एल्कोहाली लिकर, वनोत्पाद, स्क्रैप आदि में व्यापार के कारबार से लाभ और अभिलाभ
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एल्कोहाली लिकर, वनोत्पाद, स्क्रैप आदि में व्यापार के कारबार से लाभ और अभिलाभ
206ग. (1) प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता है, क्रेता द्वारा संदेय रकम क्रेता के लेखा में से विकलित करते समय या ऐसी रकम उक्त क्रेता से नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट लेकर या किसी अन्य रीति से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में संगृहीत करेगा :
सारणी
| क्रम सं. | माल की प्रकृति | प्रतिशत |
| (1) | (2) | (3) |
| (i) | मानव उपयोग के लिए एल्कोहाली लिकर | एक प्रतिशत |
| (ii) | तेंदु पत्ता | पांच प्रतिशत |
| (iii) | वन पट्टे के अधीन प्राप्त काष्ठ | ढाई प्रतिशत |
| (iv) | वन पट्टे के अधीन विहित पद्धति से भिन्न पद्धति से प्राप्त काष्ठ | ढाई प्रतिशत |
| (v) | कोई अन्य वनोत्पाद, जो काष्ठ या तेंदु पत्ता नहीं है | ढाई प्रतिशत |
| (vi) | स्क्रैप | एक प्रतिशत: |
| (vii) | खनिज, जो कोयला या लिग्नाइट या लौह अयस्क है | एक प्रतिशत: |
परंतु यह कि प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता है, 1 जून, 2003 को आरंभ होने वाली और उस तारीख के, जिसको काराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2003 प्रवृत्त होता है, ठीक पूर्ववर्ती दिन को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान क्रेता द्वारा संदेय रकम को क्रेता के खाते में नामे डालते समय या ऐसी रकम उक्त क्रेता से नकद रूप में या जारी चेक या ड्राफ्ट के रूप में या किसी अन्य ढंग से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, सारणी के, जैसी वह 1 जून, 2003 के ठीक पूर्व विद्यमान थी, स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के किसी माल के क्रेता से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में इस धारा के उपबंधों के अनुसार, जैसे वे 1 जून, 2003 के ठीक पूर्व विद्यमान थे, संगृहीत करेगा।
(1क) उपधारा (1क) में की किसी बात के होते हुए भी, किसी कर का संग्रहण ऐसे क्रेता की दशा में नहीं किया जाएगा, जो भारत में निवासी है, यदि ऐसा क्रेता कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को विहित प्ररूप में और विहित रीति में सत्यापित इस आशय की घोषणा लिखित रूप में दो प्रतियों में प्रस्तुत करता हैं कि पूर्वोक्त सारणी के स्तंभ (2) में निर्दिष्ट माल का वस्तुओं या चीजों के विनिर्माण, प्रसंस्करण या उत्पादन के प्रयोजनों के लिए या विद्युत के उत्पादन के प्रयोजनों के लिए उपयोग किया जाना है न कि व्यापार के प्रयोजनों के लिए।
(1ख) इस धारा के अधीन कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, उपधारा (1क) में निर्दिष्ट घोषणा की एक प्रति उस मास के ठीक आगामी मास के सातवें दिन को या उसके पूर्व, जिसमें वह घोषणा उसको प्रस्तुत की जाती है, प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।
(1ग) ऐसा प्रत्येक व्यक्ति, जो पब्लिक सेक्टर कंपनी से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् "अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार" कहा गया है) किसी पार्किग स्थान या पथकर प्लाजा या खान या खदान में कारबार के प्रयोजन के लिए ऐसे पार्किग स्थान या पथकर प्लाजा या खान या खदान के उपयोग के लिए कोई पट्टा या अनुज्ञप्ति देता है या कोई संविदा करता है या अन्यथा किसी अधिकार या हित का, चाहे पूर्णत: या भागत:, अन्तरण करता है, उसमें के अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार द्वारा संदेय रकम को अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार के खाते में विकलित करते समय या उक्त अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार से ऐसी रकम नकद रूप में या किसी चैक या ड्राफ्ट के जारी किए जाने से या किसी अन्य ढंग से प्राप्त करते समय, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, नीचे की सारणी के स्तंभ (2) में विनिर्दिष्ट प्रकृति की ऐसी किसी अनुज्ञप्ति, संविदा या पट्टे के अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार से, ऐसी रकम के उतने प्रतिशत के बराबर राशि, जो उक्त सारणी के स्तंभ (3) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट है, आय-कर के रूप में संगृहित करेगा:
सारणी
| क्रम सं. | संविदा या अनुज्ञप्ति या पट्टे आदि की प्रकृति | प्रतिशतता |
| (1) | (2) | (3) |
| (i) | पार्किग स्थान | दो प्रतिशत |
| (ii) | पथकर प्लाजा | दो प्रतिशत |
| (iii) | खान या खदान | दो प्रतिशत। |
स्पष्टीकरण 1–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "खनन और खदान क्रिया" में खनिज तेल की खनन और खदान क्रिया सम्मिलित नहीं होगी।
स्पष्टीकरण 2–स्पष्टीकरण 1 के प्रयोजनों के लिए, "खनिज तेल" में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सम्मिलित है।
(1घ) 4[* * *]
(1ड़) 5[* * *]
(1च) प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता होते हुए दस लाख रुपए से अधिक मूल्य के किसी मोटर यान के विक्रय के लिए प्रतिफल के रूप में कोई रकम प्राप्त करता है, ऐसी रकम की प्राप्ति के समय, विक्रय प्रतिफल के एक प्रतिशत की राशि के बराबर क्रेता से ऐसी रकम का आयकर के रूप में संग्रहण करेगा।]
5क[(1छ) प्रत्येक व्यक्ति,—
(क) जो कोई ऐसा प्राधिकृत व्यौहारी है, जो किसी ऐसे क्रेता से, जो 1[***] ऐसी रकम प्रेषित करने वाला व्यक्ति है, भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत प्रेषण स्कीम के अधीन 1[***] प्रेषण के लिए प्राप्त करता है;
(ख) जो विदेश भ्रमण कार्यक्रम पैकेज का ऐसा विक्रेता है, जो ऐसे क्रेता से, जो ऐसा पैकेज क्रय करने वाला व्यक्ति है, कोई रकम प्राप्त करता है,
किसी भी ढंग से क्रेता द्वारा संदेय रकम विकलित करते समय या उक्त क्रेता से ऐसी रकम प्राप्त करते समय, इसमें जो भी पूर्वतर है, क्रेता से आय-कर के रूप में ऐसी रकम के 2[पांच] प्रतिशत के बराबर रकम संगृहीत करेगा:
परंतु प्राधिकृत व्यौहारी राशि का संग्रहण नहीं करेगा, यदि क्रेता द्वारा विप्रेषित रकम या रकमों का योग किसी वित्तीय वर्ष में सात लाख रुपए से कम है 2क[***]:
परंतु यह और कि क्रेता से प्राधिकृत व्यौहारी द्वारा संग्रहित की जाने वाली राशि किसी वित्तीय वर्ष में क्रेता द्वारा विप्रेषित सात लाख रुपए से अधिक रकम या रकमों के योग के 3क[बीस] प्रतिशत के बराबर होगी, जहां विप्रेषित की जा रही रकम 2ख[तथा वह शिक्षा या चिकित्सा उपचार से भिन्न प्रयोजन के लिए है]:
परंतु यह भी कि प्राधिकृत व्यौहारी किसी वित्तीय वर्ष में क्रेता द्वारा विप्रेषित सात लाख रुपए से अधिक रकम या रकमों के योग के आधे प्रतिशत के बराबर राशि संग्रहीत करेगा, यदि विप्रेषित की जा रही रकम कोई शिक्षा प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए धारा 80ड में परिभाषित किसी वित्तीय संस्थान से प्राप्त किया गया ऋण है:
3कक[परन्तु यह भी कि किसी विदेश भ्रमण कार्यक्रम पैकेज का विक्रेता, किसी वित्तीय वर्ष में क्रेता से प्राप्त रकम या सात लाख रूपये से अधिक की कुल रकमों की बीस प्रतिशत राशि का संग्रहण करेगा]
परंतु यह भी कि प्राधिकृत व्यौहारी उस रकम पर राशि संग्रहीत नहीं करेगा, जिसके संबंध में राशि विक्रेता द्वारा संग्रहीत की गई है:
परंतु यह भी कि
(i) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन स्रोत पर कर की कटौती का उत्तरदायी है और उसने ऐसी रकम की कटौती कर ली है;
(ii) केंद्रीय सरकार, कोई राज्य सरकार, कोई राज दूतावास, कोई उच्चायोग, कोई दूतावास आयोग, कौंसल कार्यालय, किसी विदेशी राज्य का व्यापार प्रतिनिधित्व, धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित कोई स्थानीय प्राधिकारी या कोई अन्य ऐसा व्यक्ति है, जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस प्रयोजन के लिए ऐसी शर्तों के अध्यधीन जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, विनिर्दिष्ट करे।
3ककक[परन्तु और यह भी कि इस उपधारा के अधीन 1 जुलाई, 2023 को या उसके पश्चात और 1 अक्टूबर, 2023 से पूर्व संगृहीत की जाने वाली राशि, इस उपधारा के उपबंधों के अनुसार, जैसे वे 1 अप्रैल, 2023 को थे, संगृहीत की जाएगी।]
स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) ''प्राधिकृत व्यौहारी'' से विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूति में व्यौहार करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ii) ''विदेश भ्रमण कार्यक्रम पैकेज'' से ऐसा कोई भी भ्रमण पैकेज अभिप्रेत है, जो भारत के बाहर किसी देश या देशों या राज्यक्षेत्र या राज्यक्षेत्रों में दौरा करने का प्रस्ताव करता है और इसके अंतर्गत यात्रा या होटल में ठहरने या बोर्डिंग या आवास का व्यय या उसके संबंध में उसी प्रकार का कोई अन्य व्यय भी है।
(1ज) प्रत्येक व्यक्ति, जो विक्रेता है, जो किसी पूर्ववर्ष में, उपधारा (1), उपधारा (1च) या उपधारा (1छ) के अंतर्गत आने वाले भारत से बाहर निर्यात किए जा रहे माल या माल से भिन्न, किसी ऐसे माल के, जिसका मूल्य या ऐसे मूल्य या ऐसे मूल्य का योग पचास लाख रुपए से अधिक के या कुल मूल्य के विक्रय के प्रतिफल के रूप में कोई रकम प्राप्त करता है, ऐसी रकम की प्राप्ति के समय, क्रेता से आय-कर के रूप में पचास लाख रुपए से अधिक के विक्रय प्रतिफल की 0.1 प्रतिशत के बराबर राशि संगृहीत करेगा:
परंतु यदि क्रेता ने विक्रेता को स्थायी लेखा संख्यांक या आधार संख्यांक नहीं दिया है, तो धारा 206गग की उपधारा (1) के खंड (ग) के उपबंध इस प्रकार पढ़े जाएंगे, मानो ''पांच प्रतिशत'' शब्दों के स्थान पर, ''एक प्रतिशत'' शब्द रख दिए गए हों:
परंतु यह और कि इस धारा के उपबंध तब लागू नहीं होंगे, यदि क्रेता विक्रेता से उसके द्वारा खरीदे गए माल पर, अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन स्रोत पर कटौती का दायी है और उसने ऐसी रकम की कटौती कर ली है।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजन के लिए,—
(क) ''क्रेता'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी माल का क्रय करता है, किंतु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं आते हैं,—
(अ) केंद्रीय सरकार, कोई राज्य सरकार, किसी विदेशी राज्य का कोई राज दूतावास, उच्चायोग, दूतावास, आयोग, कौंसल कार्यालय और व्यापार प्रतिनिधि; या
(आ) धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित कोई स्थानीय प्राधिकारी; या
(इ) भारत में माल का आयात करने वाला व्यक्ति या कोई अन्य व्यक्ति जिसे केंद्रीय सरकार, इस प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं;
(ख) ''विक्रेता'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसका उसके द्वारा किए गए कारबार से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या व्यापार आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें माल का विक्रय किया गया है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान दस करोड़ रुपए से अधिक है, जो ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिसे केंद्रीय सरकार, इस प्रयोजन के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाए, विनिर्दिष्ट करे;';
(1झ) यदि उपधारा (1छ) या उपधारा (1झ) के उपबंध को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो, बोर्ड, केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत जारी करेगा।
(1ञ) उपधारा (1झ) के अधीन बोर्ड द्वारा जारी किया गया प्रत्येक मार्गदर्शक सिद्धांत संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा और वह आय-कर प्राधिकारियों तथा राशि को संग्रहित करने के लिए दायी व्यक्ति पर बाध्यकारी होगा।]
(2) 5ख[इस धारा] 6[* * *] के अधीन संग्रहण द्वारा कर वसूल करने की शक्ति, वसूली की किसी अन्य रीति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगी।
(3) 5ख[इस धारा] 6[* * *] के अधीन रकम संगृहीत करने वाला व्यक्ति इस प्रकार संगृहीत रकम केन्द्रीय सरकार के खाते में या बोर्ड के निर्देशानुसार विहित समय के भीतर अदा करेगा :
परंतु यह कि इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अनुसार 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् कर का संग्रहण करने वाला व्यक्ति, संगृहीत किए गए कर का, केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में विहित समय के भीतर संदाय करने के पश्चात्, ऐसी अवधि के जो विहित की जाए, ऐसे विवरण तैयार करेगा और ऐसा विवरण को ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से सत्यापित कराकर तथा उसमें ऐसी विशिष्टियों का उल्लेख करते हुए तथा ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए, विहित आय-कर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।
(3क) सरकार के किसी कार्यालय की दशा में, जहां उपधारा (1) या उपधारा (1ग) 7[* * *] के अधीन संगृहीत रकम का चालान पेश किए बिना, केंद्रीय सरकार के खाते में संदाय किया गया है, वेतन और लेखा अधिकारी या कोषाधिकारी या चेक आहरण और संवितरण अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जो ऐसा कर केंद्रीय सरकार के खाते में जमा करने के लिए उत्तरदायी है, विहित आय-कर प्राधिकारी को या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को ऐसे प्ररूप में, ऐसी रीति में सत्यापित रूप में एक विवरण, उसमें ऐसी विशिष्टियां उपवर्णित करते हुए और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, परिदत्त करेगा या कराएगा।
(3ख) उपधारा (3) के परंतुक में निर्दिष्ट व्यक्ति उक्त पंरतुक के अधीन विहित प्राधिकारी को किसी भूल को सुधारने के लिए या उक्त परंतुक के अधीन परिदत्त विवरण में दी गई सूचना में कुछ जोड़ने, उससे लोप करने या उसे अद्यतन बनाने के लिए, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में, जो प्राधिकारी द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, सत्यापित रूप में एक संशोधन विवरण भी परिदत्त कर सकेगा।
(4) इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगृहीत और केन्द्रीय सरकार के जमा खाते में संदत्त कोई रकम उस व्यक्ति की ओर से कर का संदाय समझी जाएगी, जिससे रकम संगृहीत की गई है और ऐसे व्यक्ति की किसी विशिष्ट निर्धारण वर्ष में इस प्रकार संगृहीत रकम के लिए ऐसे नियमों के अनुसार, जो समय-समय पर बोर्ड द्वारा विहित किए जाएं, मुजरा दिया जाएगा।
(5) इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसी रकम के नामे डाले जाने या प्राप्त किए जाने के समय से ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए उस क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार को, जिसके खाते में ऐसी रकम नामे डाली गई है या जिससे ऐसा संदाय प्राप्त किया जाता है, इस आशय का एक प्रमाणपत्र देगा कि कर का संग्रहण कर लिया गया है और उसमें इस प्रकार संगृहीत राशि, वह दर, जिससे कर संगृहीत किया गया है, और ऐसी अन्य विशिष्टियां विनिर्दिष्ट होंगी जो विहित की जाएं :
परंतु यह कि विहित आय-कर प्राधिकारी या उपधारा (3) में निर्दिष्ट ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति, 1 अपै्रल, 2008 को या उसके पश्चात प्रारंभ होने वाले प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, विहित समय के भीतर, संगृहीत किए गए कर की रकम और ऐसी अन्य विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, विनिर्दिष्ट करते हुए विहित प्ररूप में एक विवरण तैयार करेगा और, यथास्थिति, उपधारा (1) में निर्दिष्ट क्रेता या उपधारा (1ग) में निर्दिष्ट अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार को परिदत्त करेगा।]
(5क) इस धारा के उपबंधों के अनुसार 1 अपै्रल, 2005 के पूर्व कर का संग्रहण करने वाला प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात विहित समय के भीतर ऐसी विवरणियां तैयार करेगा और ऐसे फार्म में और ऐसी रीति से सत्यापित रूप में और ऐसी विशिष्टियों को दर्शाते हुए और ऐसे समय के भीतर, जो विहित किया जाए, विहित आय-कर प्राधिकारी या ऐसे अन्य प्राधिकारी या अभिकरण को, जो विहित किया जाए] परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा :
परंतु यह कि बोर्ड, यदि वह ऐसा करना आवश्यक या समीचीन समझे तो, इस उपधारा में निर्दिष्ट ऐसे अन्य प्राधिकारी या अभिकरण के पास ऐसी विवरणियां फाइल करने के प्रयोजनों के लिए कोई स्कीम बना सकेगा।
(5ख) उपधारा (5क) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कर संग्रहण करने वाला कोई व्यक्ति, ऐसे मामले से भिन्न किसी मामले में, जहां विक्रेता कोई कंपनी, केंद्रीय सरकार या कोई राज्य सरकार है, अपने विकल्प पर, ऐसी स्कीम के अनुसार, जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो उसमें विनिर्दिष्ट की जाएं, विहित आय-कर प्राधिकारी को प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् विहित समय पर या उसके पूर्व किसी फ्लापी, डिस्कैट, मैग्नेटिक कार्ट्रिज टेप, सीडी रोम या किसी अन्य कंप्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर (जिसे इसमें इसके आगे "कंप्यूटर संचार माध्यम" कहा गया है) और ऐसी रीति में, जो उस स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाए, ऐसी विवरणी परिदत्त कर सकेगा या करा सकेगा :
परंतु जहां कर का संग्रहण करने वाला व्यक्ति, कोई कंपनी या केंद्रीय सरकार या कोई राज्य सरकार है, वहां ऐसा व्यक्ति इस धारा के उपबंधों के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, विहित समय के भीतर, उक्त स्कीम के अधीन ऐसी विवरणियां कंप्यूटर संचार माध्यम पर परिदत्त करेगा या परिदत्त कराएगा।
(5ग) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी कंप्यूटर संचार माध्यम पर फाइल की गई विवरणी उपधारा (5क) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए विवरणी समझी जाएगी और उसके अधीन की गई किन्हीं कार्यवाहियों में, मूल को पेश करने के अतिरिक्त सबूत के बिना, मूल की किसी अंतर्वस्तु या उसमें उल्लिखित किसी तथ्य के साक्ष्य के रूप में ग्राह्य होगी।
(5घ) जहां निर्धारण अधिकारी यह समझता है कि उपधारा (5ख) के अधीन परिदत्त की गई या परिदत्त कराई गई विवरणी त्रुटिपूर्ण है, वहां वह उस त्रुटि के बारे में कर का संग्रहण करने वाले व्यक्ति को सूचित कर सकेगा और उसे ऐसी सूचना की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर, जो इस निमित्त किए गए किसी आवेदन पर निर्धारण अधिकारी स्वविवेकानुसार अनुज्ञात करे, त्रुटि को ठीक करने का अवसर दे सकेगा और यदि, यथास्थिति, पन्द्रह दिन की उक्त अवधि या यथाअनुज्ञात अतिरिक्त अवधि के भीतर त्रुटि को ठीक नहीं किया जाता है तो इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी विवरणी अविधिमान्य विवरणी मानी जाएगी और इस अधिनियम के उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसा व्यक्ति विवरणी देने में असफल रहा हो।
(6) कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति, जो इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने में असफल रहता है, ऐसी असफलता के होते हुए भी उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार केन्द्रीय सरकार के खाते में कर का संदाय करने के लिए दायी होगा।
(6क) यदि 7क[उपधारा (1) और उपधारा (1ग) के उपबंधों के अनुसार] कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी कोई व्यक्ति संपूर्ण कर या उसके किसी भाग का संग्रहण नहीं करता है या संग्रहण करने के पश्चात् इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन यथाअपेक्षित कर का संदाय करने में असफल रहता है तो वह, किसी अन्य परिणाम पर, जो वह उपगत करे, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना कर की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती समझा जाएगा:
परंतु इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी किसी व्यक्ति से, 8[* * *] जो क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार से प्राप्त रकम पर या क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार के खाते से विकलित रकम पर संपूर्ण कर या उसके किसी भाग का संग्रहण करने में असफल रहता है, ऐसे कर की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाएगा, यदि उस क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार ने–
(i) धारा 139 के अधीन अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत कर दी है;
(ii) आय की ऐसी विवरणी में आय की संगणना करने के लिए ऐसी रकम को हिसाब में लिया है; और
(iii) आय की ऐसी विवरणी में उसके द्वारा घोषित आय पर देय कर का संदाय कर दिया है,
और वह व्यक्ति किसी लेखापाल से इस आशय का एक प्रमाणपत्र ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत कर देता है:
परंतु यह और कि ऐसे व्यक्ति पर धारा 221 के अधीन कोई शास्ति तब तक प्रभारित नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारण अधिकारी का यह समाधान नहीं हो जाता है कि वह व्यक्ति उचित और प्रर्याप्त कारणों के बिना कर का संग्रहण और संदाय करने में असफल रहा है।
(7) उपधारा (6) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, यदि "कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति" कर का संग्रहण नहीं करता है या कर का संग्रहण करने के पश्चात् इस धारा की अपेक्षा के अनुसार उसका संदाय करने में असफल रहता है तो वह कर की ऐसी रकम पर उस तारीख से, जिसको ऐसा कर संग्रहणीय था, उस तारीख तक जिसको कर का वास्तव में संदाय किया गया था प्रत्येक मास या उसके भाग के लिए एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देने के लिए दायी होगा और ऐसा ब्याज उपधारा (3) के उपबंधों के अनुसार प्रत्येक तिमाही के लिए तिमाही विवरणी प्रस्तुत करने के पूर्व संदत्त किया जाएगा :
परंतु यदि इस धारा के उपबंधों के अनुसार कर संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी किसी व्यक्ति से, जो 9[* * *], जो क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार से प्राप्त रकम पर या क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार के खाते से विकलित रकम पर संपूर्ण कर या उसके किसी भाग का संग्रहण करने में असफल रहता है, किंतु उसे उपधारा (6क) के पहले परंतुक के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाता है, तो ब्याज उस तारीख से, जिसको ऐसा कर कटौती योग्य था, ऐसे क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार द्वारा आय की विवरणी प्रस्तुत करने की तारीख तक के लिए संदेय होगा।
9कक[परन्तु और कि उपधारा (6क) के अधीन व्यतिक्रम के लिए जहां निर्धारण अधिकारी द्वारा कोई आदेश किया गया है, वहां उक्त व्यक्ति द्वारा ऐसे आदेश के अनुसार संदत्त किया जाएगा।।]
(8) जहां कर पूर्वोक्त रूप में संदत्त नहीं किया गया है, वहां उसके संगृहीत किए जाने पर कर की रकम और साथ ही उपधारा (7) में निर्दिष्ट दर पर उस पर साधारण ब्याज की रकम "कर का संग्रहण करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति" की सभी आस्तियों पर प्रभार होगी।
(9) जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार की कुल आय उपधारा (1) या उपधारा (1ग) 10[* * *] में विनिर्दिष्ट सुसंगत दर से किसी निम्नतर दर पर कर के संग्रहण के लिए न्यायसंगत है वहां निर्धारण अधिकारी क्रेता या अनुज्ञप्तिधारी या पट्टेदार द्वारा इस बाबत किए गए किसी आवेदन पर उसे उपधारा (1) या उपधारा (1ग) 10[* * *] में विनिर्दिष्ट सुसंगत दर से निम्नतर दर पर कर के संग्रहण के लिए प्रमाणपत्र देगा।
(10) जहां कोई प्रमाणपत्र उपधारा (9) के अधीन दिया जाना है वहां कर के संग्रहण के लिए उत्तरदायी व्यक्ति जब तक निर्धारण अधिकारी द्वारा ऐसा प्रमाणपत्र रद्द नहीं कर दिया जाता, उस प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट दरों पर कर का संग्रहण करेगा।
10क[(10क) सारणी में क्रम संख्याक (i) पर निर्दिष्ट माल के सिवाय उपधारा (1), उपधारा (1ग), उपधारा (1च) या उपधारा (1ज) के उपबंधों में 14 मई, 2020 से आरंभ होने वाली अवधि से 31 मार्च, 2021 तक के दौरान स्त्रोत पर कर संग्रहण की अपेक्षा के मामले में, इन उपधाराओं में किसी बात के होते हुए भी, कर की कटौती इन उपधाराओं में विनिर्दिष्ट दर की तीन चौथाई दर पर की जाएगी ।;]
(11) बोर्ड, निर्धारिती की सुविधा और राजस्व के हितों को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसे नियम बना सकेगा जिसमें ऐसी दशाएं, जिनमें और ऐसी परिस्थितियां, जिनके अधीन उपधारा (9) के अधीन किसी प्रमाणपत्र को देने के लिए आवेदन किया जा सकेगा और वे शर्तें, जिनके अधीन ऐसा प्रमाणपत्र दिया जा सकेगा, विनिर्दिष्ट होंगी और उसमें उससे संबंधित सभी अन्य विषयों का उपबंध होगा।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "लेखापाल" का वही अर्थ होगा, जो धारा 288 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में उसका है;
(कक) "क्रेता" से,–
(i) उपधारा (1) के संबंध में ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी विक्रय में, नीलामी, निविदा के रूप में या किसी अन्य ढंग से, उपधारा (1) की सारणी में विनिर्दिष्टप्रकृति का माल अथवा किसी ऐसे माल को प्राप्त करने का अधिकार अभिप्राप्त करता है, किन्तु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं है,–
(ए) कोई पब्लिक सेक्टर कंपनी, केंद्रीय सरकार, कोई राज्य सरकार और किसी विदेशी राज्य का कोई राजदूतावास, कोई उच्चायोग, दूतावास, आयोग, कौंसल कार्यालय और व्यापार प्रतिनिधि तथा कोई क्लब; या
(बी) ऐसे माल के फुटकर विक्रय में कोई क्रेता का, जो उसके द्वारा अपने व्यक्तिगत उपभोग के लिए क्रय किया गया है;
(ii) 11[* * *]
12[(iii) उपधारा (1च) के संबंध में ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी विक्रय या उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट प्रकृति का माल अभिप्राप्त करता है, किंतु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं हैं,–
(अ) केंद्रीय सरकार, कोई राज्य सरकार, किसी विदेशी राज्य का कोई राजदूतावास, कोई उच्चायोग, दूतावास, आयोग, कौंसल कार्यालय और व्यापार प्रतिनिधित्व; या
(आ) धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित कोई स्थानीय प्राधिकारी; या
(इ) कोई ऐसी पब्लिक सेक्टर कंपनी, जो यात्रियों का वहन करने के कारबार में लगी हुई है;]
(कख) 13[* * *]
(ख) "स्क्रैप" से सामग्री के निमार्ण या यांत्रिक कार्यकरण से ऐसा अपशिष्ट और स्क्रैप अभिप्रेत है जो टूटन, कटाई, टूट-फूट और अन्य कारणों से उस रूप में निश्चित रूप से उपभोज्य नहीं है ;
(ग) 13क[उपधारा (1) और उपधारा (1च) के संबंध में विक्रेता] से केंद्रीय सरकार, कोई राज्य सरकार या कोई स्थानीय निकाय प्राधिकारी या केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोई निगम या प्राधिकरण या कोई कंपनी या फर्म या सहकारी सोसाइटी अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत ऐसा व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब भी है जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या व्यवसाय से कुल विक्रय सकल प्राप्तियां या आवर्त उस वित्तीय वर्ष से, जिसमें 14[सारणी में विनिर्दिष्ट प्रकृति के माल का विक्रय किया जाता है] ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान 14क[कारबार की दशा में एक करोड़ रुपए या वृत्ति की दशा में पचास लाख रुपए] से अधिक है।]
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

