आय की विवरणी देने में व्यतिक्रम के लिए ब्याज
च—कुछ दशाओं में प्रभार्य ब्याज
आय की विवरणी देने में व्यतिक्रम के लिए ब्याज
234क. (1) जहां धारा 139 की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अंतर्गत या धारा 142 की उपधारा (1) के अंतर्गत सूचना के उत्तर में किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी नियत तारीख के पश्चात् दी जाती है या नहीं दी जाती है, वहां निर्धारिती, नियत तारीख के ठीक पश्चात्वर्ती तारीख को प्रारंभ होने वाली और—
(क) जहां विवरणी नियत तारीख के पश्चात् दी जाती है वहां विवरणी देने की तारीख को समाप्त होने वाली; या
(ख) जहां कोर्इ विवरणी नहीं दी गर्इ है वहां, धारा 144 के अंतर्गत निर्धारण के पूरा होने की तारीख को समाप्त होने वाली,
अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए, धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत यथा अवधारित कुल आय पर कर की रकम पर और जहां कोर्इ नियमित निर्धारण किया गया है वहां नियमित निर्धारण के अधीन अवधारित कुल आय पर कर की रकम पर जोकि,—
(i) संदत्त अग्रिम कर, यदि कोर्इ हो;
(ii) स्रोत पर काटे गए या संगृहीत किए गए किसी कर;
16घ[(iiक) धारा 89 के अधीन अनुज्ञात कर की कोर्इ राहत;]
(iii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे पर धारा 90 के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;
(iv) धारा 90क में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे उस धारा के अधीन अनुज्ञात कर की किसी राहत;
(v) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे संदेय भारतीय आय-कर से धारा 91 के अधीन अनुज्ञात किसी कटौती; और
(vi) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किसी कर प्रत्यय,
की रकम को घटाकर आए एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा।
स्पष्टीकरण 1.—इस धारा में "नियत तारीख" से निर्धारिती की दशा में यथा लागू धारा 139 की उपधारा (1) में उल्लिखित तारीख अभिप्रेत है।
स्पष्टीकरण 2.—इस उपधारा में "धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत यथा अवधारित कुल आय पर कर" के अंतर्गत धारा 143 के अधीन देय अतिरिक्त आय-कर, यदि कोर्इ हो, नहीं होगा।
स्पष्टीकरण 3.—जहां, किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, धारा 147 या धारा 153क के अंतर्गत कोर्इ निर्धारण पहली बार किया जाता है, वहां इस प्रकार किए गए निर्धारण को इस धारा के प्रयोजनों के लिए नियमित निर्धारण माना जाएगा।
स्पष्टीकरण 4.—[***]
(2) उपधारा (1) के अंतर्गत संदेय ब्याज में से इस धारा के अंतर्गत प्रभार्य ब्याज के मद्दे धारा 140क के अंतर्गत संदत्त ब्याज को, यदि कोर्इ हो, घटा दिया जाएगा।
(3) जहां धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत आय के अवधारण के पश्चात् या धारा 143 की उपधारा (3) या धारा 144 या धारा 147 के अंतर्गत किसी निर्धारण के पूरा होने के पश्चात्, धारा 148 या धारा 153क के अधीन जारी की गर्इ किसी सूचना द्वारा अपेक्षित किसी निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी ऐसी सूचना के अंतर्गत अनुज्ञात समय की समाप्ति के पश्चात् प्रस्तुत की जाती है या प्रस्तुत नहीं की जाती, वहां निर्धारिती पूर्वोक्त अनुज्ञात समय की समाप्ति के ठीक पश्चात्वर्ती दिन को प्रारंभ होने वाली, और—
(क) जहां विवरणी पूर्वोक्त समय की समाप्ति होने के पश्चात् दी जाती है, विवरणी देने की तारीख को समाप्त होने वाली; या
(ख) जहां कोर्इ विवरणी नहीं दी गर्इ है वहां, धारा 147 या धारा 153क के अंतर्गत पुन: निर्धारण या पुन: संगणना के पूरा होने की तारीख को समाप्त होने वाली,
अवधि में समाविष्ट प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए उस रकम पर जितनी से ऐसे पुन: निर्धारण या पुन: संगणना के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर धारा 143 की उपधारा (1) के अंतर्गत या पूर्वोक्त निर्धारण के आधार पर अवधारित कुल आय पर कर से अधिक हो जाता है, एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करने का दायी होगा।
स्पष्टीकरण.—[***]
(4) जहां धारा 154 या धारा 155 या धारा 250 या धारा 254 या धारा 260 या धारा 262 या धारा 263 या धारा 264 के अंतर्गत किसी आदेश के या धारा 245घ की उपधारा (4) के अंतर्गत समझौता आयोग के किसी आदेश के परिणामस्वरूप ऐसे कर की रकम, जिस पर इस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (3) के अंतर्गत ब्याज संदेय था, यथास्थिति, बढ़ार्इ गर्इ या घटार्इ गर्इ है, वहां ब्याज तदनुसार बढ़ा या घटा दिया जाएगा, और—
(i) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज बढ़ाया जाता है वहां निर्धारण अधिकारी संदेय राशि का उल्लेख करते हुए विहित प्ररूप में मांग की सूचना की तामील निर्धारिती पर करेगा और ऐसी मांग की सूचना को धारा 156 के अंतर्गत सूचना समझा जाएगा और इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे;
(ii) किसी ऐसी दशा में, जहां ब्याज घटाया जाता है, वहां संदत्त अधिक ब्याज का, यदि कोर्इ हो, प्रतिदाय किया जाएगा।
(5) इस धारा के उपबंध 1 अप्रैल, 1989 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए निर्धारणों के संबंध में लागू होंगे।
16घ. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2007 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

