आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 194 ञ

वृत्तिक या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस

धारा

धारा संख्या

194 ञ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XVII - कर संग्रह और वसूली

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

वृत्तिक या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस

वृत्तिक या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस

वृत्तिक या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस

194ञ. (1) कोर्इ व्यक्ति जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है और जो किसी निवासी को–

() वृत्तिक सेवाओं के लिए फीस; या

() तकनीकी सेवाओं के लिए फीस, या

(खक) किसी कंपनी के किसी निदेशक को कोर्इ पारिश्रमिक या फीस या कमीशन, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, उससे भिन्न, जिस पर धारा 192 के अधीन कर कटौती योग्य है; या

() स्वामिस्व, या

() धारा 28 के खंड (vक) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि,

के रूप में किसी राशि का संदाय करने का दायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी राशि जमा करते समय या उसका नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से भुगतान करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, ऐसी राशि के दस प्रतिशत के बराबर रकम की, उसमें सम्मिलित राशि पर आय-कर के रूप में कटौती करेगा :

परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती–

() 1 जुलार्इ, 1995 से पहले जमा या संदत्त की गर्इ पूर्वोक्त किसी राशि में से नहीं की जाएगी; या

() तब तक नहीं की जाएगी जब तक वित्तीय वर्ष के दौरान पाने वाले के खाते में पूर्वोक्त व्यक्ति द्वारा जमा की गर्इ या संदत्त की गर्इ अथवा जमा किए जाने या संदत्त किए जाने के लिए संभाव्य, यथास्थिति, ऐसी आय की राशि या आय की कुल राशि–

(i) खंड () में निर्दिष्ट वृत्तिक सेवाओं के लिए फीस की दशा में, तीस हजार रुपए; या

(ii) खंड () में निर्दिष्ट तकनीकी सेवाओं के लिए फीस की दशा में, तीस हजार रुपए ; या

(iii) खंड () में निर्दिष्ट स्वामिस्व की दशा में तीस हजार रुपए; या

(iv) खंड () में निर्दिष्ट राशि की दशा में तीस हजार रुपए;

से अधिक नहीं है :

परंतु यह और कि ऐसा कोर्इ व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या वृत्ति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें वृत्तिक सेवाओं और तकनीकी सेवाओं से फीस के रूप में ऐसी राशि जमा या संदत्त की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड () या खंड () के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं से अधिक हो जाता है, इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती के लिए दायी होगा :

परंतु यह भी कि दूसरे पंरतुक में निर्दिष्ट कोर्इ व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब, वृत्तिक सेवाओं के लिए फीस के रूप में प्राप्त राशि पर आय-कर की कटौती करने का दायी नहीं होगा यदि ऐसी राशि अनन्य रूप से ऐसे व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब के किसी सदस्य के वैयक्तिक प्रयोजनों के लिए जमा या संदत्त की जाती है :

95[परंतु यह भी कि इस धारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो किसी ऐसे पाने वाले की दशा में, जो केवल किसी काल सेंटर के प्रचालन के कारबार में ही लगा हुआ है, "दस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर, "दो प्रतिशत" शब्द रखे गए हों।]

(2) [***]

(3) [***]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

() ''वृत्तिक सेवा'' से विधि, चिकित्सा, इंजीनियरी, या वास्तुकला वृत्ति या लेखा संकर्म या तकनीकी परामर्श या आंतरिक साजसज्जा या विज्ञापन वृत्ति अथवा धारा 44कक या इस धारा के प्रयोजनों के लिए बोर्ड द्वारा अधिसूचित कोर्इ अन्य वृत्ति चलाने के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा दी गर्इ सेवाएं अभिप्रेत हैं;

() ''तकनीकी सेवाओं के लिए फीस'' का वही अर्थ है जो उसका धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के नीचे के स्पष्टीकरण 2 में दिया गया है;

(खक) "स्वामिस्व" का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण में है;

() जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ राशि, ऐसी राशि का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा-बहियों में किसी खाते में चाहे वह "उचंत खाते" के नाम ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में ऐसी राशि का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

 

95. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.6.2017 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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