धारा 43 के संशोधन
धारा 43 का संशोधन
14. आय-कर अधिनियम की धारा 43 के खंड (5) में, 1 अप्रैल, 2006 से, -
(क) परतुंक में,-
(i) खंड (ग) में, "या" शब्द, अंत में अंतःस्थापित किया जाएगा ;
(ii) इस प्रकार यथासंशोधित, खंड (ग) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
'(घ) प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (कक) में निर्दिष्ट व्युत्पन्नों में व्यापार के संबंध में किया गया कोई पात्र संव्यवहार, जो किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में किया जाता है ;';
(ख) परतुंक के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
'स्पष्टीकरण.- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, -
(i) "पात्र संव्यवहार" से कोई ऐसा संव्यवहार अभिप्रेत है, -
(क) जो भारतीय प्रतिभूति और विनियमन बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 12 के अधीन रजिस्ट्रीक़त किसी स्टाक ब्रोकर या उप-ब्रोकर या ऐसे अन्य मध्यवर्ती के माध्यम से प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) या निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) के उपबंधों और उन अधिनियमों के अधीन बनाए गए नियमों, विनियमों या उपविधियों अथवा जारी किए गए निदेशों के अनुसार स्क्रीन-आधारित प्रणालियों पर या बैंकों अथवा म्युचुअल फंड द्वारा किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज पर इलैक्ट्रॉनिक रूप से किया जाता है ; और
(ख) जिसका ऐसे स्टाक ब्रोकर या उप-ब्रोकर या ऐसे अन्य मध्यवर्ती द्वारा प्रत्येक ग्राहक को जारी किए गए समयांकित संविदा टिप्पण द्वारा, जिसमें संविदा टिप्पण में उपखंड (क) में निर्दिष्ट किसी अधिनियम के अधीन आबंटित विशिष्ट ग्राहक पहचान संख्यांक और इस अधिनियम के अधीन आबंटित स्थायी लेखा संख्यांक उपदर्शित हो, समर्थन होता है ;
(ii) "मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज" से प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (च) में यथानिर्दिष्ट कोई मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज अभिप्रेत है और जो ऐसी शर्तें पूरा करता है, जो इस प्रयोजन के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा विहित और अधिसूचित की जाएं ।'।
[वित्त अधिनियम, 2005]

