स्वत: निर्धारण
स्वत: निर्धारण
140क. (1) जहां इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन पहले ही संदत्त की गई कर की रकम को, यदि कोई हो, हिसाब में लेने के पश्चात् यथास्थिति धारा 115बघ या धारा 115बज या धारा 139 या धारा 142 या, धारा 148 या, धारा 153क या धारा 158खग, के अधीन दिए जाने के लिए अपेक्षित किसी विवरणी के आधार पर कोई कर—
(i) इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन पहले ही संदत्त की गई कर की रकम, यदि कोई हो;
(ii) स्रोत पर काटे गए या संगृहीत किए गए किसी कर;
67क[(iiक) धारा 89 के अधीन दावा की गई कर की कोई राहत;]
(iii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गई कर की किसी राहत या कर की कटौती;
(iv) उस धारा में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गई कर की किसी राहत; 67ख[***]
(v) धारा 155ञकक या 67ग[धारा 115ञघ ; और] के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किए गए किसी कर प्रत्यय,
67घ[(vi) धारा 191 की उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार संदेय कोई कर या ब्याज;।]
को हिसाब में लेने के पश्चात् संदेय है, वहां निर्धारिती, विवरणी देने के पूर्व, ऐसे कर का और साथ ही विवरणी देने में हुए किसी विलम्ब अथवा अग्रिम कर के संदाय में किसी व्यतिक्रम या विलंब के लिए, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन संदेय ब्याज 68[और फीस] का संदाय, करने का दायी होगा तथा विवरणी के साथ ऐसे कर 69[, ब्याज और फीस] के संदाय का सबूत होगा।
स्पष्टीकरण.—जहां इस उपधारा के अधीन निर्धारिती द्वारा संदत्त रकम पूर्वोक्त कर 70[ब्याज और फीस के योग से कम पड़ती है, वहां इस प्रकार संदत्त रकम का समायोजन, पहले पूर्वोक्त संदेय ब्याज और फीस] के प्रति और अतिशेष का समायोजन, यदि कोई हो, संदेय कर के प्रति किया जाएगा।
(1क) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए,—
(i) धारा 234क के अधीन संदेय ब्याज की संगणना विवरणी में घोषित कुल आय के संबंध में कर की रकम पर की जाएगी, जिसमें से,—
(क) संदत्त अग्रिम कर, यदि कोई हो;
(ख) स्रोत पर काटा गया या संगृहीत कोई कर;
70क[(खक) धारा 89 के अधीन दावा की गई कर की कोई राहत;]
(ग) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गई कर की किसी राहत या कर की कटौती;
(घ) उस धारा में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गई कर की कोई राहत; और
(ड़) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किए गए किसी कर प्रत्यय,
को घटा दिया जाएगा।
(ii) धारा 115बट के अधीन संदेय ब्याज की संगणना विवरणी में घोषित अनुषंगी फायदों के कुल मूल्य पर कर की रकम पर की जाएगी जिसमें से संदत्त अग्रिम कर, यदि कोई हो, घटा दिया जाएगा।
(1ख) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, धारा 234ख के अधीन संदेय ब्याज की संगणना, यथास्थिति, निर्धारित कर के बराबर रकम पर या उस रकम पर, जिस तक संदत्त अग्रिम कर निर्धारित कर से कम आता है, की जाएगी।
स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्धारित कर" से विवरणी में घोषित कुल आय पर वह कर अभिप्रेत है, जिसमें से,—
(i) किसी ऐसी आय पर, जो ऐसी कटौती या संग्रहण के अधीन है और जिसे ऐसी कुल आय की संगणना करने में हिसाब में लिया गया है, अध्याय 17 के उपबंधों के अनुसार स्रोत पर काटे गए या संगृहीत कर;
70ख[(iक) धारा 89 के अधीन दावा की गई कर की कोई राहत;]
(ii) भारत के बाहर किसी देश में संदत्त कर के मद्दे धारा 90 या धारा 91 के अधीन दावा की गई कर की किसी राहत या कर की कटौती;
(iii) उस धारा में निर्दिष्ट भारत के बाहर किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में संदत्त कर के मद्दे धारा 90क के अधीन दावा की गई कर की किसी राहत; और
(iv) धारा 115ञकक या धारा 115ञघ के उपबंधों के अनुसार मुजरा किए जाने के लिए दावा किए गए किसी कर प्रत्यय,
को घटा दिया जाएगा।
(2) धारा 115बड़ या धारा 115बच या धारा 143 या धारा 144 के अधीन नियमित निर्धारण या धारा 153क या धारा 158खग के अधीन निर्धारण कर दिए जाने के पश्चात् उपधारा (1) के अधीन संदत्त रकम, यथास्थिति, ऐसे नियमित निर्धारण या निर्धारण मद्दे संदत्त की गई समझी जाएगी।
(3) यदि कोई निर्धारिती उपधारा (1) के अनुसार ऐसे संपूर्ण 71[कर या ब्याज या उसके किसी भाग या फीस का] संदाय करने में असफल रहता है, तो वह, किन्हीं ऐसे अन्य परिणामों पर जो वह उपगत करे प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना असंदत्त रहे, 71[कर या ब्याज या उसके किसी भाग या फीस का] की बाबत व्यतिक्रम करने वाला निर्धारिती समझा जाएगा, और इस अधिनियम के सभी उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(4) इस धारा के उपबंध जैसे कि वे प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 (1988 का 4) द्वारा उनके संशोधन के ठीक पूर्व थे, 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष के किसी निर्धारण को और उसके संबंध में लागू होंगे और इस धारा में इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे उन उपबंधों के प्रति निर्देश हैं जो तत्समय प्रवृत्त थे, और सुसंगत निर्धारण वर्ष को लागू होते थे।
[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

