आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 206क

निवासियों को कर की कटौती के बिना ब्याज के संदाय की बाबत तिमाही* विवरणी का दिया जाना

धारा

धारा संख्या

206क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

निवासियों को कर की कटौती के बिना ब्याज के संदाय की बाबत तिमाही* विवरणी का दिया जाना

निवासियों को कर की कटौती के बिना ब्याज के संदाय की बाबत तिमाही* विवरणी का दिया जाना

12[निवासियों को कर की कटौती के बिना ब्याज के संदाय की बाबत तिमाही* विवरणी का दिया जाना

206क. (1) धारा 194क की उपधारा (3) के खंड (i) के परंतुक में निर्दिष्ट कोर्इ बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या पब्लिक कंपनी, जो ब्याज (प्रतिभूतियों पर ब्याज से भिन्न) के रूप में 13[दस हजार रुपए से अनधिक, जहां संदायकर्ता कोर्इ बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी है और किसी अन्य मामले में पांच हजार रुपये से अनधिक] किसी आय का किसी निवासी को संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, 13क[ऐसी अवधि के लिए जो विहित की जाए, ऐसी विवरणियां] तैयार करेगी और यथापूर्वोक्त तिमाही विवरणियों को ऐसी रीति में सत्यापित कराकर और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए किसी फ्लापी, डिस्कैट, मैग्नेटिक कार्टिज टेप, सीडी-रोम या किसी अन्य कंप्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर विहित आय-कर प्राधिकारी14 को या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को 15[विहित प्ररूप में परिदत्त करेगी या परिदत्त कराएगी।

(2) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उपधारा (1) में वर्णित व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति से, जो अध्याय 17 के अधीन स्रोत पर कर की कटौती के लिए दायी किसी आय का किसी निवासी को संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह विहित प्ररूप में और ऐसी रीति में सत्यापित कराकर और ऐसे समय के भीतर जो विहित किया जाए किसी फ्लापी, डिस्कैट, मैग्नेटिक कार्टिज टेप, सीडी-रोम या किसी अन्य कंप्यूटर पठनीय संचार माध्यम पर 15क[ऐसी विवरणियां] तैयार करे और उसे विहित आय-कर प्राधिकारी को या ऐसे प्राधिकारी द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति को परिदत्त करे या परिदत्त कराए।]

 

12. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.6.2005 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व मूल धारा 206क वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित तथा बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित की गर्इ थी। वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से लोप किए जाने से पूर्व धारा 206क इस प्रकार थी :

(शेष पृष्ठ 1.963 पर)

(पृष्ठ 1.962 से आगे)

"206क. कर की कटौती किए बिना निवासियों के ब्याज का संदाय करने वाले व्यक्ति द्वारा विहित विवरणी का दिया जाना.–धारा 194क में निर्दिष्ट किसी आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति ऐसी लिखित विवरणी तैयार करेगा ओर प्रत्येक वर्ष मार्च के 31वें दिन से तीस दिन के भीतर विहित प्ररूप में और विहित क्षति में सत्यापित कराकर निर्धारण अधिकारी को परिदत्त करेगा या कराएगा, जिसमें–

() ऐसे प्रत्येक व्यक्ति का नाम और पता दर्शित होगा जिसने धारा 194 के पहले परन्तुक के अधीन उसे विवरण दिया है;

() वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसे प्रत्येक व्यक्ति के नाम जमा की गर्इ या उसे संदत्त की गर्इ आय की रकम और वह या वे समय जिसको वह, यथास्थिति, जमा की गर्इ थी, संदत्त की गर्इ थी, दर्शित होंगे; और

() ऐसी अन्य विशिष्टियां दर्शित होगी, जो विहित की जाएं।"

13. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से "पांच हजार रुपये से अनधिक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

13क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से "प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसम्बर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि के लिए तिमाही विवरणियां" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

14. विहित प्राधिकारी महानिदेशक, आय-कर (सिस्टम) या उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति है।

15. नियम 31कग और 31कगक तथा प्ररूप 26थक और 26थकक देखिए।

15क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.10.2009 से "तिमाही* विवरणियां" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

*"तिमाही" शब्द का लोप किया जाना अपेक्षित है।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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