निर्धारण और पुन: निर्धारणों को पूरा करने के लिए समय-सीमा
निर्धारण और पुन: निर्धारणों को पूरा करने के लिए समय-सीमा
153. 27[(1) धारा 143 या धारा 144 के अधीन कोर्इ निर्धारण आदेश28 निम्नलिखित अवधियों की समाप्ति के, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, पश्चात् किसी समय नहीं किया जाएगा–
(क) जिस निर्धारण वर्ष में वह आय सर्वप्रथम निर्धारणीय थी उस निर्धारण वर्ष के अंत से दो वर्ष के पश्चात्, या
(ख) जिस वित्तीय वर्ष में धारा 139 की उपधारा (4) या उपधारा (5) के अधीन विवरणी या पुनरीक्षित विवरणी 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उसके पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष के संबंध में दाखिल की जाती है उसके अंत से एक वर्ष के पश्चात् :]
29[परंतु यह कि यदि ऐसा निर्धारण वर्ष, जिसमें आय प्रथम बार निर्धारणीय थी, 29क[1 अप्रैल, 2004 को या उसके पश्चात्, किन्तु 1 अप्रैल, 2010 के पूर्व प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष है] तो खंड (क) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर "इक्कीस मास" शब्द रख दिए गए हों:]
30[परंतु यह और कि यदि वह निर्धारण वर्ष, जिसमें आय पहली बार निर्धारणीय थी, 30क[1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात्, किन्तु 1 अप्रैल, 2009 के पूर्व प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष या कोर्इ पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है] और कुल आय के निर्धारण से संबंधित कार्यवाही के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश–
(i) 1 जून, 2007 से पूर्व किया गया था, किंतु उस धारा की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश ऐसी तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या
(ii) 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किया गया है,
तो खंड (क) के उपबंध, पहले परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर "तैंतीस मास" शब्द रखे गए हों:]
30ख[परंतु यह भी कि यदि वह निर्धारण वर्ष, जिसमें आय पहले निर्धारणीय थी, 1 अप्रैल, 2009 को प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष या कोर्इ पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है और कुल आय का निर्धारण करने संबंधी कार्यवाही के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश किया जाता है, तो खंड (क) के उपबंध, पहले परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर, "तीन वर्ष" शब्द रखे गए हों;]
31[(1क) धारा 115बड़ या धारा 115बच के अधीन, निर्धारण का कोर्इ आदेश, उस निर्धारण वर्ष के, जिसमें अनुषंगी फायदे सर्वप्रथम निर्धारणीय थे, अंत से 32[इक्कीस मास] के पश्चात् किसी समय नहीं किया जाएगा।
(1ख) धारा 115बछ के अधीन निर्धारण या पुनर्निर्धारण का कोर्इ आदेश, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 115बज के अधीन सूचना की तामील की गर्इ थी, अंत से 33[नौ मास] की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।]
34[(2) धारा 147 के अधीन निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना का कोर्इ आदेश, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 148 के अधीन सूचना की तामील की गर्इ थी, अंत से 35[एक वर्ष] की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा :
36[परन्तु जहां धारा 148 के अधीन सूचना की तामील 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 2000 से पूर्व की गर्इ थी, वहां ऐसा निर्धारण, पुन:निर्धारण या पुन:संगणना 31 मार्च, 2002 तक किसी भी समय की जा सकेगी :]
37[परंतु यह और कि जहां धारा 148 के अधीन सूचना की तामील 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् 37क[किन्तु 1 अप्रैल, 2011 के पूर्व] की गर्इ थी, वहां इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर, "नौ मास" शब्द रख दिए गए हों :]
38[परंतु यह भी कि जहां धारा 148 के अधीन सूचना की तामील 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात् 37क[किन्तु 1 अप्रैल, 2010 के पूर्व] की गर्इ थी और कुल आय के निर्धारण या पुनर्निधारण या पुन: संगणना करने संबंधी कार्यवाहियों के दौरान, धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश–
(i) 1 जून, 2007 से पूर्व किया गया था, किंतु उस धारा की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश ऐसी तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या
(ii) 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किया गया है,
वहां इस उपधारा के उपबंध, दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर "इक्कीस मास" शब्द रखे गए हों:]
38क[परंतु यह भी कि जहां धारा 148 के अधीन सूचना की तामील 1 अप्रैल, 2010 को या उसके पश्चात् की गर्इ हो और कुल आय का निर्धारण या पुन:निर्धारण या पुनर्संगणना करने संबंधी कार्यवाही के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश किया जाता है, वहां इस उपधारा के उपबंध दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर, "दो वर्ष" शब्द रखे गए हों,]
39[(2क) उपधारा (1) 40[उपधारा (1क), उपधारा (1ख)] और उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी 1 अप्रैल, 1971 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष और उसके पश्चात् के किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में धारा 250, धारा 254, धारा 263 या धारा 264 के अधीन, किसी निर्धारण को अपास्त या रद्द करने वाले आदेश के अनुसरण में नए सिरे से निर्धारण का आदेश, उस वित्तीय वर्ष के, जिसमें धारा 250 या धारा 254 के अधीन आदेश यथास्थिति, 40क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 40क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या 40क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 40क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा धारा 263 या धारा 264 के अधीन पारित किया जाता है, अंत से एक वर्ष की समाप्ति के पूर्व किसी भी समय किया जा सकेगा :
परन्तु जहां धारा 250 या धारा 254 के अधीन आदेश, यथास्थिति, 40क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 40क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश 40क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 40क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात् किंतु 1 अप्रैल, 2000 से पूर्व पारित किया जाता है वहां नए सिरे से निर्धारण का ऐसा कोर्इ आदेश 31 मार्च, 2002 तक किसी भी समय किया जा सकेगा :]
41[परंतु यह और कि जहां, यथास्थिति, धारा 254 के अधीन आदेश 41क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 41क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश 41क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् 41ख[किन्तु 1 अप्रैल, 2011 के पूर्व] पारित किया जाता है, वहां इस उपधारा के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर "नौ मास" शब्द रख दिए गए हों:]
42[परंतु यह भी कि जहां धारा 254 के अधीन आदेश, यथास्थिति, 42क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 42क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश, 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात् 41ख[किन्तु 1 अप्रैल, 2010 के पूर्व] 42क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा पारित किया जाता है और कुल आय का नए सिरे से निर्धारण करने संबंधी कार्यवाहियों के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश–
(i) 1 जून, 2007 से पूर्व किया गया था, किंतु धारा 92गक की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश ऐसी तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या
(ii) 1 जून, 2007 को या उसके पश्चात् किया गया है,
वहां इस उपधारा के उपबंध, दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर "इक्कीस मास" शब्द रखे गए हों:]
42ख[परंतु यह भी कि जहां 1 अप्रैल, 2010 को या उसके पश्चात् यथास्थिति, धारा 254 के अधीन आदेश, 42क[प्रधान मुख्य आयुक्त या] मुख्य आयुक्त या 42क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश 42क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा पारित किया जाता है, और कुल आय का नए सिरे से निर्धारण करने संबंधी कार्यवाही के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश किया जाता है, वहां इस उपधारा के उपबंध दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर "दो वर्ष" शब्द रखे गए हों;]
(3) उपधारा (1) 43[उपधारा (1क), उपधारा (1ख)] और उपखण्ड (2) के उपबंध निम्नलिखित निर्धारणों, पुन:निर्धारणों और पुन: संगणनाओं के वर्गों को लागू नहीं होंगे जिनको 44[उपधारा (2क) के उपबंधों के अधीन रहते हुए] किसी भी समय पूरा किया जा सकेगा–
(i) 45[* * *]
(ii) जहां निर्धारिती या किसी व्यक्ति46की बाबत निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना धारा 250, 254, 260, 262, 263 या 264 के अधीन आदेश में 47[या इस अधिनियम के अधीन अपील या निर्देश के रूप में कार्यवाही से भिन्न किसी कार्यवाही में किसी न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में] अंतर्विष्ट किसी निष्कर्ष48 या निदेश48 के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए48क की जाती है;
(iii) जहां किसी फर्म की दशा में धारा 147 के अधीन फर्म के संबंध में किए गए निर्धारण के परिणामस्वरूप फर्म के किसी भागीदार के संबंध में निर्धारण किया जाता है।
48ख[(4) इस धारा, धारा 153क की उपधारा (2) और धारा 153ख की उपधारा (1) के पूर्वगामी उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश, जो धारा 153क की उपधारा (2) के अधीन पुन:प्रवर्तित हो गया है, ऐसे पुन:प्रवर्तन के मास के अंत से एक वर्ष के भीतर या इस धारा अथवा धारा 153ख की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, किया जाएगा।]
49[स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमाकाल की गणना करने में–
(i) सम्पूर्ण कार्यवाही या उसके किसी भाग को पुन: शुरू करने में या धारा 129 के परन्तुक के अधीन निर्धारिती को पुन: से सुनवार्इ का अवसर देने में लगे समय को; या
(ii) उस अवधि को, जिसके दौरान निर्धारण की कार्यवाही50 पर किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश द्वारा रोक लगा दी जाती है; या
51[(iiक) उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी, केन्द्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी को, धारा 143 की उपधारा (3) के परन्तुक के खंड (i) के अधीन धारा 10 के खंड (21) या खंड (22ख) या खंड (23क) या खंड (23ख) या खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के उपबंधों के उल्लंघन की सूचना देता है प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उन खंडों के अधीन, यथास्थिति, अनुमोदन को वापस लेने के आदेश या अधिसूचना के विखंडन की प्रति निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि;]
52[(iii) उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी निर्धारिती को धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और--
(क) उस अंतिम तारीख को समाप्त होने वाली अवधि, जिसको निर्धारिती से ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट उस उपधारा के अधीन प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है; या
(ख) जहां ऐसे निदेश को न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जाती है, उस तारीख को समाप्त होने वाली अवधि, जिसको ऐसे आदेश को अपास्त किए जाने संबंधी ऐसा निदेश 52क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है; या]
53[(iv) उस तारीख से प्रारंभ होने वाली, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142क की उपधारा (1) के अधीन मूल्यांकन अधिकारी को कोर्इ निर्देश करता है और उस तारीख को समाप्त होने वाली, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त की जाती है, अवधि; या]
54[(ivक) उस तारीख से, जिसको 55[निर्धारण] अधिकारी धारा 158क की उपधारा (1) के अधीन घोषणा प्राप्त करता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस धारा की उपधारा (3) के अधीन उसके द्वारा आदेश किया जाता है, समाप्त होने वाली (साठ दिन से अनधिक) की अवधि; या]
(v) ऐसे मामले में, जिसमें धारा 245ग के अधीन आय-कर समझौता आयोग के समक्ष किया गया आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है, अथवा उसके द्वारा उस पर कार्यवाही करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती है, उस तारीख से, जिसको ऐसा आवेदन किया जाता है, प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को जिसको धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन आदेश उस धारा की उपधारा (2) के अधीन 55क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली कालावधि; 56[या]
56[(vi) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय संबंधी प्राधिकरण के समक्ष कोर्इ आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (3) के अधीन आवेदन को नामंजूर करने वाला आदेश 56क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि; या
(vii) उस तारीख से, जिसको धारा 245थ की उपधारा (1) के अधीन अग्रिम विनिर्णय संबंधी प्राधिकरण के समक्ष कोर्इ आवेदन किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको धारा 245द की उपधारा (7) के अधीन उसके द्वारा घोषित अग्रिम विनिर्णय 56क[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, 57[समाप्त होने वाली अवधि; या]]
57क[(viii) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोर्इ निर्देश या निर्देशों में से प्रथम निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको अनुरोध की गर्इ अंतिम सूचना प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि या एक वर्ष की अवधि, इनमें से जो भी कम हो;] 57ख[या]
(ix) 57ग[* * *]
वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2016 से धारा 153 के स्पष्टीकरण 1 के खंड (viii) के पश्चात् निम्नलिखित खंड (ix) अंत:स्थापित किया जाएगा :
(ix) उस तारीख से, जिसको धारा 144खक की उपधारा (1) के अधीन 57घ[प्रधान आयुक्त या] आयुक्त द्वारा किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किए जाने के लिए कोर्इ निर्देश प्राप्त किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको निर्धारण अधिकारी द्वारा उक्त धारा की उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश या उपधारा (5) के अधीन कोर्इ आदेश प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि,
को छोड़ दिया जाएगा :
58[परन्तु जहां पूर्वोक्त समय या अवधि को छोड़े जाने के ठीक पश्चात्, उपधारा (1), 59[उपधारा (1क), उपधारा (1ख),] 59क[उपधारा (2), उपधारा (2क) और उपधारा (4)] में निर्दिष्ट वह परिसीमाकाल, जो निर्धारण अधिकारी को यथास्थिति, निर्धारण, पुन: निर्धारण या पुन: संगणना का आदेश करने के लिए उपलब्ध है, साठ दिन से कम है, वहां ऐसी शेष अवधि साठ दिन बढ़ार्इ जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमाकाल तदनुसार बढ़ाया गया समझा जाएगा:]
59ख[परंतु यह और कि जहां समझौता आयोग के समक्ष किसी कार्यवाही का धारा 245जक के अधीन उपशमन हो जाता है वहां, यथास्थिति, निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुन: संगणना का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी को इस धारा के अधीन उपलब्ध परिसीमा की अवधि, धारा 245जक की उपधारा (4) के अधीन की अवधि के अपवर्जन करने के पश्चात्, एक वर्ष से कम की नहीं होगी; और जहां परिसीमा की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम है वहां यह समझा जाएगा कि वह एक वर्ष के लिए बढ़ा दी गर्इ है; और धारा 149, 153ख, 154, 155, 158खड़ और 231 के अधीन परिसीमा की अवधि का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए और, यथास्थिति, धारा 243 या धारा 244 या धारा 244क के अधीन ब्याज का संदाय करने के प्रयोजनों के लिए, यह परन्तुक भी तदनुसार लागू होगा।]
स्पष्टीकरण 2.–जहां 60[उपधारा (3) के खंड (ii) में निर्दिष्ट] किसी आदेश द्वारा किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय में से किसी आय को अपवर्जित किया जाता है, वहां किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए ऐसी आय का निर्धारण, धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उक्त आदेश में अन्तर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 3.–जहां 60[उपधारा (3) के खंड (ii) में निर्दिष्ट] किसी आदेश द्वारा कोर्इ आय किसी एक व्यक्ति की कुल आय में से अपवर्जित की जाती है और अन्य व्यक्ति61 की आय मानी जाती है; वहां ऐसे अन्य व्यक्ति पर ऐसी आय का निर्धारण धारा 150 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उक्त आदेश में अन्तर्विष्ट किसी निष्कर्ष या निदेश के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए किया गया निर्धारण समझा जाएगा, परन्तु यह तब जबकि उक्त आदेश के पारित किए जाने के पूर्व ऐसे अन्य व्यक्ति को सुनवार्इ का अवसर दिया गया था।
27. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित। इससे पहले उपधारा (1) प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा उसी तारीख से प्रतिस्थापित की गर्इ थी। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) [जो प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा प्रतिस्थापन से पूर्व विद्यमान थी] जो वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी और बाद में कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से संशोधित की गर्इ थी।
28. ‘‘निर्धारण आदेश’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
29. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
29क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "1 अप्रैल, 2004 को प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष या कोर्इ पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
30. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से अंत:स्थापित।
30क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से "1 अप्रैल, 2005 को प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष या कोर्इ पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
30ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.7.2012 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित तीसरा परन्तुक इस प्रकार था :
"परंतु यह भी कि यदि वह निर्धारण वर्ष, जिसमें आय पहले निर्धारणीय थी, 1 अप्रैल, 2009 को प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष या कोर्इ पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष है और कुल आय के निर्धारण से संबंधित कार्यवाही के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश–
(i) 1 जुलार्इ, 2012 के पूर्व किया जाता है, किंतु उस धारा की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश उस तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या
(ii) 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात् किया जाता है,
तो खंड (क) के उपबंध, पहले परंतुक में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "दो वर्ष" शब्दों के स्थान पर, "तीन वर्ष" शब्द रखे गए हों;"
31. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 उपधारा (1क) और (1ख) अंत:स्थापित।
32. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से "दो वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
33. यथोक्त द्वारा "एक वर्ष" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
34. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित।
35. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से ‘‘दो वर्ष’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
36. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से परन्तुक प्रतिस्थापित किया गया। प्रतिस्थापन से पूर्व परन्तुक निम्न प्रकार था :
‘‘परन्तु जहां धारा 148 के अधीन सूचना 31 मार्च, 1987 को या उससे पूर्व तामील की गर्इ थी वहां ऐसा निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुन:संगणना 31 मार्च, 1990 तक किसी भी समय की जा सकेगी।’’
37. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
37क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
38. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से अंत:स्थापित।
38क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.7.2012 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित चौथा परन्तुक इस प्रकार था :
"परंतु यह भी कि जहां धारा 148 के अधीन नोटिस की तामील 1 अप्रैल, 2010 को या उसके पश्चात् की गर्इ थी और कुल आय के निर्धारण या पुनर्निर्धारण या पुन: संगणना करने संबंधी कार्यवाहियों के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश,–
(i) 1 जुलार्इ, 2012 के पूर्व किया जाता है, किंतु उस धारा की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश उस तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या
(ii) 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात् किया जाता है,
वहां इस उपधारा के उपबंध, दूसरे परंतुक में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर, "दो वर्ष" शब्द रखे गए हों;"
39. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (2क), जो कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित की गर्इ थी, निम्न प्रकार थी :
‘‘(2क) उपधारा (1) और (2) में किसी बात के होते हुए भी, 1 अप्रैल, 1971 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के संबंध में, और किसी बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में, निर्धारण को अपास्त या रद्द करते हुए, धारा 146 के अधीन या धारा 250, धारा 254, धारा 263 या धारा 264 के अधीन किसी आदेश के अनुसरण में नए निर्धारण का आदेश उस वित्तीय वर्ष के अंत से जिसमें निर्धारण रद्द करते हुए धारा 146 के अधीन आदेश यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किया जाए या धारा 250 या धारा 254 के अधीन आदेश मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाए या धारा 263 या धारा 264 के अधीन मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा आदेश पारित किया जाए, दो वर्ष की समाप्ति से पूर्व पर किसी समय किया जा सकता है।’’
40. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
40क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
41. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.6.2006 से अंत:स्थापित।
41क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
41ख. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित।
42. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.6.2007 से अंत:स्थापित।
42क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
42ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.7.2012 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से अंत:स्थापित चौथा परन्तुक इस प्रकार था :
"परंतु यह भी कि जहां धारा 254 के अधीन आदेश, यथास्थिति, मुख्य आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या धारा 263 या धारा 264 के अधीन आदेश आयुक्त द्वारा 1 अप्रैल, 2010 को या उसके पश्चात् पारित किया जाता है और कुल आय का नए सिरे से निर्धारण करने संबंधी कार्यवाहियों के दौरान धारा 92गक की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ निर्देश,–
(i) 1 जुलार्इ, 2012 के पूर्व किया जाता है, किंतु धारा 92गक की उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश उस तारीख से पूर्व नहीं किया गया है; या
(ii) 1 जुलार्इ, 2012 को या उसके पश्चात् किया जाता है,
वहां इस उपधारा के उपबंध, दूसरे परंतुक में किसी बात के होते हुए भी, इस प्रकार प्रभावी होंगे, मानो "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर "दो वर्ष" शब्द रखे गए हों;"
43. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
44. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से अंत:स्थापित।
45. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.6.2001 से लोप किया गया। लोप से पूर्व खंड (i) इस प्रकार था :
‘‘(i) जहां धारा 146 के अधीन नए सिरे से निर्धारण किया जाता है;"
46. ‘‘किसी व्यक्ति’’ और "के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए" पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
47. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से अंत:स्थापित।
48. ‘‘निष्कर्ष’’ या "निदेश’’ पदों के लिए अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
48क. ‘‘किसी व्यक्ति’’ और "के परिणामस्वरूप या उसको प्रभावी करने के लिए" पदों के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
48ख. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
49. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.1.1976 से खंड (i), (ii) और (iv) के संबंध में तथा खंड (iii) और खंड (v) के संबंध में 1.4.1976 से प्रतिस्थापित।
50. ‘‘निर्धारण की कार्यवाही’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
51. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से अंत:स्थापित।
52. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.6.2013 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (iii), जो प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से संशोधित किया गया था, इस प्रकार था :
"(iii) उस तारीख से, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश निर्धारिती को देता है, प्रारम्भ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उस उपधारा के अधीन निर्धारिती ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट देता है, समाप्त होने वाली अवधि; या"
52क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
53. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.10.2014 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व खंड (iv) का प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया था।
54. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से अंत:स्थापित।
55. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ‘‘आय-कर’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
55क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
56. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.10.2004 से अंत:स्थापित।
56क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.6.2013 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
57. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.6.2011 से ‘‘समाप्त होने वाली अवधि,’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
57क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.6.2013 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (viii), वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.7.2012 से संशोधित खंड (viii) इस प्रकार था :
"(viii) उस तारीख से, जिसको धारा 90 या धारा 90क में निर्दिष्ट किसी करार के अधीन किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सूचना के आदान-प्रदान के लिए कोर्इ निर्देश किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको आयुक्त द्वारा इस प्रकार अनुरोध की गर्इ सूचना प्राप्त की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि या एक वर्ष की अवधि, इनमें से जो भी कम हो;"
57ख. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2016 से "या" शब्द अंत:स्थापित किया जाएगा।
57ग. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2013 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पूर्व वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से यथा अंत:स्थापित खंड (ix) इस प्रकार था :
"(ix) उस तारीख से, जिसको धारा 144खक की उपधारा (1) के अधीन किसी ठहराव को अननुज्ञेय परिवर्जन ठहराव घोषित किए जाने के लिए निर्देश आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, प्रारंभ होने वाली और उस तारीख को, जिसको उक्त धारा की उपधारा (3) या उपधारा (6) के अधीन कोर्इ निदेश या उपधारा (5) के अधीन कोर्इ आदेश निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि।"
57घ. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.6.2013 से अंत:स्थापित।
58. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 27.9.1991 से अंत:स्थापित।
59. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।
59क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2003 से भूतलक्षी प्रभाव से ‘‘उपधारा (2) और उपधारा (2क)’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।
59ख. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.6.2007 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
60. प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1964 द्वारा 6.10.1964 से ‘‘धारा 250, 254, 260, 262, 263 या 264 के अधीन’’ शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
61. ‘‘अन्य व्यक्ति’’ पद के अर्थ के लिए सम्बंधित केस लाज़ देखिए।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

