नकद रूप में कतिपय रकमों का संदाय
नकद रूप में कतिपय रकमों का संदाय।
194ढ. प्रत्येक व्यक्ति जो,—
(i) ऐसी कोर्इ बैंककारी कंपनी है, जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) (जिसके अंतर्गत इस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोर्इ बैंक या बैंककारी संस्था भी है) लागू होता है;
(ii) ऐसी कोर्इ सहकारी समिति है, जो बैंककारी कारबार चलाने में लगी हुर्इ है; या
(iii) कोर्इ ऐसा डाकघर है;
जो किसी व्यक्ति को (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् प्राप्तिकर्ता कहा गया है) ऐसी किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी या डाकखाने के पास प्राप्तिकर्ता द्वारा धारित एक या अधिक खातों से पूर्ववर्ष के दौरान एक करोड़ रुपए से अधिक, यथास्थिति, राशि या कुल राशि का नकद रूप में संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, ऐसी राशि के संदाय के समय, ऐसी राशि जो एक करोड़ रुपए से अधिक है, के दो प्रतिशत के बराबर रकम की आय-कर के रूप में कटौती करेगा:
परंतु इस उपधारा के उपबंध निम्नलिखित को किसी संदाय के संबंध में लागू नहीं होंगे,—
(i) सरकार;
(ii) बैंककारी या डाकखाने के कारबार को चलाने में लगी कोर्इ बैंककारी कंपनी, सहकारी सोसाइटी;
(iii) भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस संबंध में जारी मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार बैंककारी कारबार चलाने में लगी किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी की ओर से कोर्इ कारबार संवाददाता;
(iv) संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (2007 का 51) के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्राधिकार के अनुसार बैंककारी कारबार चलाने में लगी हुर्इ किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी सोसाइटी द्वारा किसी श्वेत लेबल स्वचालित टेलर मशीन;
(v) ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों का वर्ग, जो केंद्रीय सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक से परामर्श करने के पश्चात् राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे।]
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

