कानूनी प्रतिनिधि
अध्याय 15
विशेष दशाओं में दायित्व
क–विधिक प्रतिनिधि
विधिक प्रतिनिधि88
159. (1) जब कोर्इ व्यक्ति मर जाता है तब उसका विधिक प्रतिनिधि किसी ऐसी राशि के संदाय के दायित्वाधीन उसी रीति में और उसी सीमा तक होगा जिसमें और जहां तक उस संदाय के दायित्वाधीन मृतक होता यदि उसकी मृत्यु न हुर्इ होती।
(2) मृतक की आय का निर्धारण (जिसके अंतर्गत धारा 147 के अधीन निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुन: संगणना भी सम्मिलित है) करने के प्रयोजन के लिए और उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार विधिक प्रतिनिधि के पास की किसी राशि का उद्ग्रहण करने के प्रयोजन के लिए–
(क) मृतक के विरुद्ध उसकी मृत्यु के पूर्व की गर्इ कोर्इ कार्यवाही विधिक प्रतिनिधि के विरुद्ध की गर्इ समझी जाएगी और उसी प्रक्रम से जिस पर वह मृतक की मृत्यु की तारीख को थी विधिक प्रतिनिधि के विरुद्ध जारी रखी जा सकेगी;
(ख) कोर्इ कार्यवाही, जो मृतक के विरुद्ध की जाती यदि वह जीवित रहता, विधिक प्रतिनिधि के विरुद्ध की जा सकेगी; और
(ग) इस अधिनियम के सभी उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(3) मृतक का विधिक प्रतिनिधि, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती समझा जाएगा।
(4) प्रत्येक विधिक प्रतिनिधि ऐसे किसी कर के लिए जो उसके द्वारा विधिक प्रतिनिधि के रूप में अपनी हैसियत में संदेय है, उस दशा में, व्यक्तिगत रूप में दायी होगा जिसमें वह उस समय जिस समय कि उस कर के लिए उसका दायित्व अनुन्मोचित रहता है, मृतक की संपदा की किन्हीं ऐसी आस्तियों89 पर जो उसके कब्जे में हैं या आएं, प्रभार का सृजन करता है या उनका व्ययन करता है या उनसे विलग होता है किंतु ऐसा दायित्व ऐसे प्रभारित, व्ययनित या विलगित आस्तियों के मूल्य तक सीमित होगा।
(5) धारा 161 की उपधारा (2), धारा 162 और धारा 167 के उपबंध, यावत्शक्य और उस विस्तार तक जिस तक वे उस धारा के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, विधिक प्रतिनिधि के संबंध में लागू होंगे।
(6) इस धारा के अधीन विधिक प्रतिनिधि का दायित्व, उपधारा (4) और उपधारा (5) के उपबंधों के अधीन रहते हुए उस सीमा तक विस्तारित होगा जिस तक कि संपदा दायित्व को पूरा करने के लिए समर्थ है।
88. सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
89. "आस्तियां" पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
[वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा संशोधित रूप में]

