आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115ञघ

अनुकल्पी न्यूनतम कर के लिए कर प्रत्यय

धारा

धारा संख्या

115ञघ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIखक - कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों के संबंध में विशेष उपबंध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2016

अनुकल्पी न्यूनतम कर के लिए कर प्रत्यय

अनुकल्पी न्यूनतम कर के लिए कर प्रत्यय

अनुकल्पी न्यूनतम कर के लिए कर प्रत्यय

115ञघ. (1) धारा 115ञग के अधीन 45घघ[किसी व्यक्ति द्वारा] संदत्त कर प्रत्यय उसको इस धारा के उपबंधों के अनुसार अनुज्ञात किया जाएगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात किया जाने वाला किसी निर्धारण वर्ष का कर प्रत्यय उस वर्ष के लिए संदेय नियमित आय-कर पर संदत्त अनुकल्पी न्यूनतम कर का आधिक्य होगा ।

(3) उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञात कर प्रत्यय पर कोई ब्याज संदेय नहीं होगा ।

(4) उपधारा (2) के अधीन अवधारित कर प्रत्यय की रकम को उपधारा (5) और उपधारा (6) के उपबंधों के अनुसार अग्रनीत और मुजरा किया जाएगा, किंतु ऐसा अग्रनयन उस निर्धारण वर्ष के, जिसके लिए कर प्रत्यय उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञेय हो जाता है, ठीक उत्तरवर्ती दसवें निर्धारण वर्ष से परे अनुज्ञात नहीं किया जाएगा ।

(5) किसी ऐसे निर्धारण वर्ष में, जिसमें नियमित आय-कर अनुकल्पी न्यूनतम कर से अधिक हो जाता है, कर प्रत्यय को अनुकल्पी न्यूनतम कर पर नियमित आय-कर के आधिक्य की सीमा तक मुजरा किया जाना अनुज्ञात किया जाएगा और कर प्रत्यय के अतिशेष को, यदि कोई हो, अग्रनीत किया जाएगा ।

(6) यदि इस अधिनियम के अधीन पारित किसी आदेश के परिणामस्वरूप,किसी नियमित आय-कर या अनुकल्पी न्यूनतम कर की रकम घटाई या बढ़ाई जाती है, तो इस धारा के अधीन अनुज्ञात कर प्रत्यय की रकम को भी तदनुसार परिवर्तित किया जाएगा ।

 

45घघ. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013से "किसी सीमित दायित्व भागीदारी द्वारा" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

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