भारत छोड़ने वाले व्यक्तियों का निर्धारण
ञ–भारत छोड़ने वाले व्यक्ति
भारत छोड़ने वाले व्यक्तियों का निर्धारण
174. (1) धारा 4 में किसी बात के होने पर भी, जब निर्धारण अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि कोर्इ व्यक्ति चालू निर्धारण वर्ष के दौरान या उसकी समाप्ति के शीघ्र पश्चात् भारत छोड़कर जा सकता है और भारत लौटने का उसका उस समय कोर्इ आशय नहीं है तब उस निर्धारण वर्ष के लिए पूर्ववर्ष की समाप्ति से भारत से उसके प्रस्थान की अधिसंभाव्य तारीख तक की कालावधि के लिए ऐसे व्यक्ति की कुल आय उस निर्धारण वर्ष में कर से प्रभार्य होगी।
(2) ऐसी कालावधि में सम्मिलित हर संपूरित पूर्ववर्ष या किसी पूर्ववर्ष के भाग की कुल आय उस निर्धारण वर्ष में प्रवृत्त दर या दरों पर कर से प्रभार्य होगी और ऐसे हर संपूरित पूर्ववर्ष या किसी पूर्ववर्ष के भाग के संबंध में पृथक् निर्धारण किया जाएगा।
(3) निर्धारण अधिकारी ऐसी कालावधि या उसके किसी भाग के लिए ऐसे व्यष्टि की आय ऐसी दशा में प्राक्कलित कर सकेगा जिसमें वह इस अधिनियम में उपबंधित रीति में तुरंत अवधारित नहीं की जा सकती।
(4) उपधारा (1) के अंतर्गत निर्धारण करने के प्रयोजन के लिए निर्धारण अधिकारी ऐसे व्यष्टि पर सूचना की तामील कर सकेगा जिसमें उससे यह अपेक्षा की जाएगी कि वह सात दिन से कम न होने वाले ऐसे समय के भीतर जो सूचना में उल्लिखित किया जाए, उपधारा (1) में दी गर्इ कालावधि में समाविष्ट हर संपूरित पूर्ववर्ष की अपनी कुल आय और उस कालावधि में समाविष्ट पूर्ववर्ष के किसी भाग की अपनी प्राक्कलित कुल आय को वर्णित करते हुए, उसी प्ररूप में और उसी रीति से सत्यापित विवरणी धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) के अंतर्गत आने वाली विवरणी के रूप में दे और उस अधिनियम के उपबंध यावत्शक्य और इस धारा के उपबंधों के अध्यधीन ऐसे लागू होंगे मानो वह सूचना धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) के अंतर्गत जारी की गर्इ सूचना हो।
(5) इस धारा के अधीन प्रभार्य कर, इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अंतर्गत प्रभार्य कर के, यदि कोर्इ हो, अतिरिक्त होगा।
(6) जहां उपधारा (1) के उपबंध लागू हैं, वहां इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन प्रभार्य कर की बाबत धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) या धारा 148 के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी की गर्इ किसी सूचना में ऐसे व्यष्टि से, यथास्थिति, धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) या धारा 148 में किसी बात के होते हुए भी, यह अपेक्षा की जा सकेगी कि वह सात दिन से कम न होने वाली इतनी कालावधि के भीतर विवरणी दे, जितनी कि निर्धारण अधिकारी उचित समझे।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

