आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 145

लेखा पद्धति

धारा

धारा संख्या

145

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIV - मूल्यांकन के लिए प्रक्रिया

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

लेखा पद्धति

लेखा पद्धति

93[लेखा पद्धति94

145. (1) ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' या ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्ष के अधीन आय उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए या तो नगद रूप में या निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से95 प्रयुक्त वाणिज्यिक लेखा पद्धति के अनुसार संगणित की जाएगी।

(2) केन्द्रीय सरकार समय-समय पर 95राजपत्र में उन लेखा मानकों को अधिसूचित कर सकेगी जिनका अनुपालन निर्धारिती के किसी वर्ग द्वारा या आय के किसी वर्ग की बाबत किया जाना है।

(3) जहां निर्धारिती के लेखाओं की शुद्धता या पूर्णता के बारे में निर्धारण अधिकारी का समाधान नहीं होता है या जहां उपधारा (1) में दी गर्इ लेखा पद्धति या उपधारा (2) के अधीन अधिसूचित लेखा मानक का निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से अनुसरण नहीं किया गया है, वहां निर्धारण अधिकारी धारा 144 में दी गर्इ रीति से निर्धारण कर सकेगा।]

 

93. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1997 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988/1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से यथा संशोधित धारा 145 इस प्रकार थी :

'145. लेखा पद्धति–(1) ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' तथा ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्षों के अधीन प्रभार्य आय निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से प्रयुक्त लेखा पद्धति के अनुसार संगणित की जाएगी :

परन्तु जहां लेखा सही और निर्धारण अधिकारी के समाधानप्रद रूप में हैं किन्तु प्रयुक्त पद्धति ऐसी है कि निर्धारण अधिकारी की राय में, इससे आय की कटौती उचित रूप से नहीं हो सकती है तो संगणना ऐसे आधार पर और ऐसी रीति से की जाएगी जो निर्धारण अधिकारी अवधारित करे :

परन्तु यह और कि जहां निर्धारिती द्वारा कोर्इ लेखा पद्धति नियमित रूप से प्रयुक्त नहीं की जाती है वहां प्रतिभूतियों पर ब्याज के रूप में कोर्इ आय उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर से प्रभार्य होगी जिसमें ऐसा ब्याज निर्धारिती को देय होता हो :

परन्तु यह भी कि इस उपधारा की कोर्इ भी बात निर्धारिती को उसके द्वारा पूर्ववर्ष में प्रतिभूतियों पर प्राप्त किसी ब्याज की बाबत आय-कर से प्रभारित किए जाने से विरत नहीं करेगी यदि ऐसे ब्याज पर उससे पूर्व किसी पूर्ववर्ष में आय-कर प्रभारित नहीं किया गया था।

(2) जहां निर्धारण अधिकारी का निर्धारिती के लेखाओं के सही होने और पूरे होने के बारे में समाधान नहीं हुआ है अथवा जहां कोर्इ लेखा पद्धति निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से प्रयुक्त नहीं की गर्इ है वहां निर्धारण अधिकारी धारा 144 में दी गर्इ रीति से निर्धारण कर सकेगा।'

94. अनुदेश सं. 1310, तारीख 26.2.1980 और परिपत्र सं. 491, तारीख 30.6.1986 के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट। सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट। "नियमित रूप से" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

95. अधिसूचित लेखा मानकों के लिए देखिये अधिसूचना सं. का. आ. 69(र्इ), तारीख 25.1.1996. ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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