आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 127

मामले अंतरित करने की शक्ति

धारा

धारा संख्या

127

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIII - आयकर प्राधिकरण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

मामले अंतरित करने की शक्ति

मामले अंतरित करने की शक्ति

मामले अंतरित करने की शक्ति

127. (1) प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, निर्धारिती को मामले में सुनवार्इ का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् जहां कहीं ऐसा करना संभव हो, और ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात् किसी मामले को अपने अधीनस्थ एक या अधिक निर्धारण अधिकारियों से (चाहे उन्हें समवर्ती अधिकारिता हो या नहीं) अपने ही अधीनस्थ किसी अन्य निर्धारण अधिकारी या निर्धारण अधिकारियों को (चाहे उन्हें समवर्ती अधिकारिता हो या नहीं) अंतरित कर सकेगा।

(2) जहां वह निर्धारण अधिकारी या वे निर्धारण अधिकारी जिनसे मामला अंतरित किया जाना है और वह निर्धारण अधिकारी या वे निर्धारण अधिकारी, जिन्हें मामला अंतरित किया जाना है, एक ही प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त के अधीन नहीं है, और,–

() जहां ऐसे प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, जिनके अधीन ऐसे निर्धारण अधिकारी हैं, सहमत हैं, वहां ऐसा प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, जिसकी अधिकारिता से मामला अंतरित किया जाना है, निर्धारिती को मामले में सुनवार्इ का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, जहां कहीं ऐसा करना संभव हो और ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात् आदेश पारित कर सकेगा;

() जहां पूर्वोक्त प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त सहमत नहीं है, वहां मामला अंतरित करने वाला आदेश, इसी प्रकार बोर्ड द्वारा या ऐसे किसी प्रधान महानिदेशक या महानिदेशक या प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा पारित किया जा सकेगा जिसे बोर्ड, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत करे।

(3) उपधारा (1) या उपधारा (2) की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह कोर्इ ऐसा अवसर उस दशा में देने की अपेक्षा करती है, जब अंतरण किसी निर्धारण अधिकारी या निर्धारण अधिकारियों से (चाहे उन्हें समवर्ती अधिकारिता हो या नहीं) किसी अन्य निर्धारण अधिकारी या निर्धारण अधिकारियों को (चाहे उन्हें समवर्ती अधिकारिता हो या नहीं) किया जाता है और ऐसे सभी अधिकारियों के कार्यालय उसी नगर, परिक्षेत्र या स्थान में स्थित है।

(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन किसी मामले का अंतरण कार्यवाहियों के किसी भी प्रक्रम पर किया जा सकेगा और ऐसी सूचना का पुन: जारी किया जाना आवश्यक नहीं बनाएगा जो उस निर्धारण अधिकारी या उन निर्धारण अधिकारियों द्वारा जिनसे मामला अन्तरित किया जाता है पहले ही जारी की जा चुकी है।

स्पष्टीकरण–धारा 120 में और इस धारा में किसी ऐसे व्यक्ति के संबंध में जिसका नाम तद्धीन जारी किए गए किसी आदेश या निदेश में विनिर्दिष्ट है, ''मामला'' शब्द से किसी वर्ष की बाबत इस अधिनियम के अधीन ऐसी सभी कार्यवाहियां अभिप्रेत हैं, जो ऐसे आदेश या निर्देश की तारीख को लम्बित हैं अथवा ऐसी तारीख को या उसके पूर्व पूरी हो गर्इ हैं, और उनके अंतर्गत इस अधिनियम के अधीन ऐसी सभी कार्यवाहियां भी हैं जो किसी वर्ष की बाबत ऐसे आदेश या निर्देश की तारीख के पश्चात् प्रारंभ की जाएं।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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