गृह सम्पत्ति से होने वाली आय में से कटौतियां
85[गृह सम्पत्ति से होने वाली आय में से कटौतियां
24. ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य आय निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् संगणित की जाएगी, अर्थात् :–
(क) ऐसी राशि, जो वार्षिक मूल्य के तीस प्रतिशत के बराबर हो;
(ख) जहां संपत्ति का अर्जन, निर्माण, मरम्मत, नवीकरण या पुन: सन्निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है, वहां ऐसी पूंजी पर संदेय किसी ब्याज की रकम :
परन्तु धारा 23 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट संपत्ति की बाबत कटौती की रकम तीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी :
परन्तु यह और कि जहां पहले परन्तुक में निर्दिष्ट संपत्ति का अर्जन या निर्माण 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् उधार ली गर्इ पूंजी से किया जाता है और ऐसा अर्जन या सन्निर्माण 86[उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें पूंजी उधार ली गर्इ थी, समाप्ति से तीन वर्ष के भीतर] पूरा हो जाता है वहां इस खंड के अधीन कटौती की रकम एक लाख पचास हजार रुपए से अधिक नहीं होगी।
स्पष्टीकरण.–जहां संपत्ति का अर्जन या निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है वहां उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपत्ति का अर्जन या निर्माण किया गया है, पहले की अवधि के लिए उधार ली गर्इ ऐसी पूंजी पर संदेय ब्याज की, यदि कोर्इ हो, जिसमें से वह भाग घटा दिया जाएगा जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है इस खंड के अधीन उक्त पूर्ववर्ष के लिए और उसके ठीक बाद के चार पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए बराबर-बराबर किस्तों में कटौती की जाएगी :
87[परन्तु यह भी कि दूसरे परन्तुक के अधीन कोर्इ कटौती तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती उस व्यक्ति से, जिसको उधार ली गर्इ पूंजी पर कोर्इ ब्याज संदेय है, ऐसा कोर्इ प्रमाणपत्र नहीं दे देता जिसमें संपति के ऐसे अर्जन या निर्माण के प्रयोजन के लिए संदेय ब्याज की रकम को, या उधार ली गर्इ संपूर्ण पूंजी या उसके किसी भाग को विनिर्दिष्ट किया गया हो जो नए ऋण के रूप में प्रतिसंदाय किया जाना शेष रहता है।
स्पष्टीकरण–इस परन्तुक के प्रयोजनों के लिए "नए ऋण" पद से ऐसी पूंजी के प्रतिसंदाय के प्रयोजन के लिए निर्धारिती द्वारा उधार ली गर्इ पूंजी के पश्चात् लिया संपूर्ण ऋण या उसका कोर्इ भाग अभिप्रेत है।]
85. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977 से, वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से, वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1-4-1997/1.4.1995 से भूतलक्षी प्रभाव से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से, वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से और वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से यथा संशोधित धारा 24 इस प्रकार थी :
'24. गृह संपत्ति से आय में से कटौतियां†.–(1) ‘‘गृह संपत्ति से आय’’ शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन निम्नलिखित कटौतियां करने के पश्चात् संगणित की जाएगी, अर्थात् :—
(i) संपत्ति की मरम्मत और उससे किराए के संग्रहण की बाबत, ऐसी राशि जो वार्षिक मूल्य के एक-चौथार्इ भाग के बराबर हो;
(ii) नुकसान या विनाश की जोखिम के विरुद्ध सम्पत्ति का बीमा कराने के लिए संदत्त प्रीमियम की रकम;
(iii) [* * *]
(iv) जहां सम्पत्ति किसी वार्षिक प्रभार के अधीन है (जो प्रभार निर्धारिती द्वारा स्वेच्छया नहीं किया गया है या पूंजी प्रभार नहीं है), वहां ऐसे प्रभार की रकम;
(v) जहां सम्पत्ति की भूमि पर किराया देय है, वहां ऐसी भूमि पर किराए की रकम;
(vi) जहां सम्पत्ति का अर्जन, निर्माण, मरम्मत, नवीकरण या पुन: निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है, वहां ऐसी पूंजी पर संदेय किसी ब्याज की रकम।
स्पष्टीकरण.–जहां संपत्ति का अर्जन या निर्माण उधार ली गर्इ पूंजी से किया गया है वहां उस पूर्ववर्ष के, जिसमें संपत्ति का अर्जन या निर्माण किया गया है, पहले की अवधि के लिए ऐसी पूंजी पर संदेय ब्याज में से, यदि कोर्इ हो, उसका वह भाग घटा दिया जाएगा जो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है और शेष इस खंड के अधीन पूर्व के लिए और उसके ठीक बाद के चार पूर्ववर्षों में से प्रत्येक के लिए बराबर किस्तों में काटा जाएगा;
(vii) संपत्ति के संबंध में भू-राजस्व या राज्य सरकार द्वारा उद्गृहीत किसी अन्य कर की बाबत संदत्त की गर्इ कोर्इ धन राशियां;
(viii) [* * *]
(ix) जहां संपत्ति किराए पर दी गर्इ हो और वह वर्ष के किसी भाग के दौरान खाली रही हो वहां वार्षिक मूल्य का वह भाग, जो उस कालावधि का आनुपातिक है जिसके दौरान संपत्ति संपूर्णत: बिना अधिभोग के रही है या जहां संपत्ति भागों में किराए पर दी गर्इ वहां किसी खाली भाग के लिए समुचित वार्षिक मूल्य का वह भाग, जो उस अवधि का आनुपातिक है जिसके दौरान ऐसा भाग संपूर्णत: बिना अधिभोग के रहा हो।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के अधीन कटौती इस बात का ध्यान किए बिना की जाएगी कि क्या वह अवधि जिसके दौरान, यथास्थिति, संपत्ति या संपत्ति का कोर्इ भाग खाली रहा है उस अवधि के जिसमें वह किराए पर दी गर्इ है पहले आती है या बाद में;
(x) ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जैसे इस निमित्त बनाए जाएं किसी किराएदार को किराए पर दी गर्इ संपत्ति से किराए की ऐसी रकम, जिसे निर्धारिती वसूल नहीं कर सकता।
(2) धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (i) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी :
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ भी बात धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (i) या धारा 23 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत तीस हजार रुपए से अनधिक की रकम की उपधारा (1) के खंड (vi) के अधीन कटौती अनुज्ञात किए जाने को लागू नहीं होगी :
परन्तु यह और कि जहां संपत्ति 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् उधार ली गर्इ पूंजी से अर्जित या निर्मित की जाए और ऐसा अर्जन या निर्माण 1 अप्रैल, 2003 से पूर्व पूरा हो जाए वहां प्रथम परन्तुक के उपबंधों का वही प्रभाव होगा मानो ‘तीस हजार रुपए’ शब्दों के स्थान पर एक लाख रुपए शब्द रखे गए हों।
(3) धारा 23 की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट प्रकृति की संपत्ति की बाबत उपधारा (1) के अधीन कटौती योग्य कुल रकम उस धारा के अधीन यथा अवधारित संपत्ति के वार्षिक मूल्य से अधिक नहीं होगी।
†परिपत्र सं. 363, तारीख 24.6.1983 और परिपत्र सं. 28, तारीख 20.8.1969 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
सुसंगत केस लाज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
86. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से “1 अप्रैल, 2003 से पूर्व” के स्थान पर प्रतिस्थापित।
87. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

