रकम का प्रतिदाय कटौतीकर्ता को देय हो जाता है, वहां ऐसा कटौतीकर्ता, उस तारीख से, जिसको,–
(क) प्रतिदाय के लिए दावा विहित प्ररूप में किया जाता है; या
(ख) कर संदत्त किया जाता है, जहां धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 के अधीन किसी आदेश को प्रभावी करने के मद्दे प्रतिदाय उद्भूत होता है,
उस तारीख तक, जिसको प्रतिदाय अनुदत्त किया जाता है, की अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या मास के किसी भाग के लिए उक्त रकम के अतिरिक्त उस पर आधा प्रतिशत की दर से परिकलित साधारण ब्याज प्राप्त करने का हकदार होगा।]
(2) यदि ऐसी कार्यवाहियों में जिनका परिणाम प्रतिदाय है, विलंब, चाहे पूर्णत: या भागत: 84कक[यथास्थिति, निर्धारिती या कटौतीकर्ता] के कारण हुआ माना जाता है, तो ऐसे विलम्ब की अवधि को, जिसे उसके कारण इस प्रकार हुआ माना जा सकता है, उस अवधि में से निकाल दिया जाएगा जिसके लिए 84[उपधारा (1) या उपधारा (1क) 84क[या उपधारा (1ख)]के अधीन] ब्याज संदेय है, और जहां निकाली जाने वाली अवधि के बारे में कोर्इ प्रश्न उठता है, वहां उसका विनिश्चय 84ख[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 84ख[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा किया जाएगा और उस पर उसका विनिश्चय अंतिम होगा।
(3) जहां 85[धारा 115बड़ की उपधारा (3) या धारा 115बच या धारा 115बछ या]86[धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 या] धारा 147 या धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अथवा धारा 245घ की उपधारा (4) के अधीन समझौता आयोग के किसी आदेश के परिणामस्वरूप ऐसी रकम जिस पर उपधारा (1) के अधीन ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ार्इ गर्इ है, या घटार्इ गर्इ है, वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा दिया जाएगा या घटा दिया जाएगा और किसी ऐसी दशा में जहां ब्याज घटाया जाता है, वहां निर्धारण अधिकारी, अधिक दी गर्इ ब्याज की रकम को विनिर्दिष्ट करते हुए और ऐसी रकम देने की निर्धारिती से अपेक्षा करते हुए विहित प्ररूप में मांग सूचना की तामील उस पर करेगा और ऐसी मांग सूचना को, धारा 156 के अधीन सूचना समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(4) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के निर्धारणों की बाबत लागू होंगे।]
87[परंतु अनुषंगी फायदों के निर्धारण के संबंध में, इस उपधारा के उपबंधों का वैसे ही प्रभाव होगा, मानों "1989" अंकों के स्थान पर "2006" अंक रखे गए हों।]
76. यथोक्त द्वारा अन्त:स्थापित।
77. परिपत्र सं. 20 डी(XXII-22), तारीख 20.8.1968 भी देखिए।।
78. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से ''जहां इस अधिनियम के अधीन पारित किसी आदेश के अनुसरण में किसी रकम का प्रतिदाय निर्धारिती को देय हो जाता है'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
79-82. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 खंड (क) के स्थान पर खंड (क) और (कक) प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से, वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से, वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से और वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 में संशोधित खंड (क) इस प्रकार था:
"(क) जहां प्रतिदाय निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 115बञ के अधीन संदत्त या धारा 206ग के अधीन स्रोत पर संगृहीत या अग्रिम कर के रूप में संदत्त या धारा 199 के अधीन संदत्त माने गए किस कर में से किया जाता है वहां ऐसा ब्याज, निर्धारण वर्ष के अप्रैल के प्रथम दिन से उस तारीख तक की जिसको प्रतिदाय मंजूर किया जाता है, अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास, या किसी मास के भाग के लिए आधा प्रतिशत की दर से संगणित किया जाएगा :
परन्तु यदि प्रतिदाय की रकम धारा 115बड़ की उपधारा (1) या धारा 143 की उपधारा (1) के अधीन या नियमित निर्धारण पर अवधारित कर के दस प्रतिशत से कम है तो कोर्इ ब्याज संदेय नहीं होगा;"
83. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 8.9.2003 से ''2/3 प्रतिशत'' के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से ''¾ प्रतिशत'' के स्थान पर "2/3 प्रतिशत", वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से ''एक प्रतिशत'' के स्थान पर ''¾ प्रतिशत'' और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से ''डेढ़ प्रतिशत'' के स्थान पर ''एक प्रतिशत'' रखा गया था।
84. वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.6.2016 से अंत:स्थापित।
84क. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।
84कक. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''निर्धारिती'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
84ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
85. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
86. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
87. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

