आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 132

तलाशी और जब्ती

धारा

धारा संख्या

132

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIII - आयकर प्राधिकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2000

तलाशी और जब्ती

तलाशी और जब्ती

49[तलाशी और अभिग्रहण

50132. 51(1) जहां 52[महानिदेशक या निदेशक] या 53[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] 54[या ऐसे किसी 55[संयुक्त निदेशक] या 56[संयुक्त आयुक्त] को जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया हो], उसके पास जानकारी56क के परिणामस्वरूप यह विश्वास करने का कारण56क हो कि--

() ऐसे किसी व्यक्ति ने जिसको किन्हीं लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को पेश करने या पेश कराने के लिए भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) की धारा 37 की उपधारा (1) के अधीन या इस अधिनियम की धारा 131 की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ समन जारी किया गया था या भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) की धारा 22 की उपधारा (4) के अधीन या इस अधिनियम की धारा 142 की उपधारा (1) के अधीन कोर्इ सूचना जारी की गर्इ थी, ऐसे समन या सूचना द्वारा अपेक्षित लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को पेश करने या पेश कराने में लोप किया है, या वह असफल रहा है; या

() कोर्इ व्यक्ति जिसे पूर्र्वोक्त समन या सूचना जारी की गर्इ है या जारी की जाए किन्हीं ऐसी लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को जो भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) के अधीन या इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के लिए उपयोगी या उससे सुसंगत होगी, पेश नहीं करेगा या पेश नहीं कराएगा, या

() किसी व्यक्ति के कब्जे में कोर्इ धन, सोना, चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज57 है, और ऐसा धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज़ या तो पूर्णत: या भागत: ऐसी आय या सम्पत्ति के रूप में है, जो भारतीय आयकर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए 57[प्रकट नहीं की गर्इ है या प्रकट नहीं की जाएगी58] (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् अप्रकट आय या सम्पत्ति कहा गया है)।

59[तो,--

() यथास्थिति, 60[महानिदेशक या निदेशक] या 61[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] किसी 62[संयुक्त निदेशक] 63[संयुक्त आयुक्त] 64[सहायक निदेशक 65[या उपनिदेशक] 66[सहायक आयुक्त 65[या उपायुक्त] या आय-कर अधिकारी] को प्राधिकृत कर सकता है, या

() यथास्थिति, ऐसा 62[संयुक्त निदेशक] या 63[संयुक्त आयुक्त] किसी 64[सहायक निदेशक] 65[या उपनिदेशक]] 66[सहायक आयुक्त 65[या उपायुक्त] या आयकर अधिकारी] को प्राधिकृत कर सकता है।

(इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को सभी दशाओं में इसमें इसके पश्चात् प्राधिकृत अधिकारी कहा गया है) कि वह--]

(i) किसी ऐसे 67[भवन, स्थान, जलयान, यान या विमान] में प्रवेश करे और तलाशी68 ले, जहां उसके पास यह संदेह करने का कारण है कि ऐसी लेखा बहियां, अन्य दस्तावेज, धन, सोना, चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज रखी हुर्इ हैं;

(ii) खंड (i) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिए किसी दरवाजे, बक्से, लाकर, तिजोरी, अलमारी, या अन्य पात्र को जब उसकी कुंजियां उपलब्ध न हो, ताला तोड़ कर खोले;

69[(iiक) यदि प्राधिकृत अधिकारी को यह संदेह करने का कारण है कि किसी ऐसे व्यक्ति ने जो भवन, स्थान, जलयान, यान या वायुयान से बाहर आया है, या उसमें प्रवेश करने वाला है, या उसमें है, अपने शरीर में कोर्इ ऐसी लेखा बहियां, अन्य दस्तावेज, धन, सोना, चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज छिपा रखी है तो ऐसे व्यक्ति की तलाशी;]

(iii) ऐसी तलाशी के परिणामस्वरूप, पार्इ गर्इ ऐसी70 किन्हीं लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों, धन, सोना, चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज को अधिगृहीत70 करे;

(iv) किन्हीं लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों पर पहचान-चिन्ह लगाए या उनसे उद्धरण या उनकी नकलें ले या लिखे;

(v) ऐसे किसी धन, सोने-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज को नोट करें या तालिका बनाये :

71[परन्तु जहां खंड (i) में निर्दिष्ट कोर्इ भवन, स्थान, जलयान, यान या वायुयान किसी 72[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] की अधिकारिता के क्षेत्र के भीतर है, किंतु ऐसे 72[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] को खंड () या खंड () या खंड () में निर्दिष्ट व्यक्ति पर कोर्इ अधिकारिता नहीं है वहां धारा 73[120] में किसी बात के होते हुए भी, वह उन सभी मामलों में जिनमें उसे यह विश्वास करने का कारण है कि ऐसे व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले 74[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] से प्राधिकार प्राप्त करने में विलम्ब का राजस्व के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इस उपधारा के अधीन शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सक्षम होगा :]

75[परन्तु यह और कि जहां मूल्यवान वस्तु या चीज का भौतिक कब्जा लेना और उसे किसी सुरक्षित स्थान पर हटाना, उसके परिमाण, भार या अन्य भौतिक लक्षणों के कारण या उसके खतरनाक प्रकृति के होने के कारण संभव या साध्य नहीं है, तो प्राधिकृत अधिकारी उसके स्वामी पर या उस व्यक्ति पर जिसका उस पर अव्यवहित कब्जा या नियंत्रण है यह आदेश तामील कर सकेगा कि वह उसे ऐसे प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना न तो हटाएगा, न अलग करेगा और न अन्यथा व्यौहार करेगा और प्राधिकृत अधिकारी की यह कार्यवाही खंड (iii) के अधीन ऐसी मूल्यवान वस्तु या चीज का अभिग्रहण समझी जाएगी।]

76[(1क) जहां किसी 77[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] को उसके पास की जानकारी के परिणमस्वरूप यह संदेह करने का कारण है कि कोर्इ ऐसी लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज, जिसके संबंध में किसी अधिकारी ने 78[महानिदेशक या निदेशक] या किसी अन्य 79[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] या किसी ऐसे 80[संयुक्त निदेशक] या 81[संयुक्त आयुक्त] द्वारा जो बोर्ड द्वारा उपधारा (1) के खंड (i) से खंड (v) तक के अधीन कार्यवाही करने के लिए इस निमित्त सशक्त किया जा सकेगा प्राधिकृत किया गया है किसी ऐसे भवन, स्थान, जलयान, यान या विमान में है जो उपधारा (1) के अधीन प्राधिकार में उल्लिखित नहीं है तो ऐसा 82[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] धारा 83[120] में किसी बात के होते हुए भी उक्त अधिकारी को ऐसे भवन, स्थान, जलयान, यान या विमान के संबंध में पूर्वोक्त खंडों में से किसी भी खंड के अधीन कार्यवाही करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है।]

(2) प्राधिकृत अधिकारी उपधारा (1) 84[या उपधारा (1क)] में विनिर्दिष्ट सभी प्रयोजनों या उनमें से किसी में अपनी सहायता के लिए किसी पुलिस अधिकारी या केन्द्रीय सरकार के किसी अधिकारी या दोनों की सेवाएं अध्यपेक्षित कर सकेगा और ऐसी अध्यापेक्षा का अनुपालन करना ऐसे हर अधिकारी का कर्तव्य होगा।

(3) प्राधिकृत अधिकारी, जहां ऐसी किन्हीं लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों, धन, सोने-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज को अधिगृहीत करना 85[उपधारा (1) के दूसरे परंतुक में उल्लिखित कारणों से भिन्न कारणों से] साध्य86 नहीं है वहां उनके स्वामी पर या अन्य उस व्यक्ति पर जिसके कब्जे86 या नियंत्रण के अधीन वे तत्काल हैं, इस आदेश की तामील कर सकेगा कि वह उन्हें ऐसे अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना न तो हटाएगा न अलग करेगा और न अन्यथा व्यौहार करेगा और ऐसा अधिकारी ऐसी कार्यवाही कर सकेगा जो इस उपधारा का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो।

87[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा के अधीन पूर्वोक्त रूप में किसी आदेश की तामील को उपधारा (1) के खंड (iii) के अधीन ऐसी लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज का अधिग्रहण नहीं समझा जाएगा।]

(4) प्राधिकृत अधिकारी, तलाशी या अभिग्रहण के अनुक्रम के दौरान किसी ऐसे व्यक्ति की शपथ पर परीक्षा कर सकेगा जिसके कब्जे या नियंत्रण के अधीन कोर्इ लेखा बहियां, दस्तावेज, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज पार्इ जाती है और ऐसी परीक्षा के दौरान ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए किसी कथन का तत्पश्चात भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) के अधीन या इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही में साक्ष्य में उपयोग किया जा सकेगा।

88[स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि इस उपधारा के अधीन किसी व्यक्ति की परीक्षा न केवल ऐसी तलाशी के परिणामस्वरूप पार्इ गर्इ किन्हीं लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या आस्तियों की बाबत की जा सकेगी अपितु ऐसी सभी बातों की बाबत भी की जा सकेगी जो भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही से संबंधित किसी अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए सुसंगत है।]

89[(4क) जहां तलाशी के दौरान किसी व्यक्ति के कब्जे या नियंत्रण में कोर्इ लेखा बहियां, अन्य दस्तावेज, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज पार्इ जाती है या हैं वहां यह उपधारणा की जा सकेगी कि–

(i) ऐसी लेखा बहियां, अन्य दस्तावेजें, धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज ऐसे व्यक्ति की ही है या हैं;

(ii) ऐसी लेखा बहियां और अन्य दस्तावेजों की अन्तर्वस्तुएं सत्य हैं; और

(iii) ऐसी लेखा बहियों और अन्य दस्तावेजों में हस्ताक्षर और उनके प्रत्येक अन्य भाग जो किसी विशिष्ट व्यक्ति के हस्तलेख में होने तात्पर्यित हैं, या जिसके विषय में उचित रूप से यह उपधारणा की जा सकती है कि वे किसी विशिष्ट व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित है, या उसके हस्तलेख में हैं, उस व्यक्ति के ही हस्तलेख में हैं और किसी स्टाम्पित, निष्पादित या सत्यापित दस्तावेज की दशा में यह उपधारणा की जा सकेगी कि वह उस व्यक्ति द्वारा सम्यक् रूप से स्टाम्पित और निष्पादित या सत्यापित है जिसके द्वारा उसका इस प्रकार निष्पादित या सत्यापित होना तात्पर्यित है।]

90(5) 91[जहां कोर्इ धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज (जिसे इस धारा में और धारा 132क और धारा 132ख में आस्ति के रूप में निर्दिष्ट किया गया है) उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन 92[1 जुलार्इ, 1995 से पूर्व प्रारंभ की गर्इ तलाशी या अध्यपेक्षा के परिणमस्वरूप] अभिगृहीत की जाती है, वहां आय-कर अधिकारी, संबंधित व्यक्ति को सुनवार्इ का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो विहित93 की जाए, अभिग्रहण से 94[एक सौ बीस] दिन के भीतर 95[संयुक्त आयुक्त] के पूर्व अनुमोदन से एक आदेश करेगा जिसमें,]--]

(i) अप्रकट आय (जिसके अंतर्गत अप्रकटीकृत संपत्ति से आय भी है) ऐसी सामग्री के आधार पर जो उसे उपलभ्य हो, उसकी सर्वोत्तम विवेकबुद्धि से संक्षिप्त रीति में प्राक्कलित होगी;

(ii) इस प्रकार प्राक्कलित आय पर, भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार कर की रकम परिकलित होगी;

96[(iiक) भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संदेय, ब्याज की रकम तथा अधिरोपणीय शास्ति की रकम ऐसे अवधारित की जाएगी मानो वह नियमित निर्धारण का आदेश था;]

(iii) वह रकम विनिर्दिष्ट होगी जो इस अधिनियम और धारा 230क की उपधारा (1) के खंड () में विनिर्दिष्ट अधिनियमों में से किसी एक या अधिक के अधीन किसी ऐसे विद्यमान दायित्व की पूर्ति के लिए अपेक्षित होगी जिसके बारे में वह व्यतिक्रम करने वाला व्यक्ति है, या व्यतिक्रम करने वाला समझा जाता है,

और ऐसी आस्तियों/या उनके भाग को अपनी अभिरक्षा में रखेगा खंड (ii), 97[(iiक)] और (iii) में निर्दिष्ट रकमों के योग की पूर्ति के लिए उसकी राय में पर्याप्त हों और आस्तियों के शेष भाग को, यदि कोर्इ हो, तत्काल उस व्यक्ति के लिए निर्मुक्त कर देगा जिसकी अभिरक्षा से उसे अभिगृहीत किया गया था:

परन्तु यदि उसके पास उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के पश्चात आय-कर अधिकारी की यह राय है कि यह निश्चित करना संभव नहीं है कि ऐसी आय या उसका कोर्इ भाग किस पूर्ववर्ष या वर्षों से संबंधित है तो वह, यथास्थिति, ऐसी आय या उसके आय कर का परिकलन ऐसे कर सकेगा मानो ऐसी आय या भाग उस वित्तीय वर्ष में, जिसमें आस्तियां अभिगृहीत की गर्इ थी, प्रवृत्त दरों पर कर से प्रभार्य कुल आय थी 98[और वह तदनुसार संदेय या अधिरोपणीय ब्याज या शास्ति को भी, यदि कोर्इ हो अवधारित कर सकेगा] :

परन्तु यह और कि जहां किसी व्यक्ति ने खंड (ii) 99[(iiक)] और (iii) में निर्दिष्ट सभी रकमों या उनके भाग का संदाय कर दिया है या संदाय के लिए समाधानप्रद इंतजाम कर दिए हैं, वहां आय-कर अधिकारी 1[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] के पूर्व अनुमोदन से आस्तियों या उनके ऐसे भाग को जिसे वह मामले की परिस्थितियों में ठीक समझे, निर्मुक्त कर सकेगा।

(6) उपधारा (5) के अधीन प्रतिधारित आस्तियां 2[धारा 132ख] के उपबंधों के अनुसार बरती जा सकेंगी।

(7) यदि आयकर अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अभिगृहीत आस्तियां या उनका कोर्इ भाग ऐसे व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के लिए या उसकी ओर से धारित किए गए थे तो आय-कर अधिकारी ऐसे अन्य व्यक्ति के खिलाफ उपधारा (5) के अधीन कार्यवाही आरम्भ कर सकेगा और इस धारा के सब उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(8) उपधारा (1) 3[या उपधारा (1क)] के अधीन अभिगृहीत लेखा बहियां या अन्य दस्तावेज प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अभिग्रहण की तारीख से एक सौ अस्सी दिन की अवधि से अधिक के लिए तब तक नहीं रखे जाएंगे, जब तक कि उन्हें प्रतिधारित करने के लिए उसके द्वारा कारण लेखबद्ध नहीं किए जाते और ऐसे प्रतिधारण के लिए 4[मुख्य आयुक्त, आयुक्त, महानिदेशक या निदेशक] का अनुमोदन अभिप्राप्त नहीं कर लिया जाता :

परन्तु 4[मुख्य आयुक्त, आयुक्त, महानिदेशक या निदेशक] लेखा बहियों और अन्य दस्तावेजों को तीस दिन से अधिक समय तक रखना उसके पश्चात् प्राधिकृत नहीं करेगा, जब भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या इस अधिनियम के अधीन सारी कार्यवाहियां उन वर्षों के संबंध में जिससे कि वे लेखा पुस्तकें या अन्य दस्तावेज सुसंगत हैं पूरी करा ली गर्इ हों।

5[(8क) उपधारा (3) के अधीन कोर्इ आदेश ऐसे आदेश की तारीख से साठ दिन से अधिक अवधि के लिए तब तक प्रवृत्त नहीं रहेगा जब तक प्राधिकृत अधिकारी ऐसे कारणों से जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएं, 6[यथास्थिति, निदेशक या आयुक्त] का अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात् साठ दिन से आगे आदेश के प्रवर्तन की अवधि बढ़ा नहीं देता है :

परन्तु 6[यथास्थिति, निदेशक या आयुक्त] ऐसी अवधि को, ऐसी किसी अवधि से आगे बढ़ाने के लिए अनुमोदन नहीं देगा, जो उन वर्षों की बाबत, जिनके लिए ऐसी लेखा बहियां, अन्य दस्तावेज धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएं या चीजें सुसंगत हैं, इस अधिनियम के अधीन सभी कार्यवाहियों के पूरा होने के पश्चात् तीस दिन की समाप्ति से आगे की है।]

(9) वह व्यक्ति, जिसकी अभिरक्षा से कोर्इ लेखा बहियां या अन्य दस्तावेज उपधारा (1) 7[या उपधारा (1क)] के अधीन अभिगृहीत किए जाते हैं, उनकी नकलें या उनसे उद्धरण प्राधिकृत अधिकारी या उस निमित्त उसके द्वारा सशक्त किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में ऐसे स्थान और समय पर जो प्राधिकृत अधिकारी इस निमित्त नियत करें ले सकेगा।

8[(9क) जहां प्राधिकृत प्राधिकारी को उपधारा (1) के खंड (क) या खंड () या खंड () में निर्दिष्ट व्यक्ति पर कोर्इ अधिकारिता नहीं है, वहां प्राधिकारी उस उपधारा के अधीन अभिगृहीत लेखा बहियां या अन्य दस्तावेज या आस्तियां उस व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले आय-कर अधिकारी* को ऐसे अभिग्रहण के पंद्रह दिन की कालावधि के भीतर सौंप देगा और तब उस प्राधिकृत अधिकारी द्वारा उपधारा (8) या उपधारा (9) के अधीन प्रयोक्तव्य शक्तियां ऐसे आय-कर अधिकारी* द्वारा प्रयोक्तव्य होगी।]

(10) यदि उपधारा (1) 8क[या उपधारा (1क)] के अधीन अभिगृहीत लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों का वैध रूप से हकदार व्यक्ति, 9[मुख्य आयुक्त, आयुक्त, महानिदेशक या निदेशक] द्वारा उपधारा (8) के अधीन दिए गए अनुमोदन पर किसी कारण आक्षेप करता है, तो वह ऐसे आक्षेप के कारणों का कथन करते हुए और लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों को लौटाने के लिए प्रार्थना करते हुए बोर्ड को आवेदन कर सकेगा।

(11) यदि कोर्इ व्यक्ति10 उपधारा (5) के अधीन किए गए आदेश पर किसी कारण आक्षेप करता है तो वह ऐसे आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, ऐसे आक्षेप के कारणों का कथन करते हुए और उस बाबत समुचित राहत की प्रार्थना करते हुए 11[12[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] को आवेदन कर सकेगा।

13[(11क) उपधारा (11) में निर्दिष्ट प्रत्येक ऐसा आवेदन जो 1 अक्तूबर, 1984 से ठीक पहले उस उपधारा के जैसा कि वह उस तारीख से ठीक पहले विद्यमान थी, अधीन अधिसूचित किसी प्राधिकारी के समक्ष लंबित है, उस तारीख को 12[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] को अंतरित हो जाएगा और 12[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] ऐसे आवेदन के संबंध में उस प्रक्रम से आगे कार्यवाही कर सकेगा जिस पर वह उस तारीख को था :

परन्तु आवेदक यह मांग कर सकेगा कि आवेदन के संबंध में आगे कार्यवाही करने से पहले उसकी पुन: सुनवार्इ की जाए।]

(12) उपधारा (10) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर बोर्ड, या उपधारा (11) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर 14[15[मुख्य आयुक्त या आयुक्त] आवेदक को सुनवार्इ का अवसर देने के पश्चात् ऐसे आदेश पारित कर सकेगा 16[जैसे वह ठीक समझता है]।

17[(13) तलाशियों और अभिग्रहण से संबद्ध दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंध उपधारा (1) या उपधारा (1क) के अधीन तलाशियों और अभिग्रहण को यथा संभव लागू होंगे।

18(14) बोर्ड, इस धारा के अधीन किसी तलाशी या अभिग्रहण के संबंध में नियम बना सकेगा; विशिष्टत:, और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा निम्नलिखित के संबंध में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया उपबंधित कर सकेंगे--

(i) तलाशी लिए जाने वाले 19[किसी ऐसे भवन, स्थान, जलयान, यान या वायुयान] में प्रवेश अभिप्राप्त करना जहां उनमें निर्बाध प्रवेश उपलभ्य नहीं है;

(ii) अभिगृहीत की गर्इ किन्हीं लेखा बहियों या अन्य दस्तावेजों या आस्तियों की सुरक्षित अभिरक्षा सुनिश्चित करना।

स्पष्टीकरण 1.–20[उक्त उपधारा के प्रयोजनों के लिए उपधारा (5) में निर्दिष्ट अवधि] संगणित करने में, वह कालावधि अपवर्जित कर दी जाएगी जिसके दौरान इस धारा के अधीन कोर्इ कार्यवाही किसी न्यायालय के किसी आदेश या व्यादेश द्वारा रोक दी गर्इ है।

स्पष्टीकरण 2.–इस धारा में "कार्यवाही" शब्द से किसी वर्ष की बाबत कोर्इ कार्यवाही अभिप्रेत है, चाहे वह भारतीय आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) के अधीन हो या इस अधिनियम के अधीन, जो इस तारीख को लंबित हों और जिसके लिए इस धारा के अधीन तलाशी प्राधिकृत है या जो ऐसी तारीख को या उसके पहले पूरी कर ली गर्इ हो और इस अधिनियम के अधीन सभी ऐसी कार्यवाहियां इसके अंतर्गत हैं जो किसी वर्ष की बाबत ऐसी तारीख के बाद आरंभ की जाएं।

 

49. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1965 द्वारा 12.3.1965 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व धारा 132 वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी। संशोधन अधिनियम, 1965 की धारा 6 द्वारा निम्नलिखित स्वतंत्र उपबंध किया गया है :

"की गर्इ कुछ तलाशियों का विधिमान्यकरण–निरीक्षण सहायक आयुक्त या आय-कर अधिकारी द्वारा इस अधिनियम के प्रारंभ से पूर्व मूल अधिनियम की धारा 132 की उपधारा (1) के अनुसरण में की गर्इ तात्पर्यित किसी भवन या स्थान की कोर्इ तलाशी इस अधिनियम द्वारा यथा संशोधित उपधारा के उपबंधों के अनुसार ली गर्इ समझी जाएगी मानो वे उपबंध उस दिन प्रवृत्त थे जब तलाशी ली गर्इ थी और उसे किसी न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण के समक्ष केवल इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि–

(i) निरीक्षण सहायक आयुक्त या आय-कर अधिकारी ने किसी अन्य व्यक्ति की सहायता से ऐसी तलाशी ली थी; या

(ii) आय-कर अधिनियम, 1922 (1922 का 11) या मूल अधिनियम के अधीन कोर्इ कार्यवाही संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध उस समय लंबित नहीं थी जब उक्त उपधारा के अधीन तलाशी प्राधिकृत की गर्इ थी।"

50. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट। तलाशी लिए जाने वाले व्यक्ति के अधिकारों और कर्तव्यों के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

51. तलाशी और अभिग्रहण को प्राधिकृत करने के प्ररूप के लिए देखिये नियम 112(2)(क) और प्ररूप सं. 45.

52. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण निदेशक" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

53. यथोक्त द्वारा "आयुक्त" शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित।

54. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

55. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपनिदेशक" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "उप निदेशक" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण उप निदेशक" के स्थान पर रखा गया था।

56. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले "उपायुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक आयुक्त" के स्थान पर रखा गया था।

56क. "जानकारी" और "विश्वास करने का कारण", शब्दों/पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

57. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से "जो प्रकट नहीं की गर्इ है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

58. "अन्य मूल्यवान वस्तु या चीज" और "प्रकट नहीं की गर्इ है या प्रकट नहीं की जाएगी" शब्दों/पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

59. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से, "तो वह किसी निरीक्षण उप निदेशक, निरीक्षण सहायक आयुक्त, निरीक्षक सहायक निदेशक या आय-कर अधिकारी को (जिसे इसमें आगे प्राधिकृत अधिकारी कहा गया है) इस बात के लिए प्राधिकृत कर सकेगा कि वह–" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

60. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण निदेशक" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

61. यथोक्त द्वारा "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

62. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपनिदेशक" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "उप निदेशक" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण उप निदेशक" के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।

63. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले "उपायुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक आयुक्त" के स्थान पर रखा गया था।

64. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक निदेशक" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

65. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से अंत:स्थापित।

66. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 (वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा यथा संशोधित) द्वारा 1.4.1988 से "या आय-कर अधिकारी" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

67. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से "भवन या स्थान" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

68. "तलाशी" शब्द के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

69. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

70. "अधिगृहीत" और "ऐसी" शब्दों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

71. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित। तलाशी तथा अभिग्रहण के लिए प्राधिकृत करने के प्ररूप के लिए देखिये नियम 112(2)(ख) और प्ररूप सं. 45क.

72. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

73. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 [वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा यथा संशोधित] द्वारा 1.4.1988 से "121" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

74. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

75. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

76. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित। देखिये नियम 112(2)(ग) और प्ररूप सं. 45ख.

77. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

78. यथोक्त द्वारा "निरीक्षण निदेशक" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

79. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

80. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपनिदेशक" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "उप निदेशक" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण उप निदेशक" के स्थान पर रखा गया था।

81. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले "उपायुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक आयुक्त" के स्थान पर रखा गया था।

82. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

83. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 [वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा संशोधित] द्वारा 1.4.1988 से "121" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

84. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

85. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

86. "साध्य" और "कब्जा" शब्दों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

87. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

88. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अन्त:स्थापित।

89. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

90. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

91. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से, "जहां कोर्इ धन" से आरंभ होने वाले और "एक आदेश करेगा, जिसमें,–" से समाप्त होने वाले शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

92. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.7.1995 से अंत:स्थापित।

93. देखिये नियम 112क और 112ख।

94. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से "नब्बे" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

95. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.10.1998 से "उपायुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले "उपायुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "निरीक्षण सहायक आयुक्त" के स्थान पर रखा गया था।

96. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

97. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

98. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

99. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

1. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

2. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से "धारा 132क" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

4. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.10.1996 से "मुख्य आयुक्त या आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "मुख्य आयुक्त या आयुक्त" शब्द प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर रखे गए थे।

5. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

6. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.10.1991 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

7. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

8. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

8क. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से अंत:स्थापित।

9. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.10.1996 से भूतलक्षी रूप से "मुख्य आयुक्त या आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व "मुख्य आयुक्त या आयुक्त" प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया था।

10. "कोर्इ व्यक्ति" पद के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

11. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से, "ऐसे प्राधिकारी को, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित किया जाए जिसे इस धारा में इसके पश्चात् 'अधिसूचित प्राधिकारी' कहा गया है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

12. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

13. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से अंत:स्थापित।

*"निर्धारण अधिकारी" होना चाहिए।

14. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से "अधिसूचित प्राधिकारी" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

15. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से "आयुक्त" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

16. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से अंत:स्थापित।

17. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से प्रतिस्थापित।

18. देखिये नियम 112, 112क और 112ख.

19. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.10.1975 से "ऐसे भवन या स्थान" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

20. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "उपधारा (5) के प्रयोजनों के लिए एक सौ बीस दिन की अवधि" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले इसका संशोधन कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.10.1984 से किया गया था।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

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