आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115ञग

कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों द्वारा कर के संदाय के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

115ञग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIखक - कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों के संबंध में विशेष उपबंध

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2017

कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों द्वारा कर के संदाय के लिए विशेष उपबंध

कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों द्वारा कर के संदाय के लिए विशेष उपबंध

45ख[अध्याय 12खक

45ग[कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों] के संबंध में विशेष उपबंध

45गक[कंपनी से भिन्न कतिपय व्यक्तियों द्वारा कर के संदाय के लिए विशेष उपबंध

115ञग. (1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां कंपनी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा किसी पूर्ववर्ष के लिए संदेय नियमित आय-कर, उस पूर्ववर्ष के लिए संदेय अनुकल्पी न्यूनतम कर से कम है, वहां समायोजित कुल आय को उस पूर्ववर्ष के लिए उस व्यक्ति की कुल आय समझा जाएगा और वह ऐसी कुल आय पर साढ़े अठारह प्रतिशत की दर से आय-कर का संदाय करने के लिए दायी होगा।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट समायोजित कुल आय, इस अध्याय को प्रभावी रूप देने के पूर्व,-

(i) "ग.-कतिपय आय की बाबत कटौतियां" शीर्ष के अधीन अध्याय 6क में सम्मिलित किसी धारा के अधीन (धारा 80त से भिन्न) दावा की गर्इ कटौतियों से, यदि कोर्इ हों; 45गख[***]

(ii) धारा 10कक के अधीन दावा की गर्इ कटौतियों से, यदि कोर्इ हों; 45गग[और]

45घ[(iii) धारा 35कघ के अधीन दावा की गर्इ कटौती से, यदि कोर्इ हो, जो धारा 32 के उपबंधों के अनुसार अनुज्ञेय अवक्षयण की रकम को घटा कर आए मानो कि धारा 35कघ के अधीन ऐसी आस्तियों की बाबत, जिन पर उस धारा के अधीन कटौती का दावा किया जाता है, कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की गर्इ हो;]

बढ़ाकर आय कुल आय होगी।

(3) प्रत्येक ऐसा व्यक्ति, जिसको यह धारा लागू होती है, किसी लेखाकार से यह प्रमाणित करते हुए कि समायोजित कुल आय और अनुकल्पी न्यूनतम कर की संगणना इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार की गर्इ है, एक रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, अभिप्राप्त करेगा और धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख को या उससे पूर्व ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।]

 

45ख. वित्त अधिनियम, 2011 द्वारा 1.4.2012 से अध्याय 12खक, जिसमें धारा 115ञग से 115ञच है अंत:स्थापित।

45ग. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से "कतिपय सीमित दायित्व भागीदारियों" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

45गक. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 115ञग इस प्रकार थी :

"115ञग. कतिपय सीमित दायित्व भागीदारियों द्वारा कर के संदाय के संबंध में विशेष उपबंध-(1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी सीमित दायित्व भागीदारी द्वारा किसी पूर्ववर्ष के लिए संदेय नियमित आय-कर ऐसे पूर्ववर्ष के लिए संदेय अनुकल्पी न्यूनतम कर से कम है, वहां ऐसी समायोजित कुल आय को उस पूर्ववर्ष के लिए सीमित दायित्व भागीदारी की कुल आय समझा जाएगा और वह ऐसी कुल आय पर साढ़े अठारह प्रतिशत की दर से आय-कर का संदाय करने के लिए दायी होगी ।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट समायोजित कुल आय, इस अध्याय को प्रभावी रूप देने से पूर्व,-

(i) अध्याय 6क में सम्मिलित किसी धारा के अधीन "ग-कतिपय आय की बाबत कटौतियां" शीर्ष के अधीन दावा की गई कटौतियों से, यदि कोई हों ; और

(ii) धारा 10कक के अधीन, दावा की गई कटौती से, यदि कोई हो,

बढ़ाकर आई कुल आय होगी ।

(3) ऐसी प्रत्येक सीमित दायित्व भागीदारी, जिसको यह धारा लागू होती है, किसी लेखाकार से जिसमें वह यह प्रमाणित करे कि समायोजित कुल आय और अनुकल्पी न्यूनतम कर की संगणना इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार की गई है, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, एक रिपोर्ट अभिप्राप्त करेगी और उस रिपोर्ट को धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विवरणी फाइल करने की नियत तारीख को या उससे पूर्व प्रस्तुत करेगी ।"

45गख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.4.2015 से "और" शब्द का लोप किया गया।

45गग. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.4.2015 से "और" शब्द अंत:स्थापित।

45घ. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा 1.4.2015 में अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

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