प्रलेखों का प्रस्तुतीकरण
दस्तावेजों का उत्पादन I
162.यदि कोई दस्तावेज पेश करने के लिए बुलाया गया साक्षी, उसके कब्जे या शक्ति में है तो उसे न्यायालय में लाएगा, भले ही उसके पेश किए जाने या उसकी ग्राह्यता पर कोई आपत्ति क्यों न हो। ऐसी किसी भी आपत्ति की वैधता का निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
न्यायालय, यदि वह उचित समझे, तो दस्तावेज का निरीक्षण कर सकता है, जब तक कि वह राज्य के मामलों से संबंधित न हो, या उसकी स्वीकार्यता निर्धारित करने के लिए अन्य साक्ष्य ले सकता है।
दस्तावेजों का अनुवाद I
यदि ऐसे प्रयोजन के लिए किसी दस्तावेज का अनुवाद कराना आवश्यक हो तो न्यायालय, यदि वह ठीक समझे तो अनुवादक को निर्देश दे सकेगा कि वह उसकी अंतर्वस्तु को गुप्त रखे, जब तक कि दस्तावेज साक्ष्य में न दिया जाना हो; और यदि दुभाषिया ऐसे निर्देश की अवहेलना करता है तो वह भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 166 के अधीन अपराध किया हुआ माना जाएगा।

