कतिपय आय की कराधेयता
कतिपय आय की कराधेयता
145ख. (1) धारा 145 में अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी निर्धारिती द्वारा, यथास्थिति, किसी प्रतिकर या वर्धित प्रतिकर पर प्राप्त ब्याज, उस पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी, जिसमें वह प्राप्त किया गया है।
(2) किसी संविदा या निर्यात प्रोत्साहन में कीमत की वृद्धि के लिए कोर्इ दावा उस पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी, जिसमें इसकी वसूली की युक्तियुक्त निश्चितता प्राप्त की गर्इ हो।
(3) धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (xviii) में निर्दिष्ट आय उस पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी, जिसमें वह प्राप्त की गर्इ है, यदि उसे किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष में आय-कर से प्रभावित न किया गया हो। ]
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

