किराया
किराया
194झ. कोर्इ व्यक्ति, जो व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब नहीं है और जो किसी निवासी को किराए के रूप में किसी आय का संदाय करने के लिए उत्तरदायी है, पाने वाले के खाते में ऐसी आय जमा करते समय या उसे नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य रीति से संदाय करते समय, इनमें से जो भी पहले हो, उस पर–
(क) किसी मशीनरी या संयंत्र या उपस्कर के उपयोग के लिए दो प्रतिशत की दर से; और
(ख) किसी भूमि या भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है) या किसी भवन से संलग्न भूमि (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है) या फर्नीचर या फिटिंग के उपयोग के लिए दस प्रतिशत की दर से,
आय-कर की कटौती करेगा :
परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती तब तक नहीं की जाएगी जब तक वित्तीय वर्ष के दौरान, पाने वाले के खाते में पूर्वोक्त व्यक्ति द्वारा जमा की गर्इ या उसको संदत्त की गर्इ या जमा किए जाने या संदत्त किए जाने के लिए संभाव्य, यथास्थिति, ऐसी आय की राशि या ऐसी आय की कुल राशि 92क[दो लाख चालीस हजार रुपए] से अधिक नहीं है :
परंतु यह और कि ऐसा कोर्इ व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसका उसके द्वारा किए जा रहे कारबार या वृत्ति से कुल विक्रय, सकल प्राप्तियां या आवर्त, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें किराए के रूप में ऐसी आय जमा या संदत्त की जाती है, ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान धारा 44कख के खंड (क) या खंड (ख) के अधीन विनिर्दिष्ट धनीय सीमाओं से अधिक हो जाता है, इस धारा के अधीन आय-कर की कटौती के लिए दायी होगा:
परंतु यह भी कि जहां किराए के रूप में आय, किसी ऐसे कारबार न्यास को, जो धारा 10 के खंड (23चगक) में निर्दिष्ट किसी भू-संपदा आस्ति की बाबत ऐसे कारबार न्यास द्वारा प्रत्यक्षत: स्वामित्वाधीन कोर्इ भू-संपदा विनिधान न्यास है, प्रत्यायित या संदत्त है, इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती नहीं की जाएगी।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(i) ''किराया'' से किसी,–
(क) भूमि; या
(ख) भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है); या
(ग) भवन (जिसके अंतर्गत कारखाना भवन भी है) से अनुलग्न भूमि, या
(घ) मशीनरी; या
(ड़) संयंत्र; या
(च) उपस्कर; या
(छ) फर्नीचर; और
(ज) फिटिंग,
चाहे उपर्युक्त में से कोर्इ या सभी दाता के स्वामित्व में हैं अथवा नहीं, (पृथक रूप से या सामूहिक रूप से) के प्रयोग के लिए किसी पट्टे, उपपट्टे, किराएदारी या किसी अन्य करार या ठहराव के अधीन कोर्इ संदाय अभिप्रेत है, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो;
(ii) जहां कोर्इ आय, ऐसी आय का संदाय करने के लिए दायी व्यक्ति की लेखा बहियों में किसी खाते में, चाहे वह "उचंत खाते" के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से, जमा की जाती है वहां ऐसी राशि के जमा किए जाने को, पाने वाले के खाते में, ऐसी आय का जमा किया जाना समझा जाएगा और इस धारा के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
92क. वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2019 से "एक लाख अस्सी हजार रूपए" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

