अग्रिम कर का संदाय करने का दायित्व
ग–कर का अग्रिम संदाय
अग्रिम कर का संदाय करने का दायित्व
207. (1) किसी वित्तीय वर्ष के दौरान कर, निर्धारिती की ऐसी कुल आय के बारे में, जो उस वित्तीय वर्ष के ठीक बाद के निर्धारण वर्ष के लिए कर से प्रभार्य होगी, धारा 208 से 219 तक (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) के अनुबंधों के अनुसार अग्रिम रूप से संदेय होगा। ऐसी आय को इस अध्याय में इसके पश्चात् ''चालू आय'' कहा गया है।
(2) उपधारा (1) के उपबंध भारत में ऐसे किसी व्यष्टि निवासी को लागू नहीं होंगे,–
(क) जिसकी "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य कोर्इ आय नहीं है; और
(ख) जिसकी पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय आयु साठ वर्ष या उससे अधिक है।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

