कर-संग्रहण खाता संख्यांक
54[कर-संग्रहण खाता संख्यांक
206गक. (1) धारा 206ग के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए55, निर्धारण अधिकारी को कर-संग्रहण खाता संख्यांक का आबंटन करने के लिए आवेदन करेगा56।
(2) जहां किसी व्यक्ति को कर-संग्रहण खाता संख्यांक आबंटित कर दिया गया है, वहां ऐसा व्यक्ति ऐसे संख्यांक को निम्नलिखित में कोट करेगा,–
(क) धारा 206ग की उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार किसी राशि के संदाय के लिए सभी चालानों में;
(ख) धारा 206ग की उपधारा (5) के अधीन दिए गए सभी प्रमाणपत्रों में;
(ग) किसी आय-कर प्राधिकारी को धारा 206ग की उपधारा (5क) या उपधारा (5ख) के उपबंधों के अनुसरण में दी गर्इ सभी विवरणियों में; और
(घ) ऐसे संव्यवहारों से संबंधित सभी दस्तावेजों में जो राजस्व के हित में विहित किए जाएं:]
57[परन्तु यह कि इस धारा के उपबंध 1 अक्तूबर, 2004 को या उसके पश्चात् लागू नहीं होंगे।]
54. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.6.2002 से अंत:स्थापित।
55. नियम 114कक देखिए।
56. नियम 114कक और प्ररूप सं. 49ख देखिए।
57. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा संशोधित रूप में]

