अनुकल्पी न्यूनतम कर के लिए कर प्रत्यय
अनुकल्पी न्यूनतम कर के लिए कर प्रत्यय
115ञघ. (1) धारा 115ञग के अधीन किसी व्यक्ति द्वारा संदत्त कर प्रत्यय उसको इस धारा के उपबंधों के अनुसार अनुज्ञात किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात किया जाने वाला किसी निर्धारण वर्ष का कर प्रत्यय उस वर्ष के लिए संदेय नियमित आय-कर पर संदत्त अनुकल्पी न्यूनतम कर का आधिक्य होगा ।
41[परंतु जहां संदत्त अनुकल्पी न्यूनतम कर के प्रति अनुज्ञात कर प्रत्यय की रकम, किसी देश या भारत के बाहर विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में धारा 90 या धारा 90क या धारा 91 के अधीन संदत्त आय-कर के संबंध में, निर्धारिती द्वारा संदेय नियमित आय-कर के प्रति अनुज्ञेय कर प्रत्यय की रकम से अधिक है, वहां इस उपधारा के अधीन प्रत्यय की रकम की संगणना करते समय ऐसी अधिक रकम पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।]
(3) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कर प्रत्यय पर कोई ब्याज संदेय नहीं होगा ।
(4) उपधारा (2) के अधीन अवधारित कर प्रत्यय की रकम को उपधारा (5) और उपधारा (6) के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत और मुजरा किया जाएगा, किंतु ऐसा अग्रनयन उस निर्धारण वर्ष के, जिसके लिए कर प्रत्यय उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञेय हो जाता है, ठीक उत्तरवर्ती 42[पंद्रहवें] निर्धारण वर्ष से परे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।
(5) किसी ऐसे निर्धारण वर्ष में, जिसमें नियमित आय-कर अनुकल्पी न्यूनतम कर से अधिक हो जाता है, कर प्रत्यय को अनुकल्पी न्यूनतम कर पर नियमित आय-कर के आधिक्य की सीमा तक मुजरा किया जाना अनुज्ञात किया जाएगा और कर प्रत्यय के अतिशेष को, यदि कोई हो, अग्रनीत किया जाएगा ।
(6) यदि इस अधिनियम के अधीन पारित किसी आदेश के परिणामस्वरूप, किसी नियमित आय-कर या अनुकल्पी न्यूनतम कर की रकम घटाई या बढ़ाई जाती है, तो इस धारा के अधीन अनुज्ञात कर प्रत्यय की रकम को भी तदनुसार परिवर्तित किया जाएगा ।
वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से धारा 115ञघ की उपधारा (6) के पश्चात् उपधारा (7) अंत:स्थापित की जाएगी
(7 ) इस धारा के उपबंध ऐसे किसी व्यक्ति को लागू नहीं होंगे, जिसने धारा 115खकग या धारा 115खकघ के अधीन विकल्प का प्रयोग किया है।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

