परिभाषाएं
71[अध्याय 14ख
तलाशी के मामलों के निर्धारण के लिए विशेष प्रक्रिया
परिभाषाएं
158ख. इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,–
(क) "समूह अवधि" से वे पूर्ववर्ष अभिप्रेत हैं जो उस पूर्ववर्ष से पहले जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी ली गर्इ थी या धारा 132क के अधीन कोर्इ अध्यपेक्षा की गर्इ थी, दस निर्धारण वर्षों से सुसंगत हैं, और इसके अंतर्गत, उस पूर्ववर्ष में, जिसमें ऐसी तलाशी ली गर्इ थी या अध्यपेक्षा की गर्इ थी, यथास्थिति, ऐसी तलाशी प्रारंभ करने की तारीख या ऐसी अध्यपेक्षा की तारीख, तक की अवधि भी सम्मिलित है।
(ख) "अप्रकट आय" के अंतर्गत कोर्इ धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज या लेखा बहियों में या अन्य दस्तावेजों या संव्यवहारों में किसी प्रविष्टि पर आधारित कोर्इ आय है, जहां ऐसा धन, सोना-चांदी, आभूषण, मूल्यवान वस्तु या चीज़, लेखा बहियों, दस्तावेजों या संव्यवहारों में प्रविष्टि पूर्णत: या भागत: उस आय या संपत्ति को दर्शाती है जो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए प्रकट नहीं की गर्इ है या नहीं की गर्इ होगी।
71. अध्याय 14ख, जिसमें धारा 158ख से धारा 158खज हैं, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। इससे पहले अध्याय 14ख जो "कुछ मामलों में अतिरिक्त आय-कर के प्रभार" के विषय में था, धारा 158ख के साथ-साथ प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित किया गया था और बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से उसका लोप कर दिया गया था।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

