कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध
कुछ कंपनियों द्वारा कर संदाय के लिए विशेष उपबंध
115ञख. (1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहां किसी निर्धारिती की दशा में जो कंपनी है 1 अप्रैल, 2012 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष की बाबत इस अधिनियम के अधीन संगणित कुल आय पर संदेय आय-कर उसके बही लाभ के साढे अठारह प्रतिशत से कम है, वहां ऐसा बही लाभ निर्धारिती की कुल आय माना जाएगा और ऐसी कुल आय पर निर्धारिती द्वारा संदेय कर साढे अठारह प्रतिशत की दर से आय कर की राशि होगा।
19कक[परन्तु 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष के लिए इस उपधारा के उपबंधों का ऐसे प्रभाव होगा मानो दोनों स्थानों पर आने वाले "साढ़े अठारह प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "पन्द्रह प्रतिशत" शब्द प्रतिस्थापित कर दिए गए थे ]
(2) प्रत्येक निर्धारिती,–
(क) जो खंड (ख) में निर्दिष्ट कंपनी से भिन्न कोई कंपनी है, इस धारा के प्रयोजनों के लिए 20[कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18)] की 21[अनुसूची 3] के उपबंधों के अनुसार सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए अपना 22[लाभ और हानि विवरण] तैयार करेगा; या
(ख) जो ऐसी कंपनी है, जिसको 20[कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18)] की 23[धारा 129 की उपधारा (1) का दूसरा परंतुक] लागू होता है, इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसी कंपनी को शासित करने वाले अधिनियम के उपबंधों के अनुसार सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए अपना 22[लाभ और हानि विवरण] तैयार करेगा :
परन्तु 22[लाभ और हानि विवरण] सहित वार्षिक लेखा तैयार करते समय,–
(i) लेखाकर्म नीतियां;
(ii) 22[लाभ और हानि विवरण] तैयार करने के लिए अपनाए जाने वाले लेखा मानक;
(iii) अवक्षयण की संगणना के लिए अपनाई गई पद्धति और दरें,
वही होंगी जिन्हें 24[कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18)] की 25[धारा 129] के उपबंधों के अनुसार ऐसे लेखे, जिनके अंतर्गत 25[लाभ और हानि विवरण] भी है, तैयार करने के प्रयोजनों के लिए अंगीकार किया गया है, और उन्हें कंपनी के समक्ष उसके वार्षिक अधिवेशन में रखा जाएगा :
परन्तु यह और कि जहां किसी कंपनी ने 24[कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18)] के अधीन वित्तीय वर्ष को अंगीकार किया है या वह अंगीकार करती है जो इस अधिनियम के अधीन पूर्ववर्ष से भिन्न है, वहां–
(i) लेखाकर्म नीतियां;
(ii) ऐसे लेखा, जिसके अंतर्गत 25[लाभ और हानि विवरण] भी है लेखा तैयार करने के लिए अपनाए गए लेखा-मानक;
(iii) अवक्षयण के परिकलन के लिए अपनाई गई रीति और दरें,
उन लेखाकर्म नीतियों, लेखाकर्म मानकों और अवक्षयण के परिकलन की रीति और दरों के अनुरूप होंगी, जिन्हें सुसंगत पूर्ववर्ष के अंतर्गत आने वाले ऐसे वित्तीय वर्ष या वित्तीय वर्ष के भाग के लिए ऐसे लेखे, जिसके अंतर्गत 25[लाभ और हानि विवरण] भी है; तैयार करने के लिए अंगीकार किया गया है।
स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ''बही लाभ'' से अभिप्रेत है, उपधारा (2) के अधीन तैयार किए गए सुसंगत पूर्ववर्ष के लिये 26[लाभ और हानि का विवरण] में दिखाया गया 27[लाभ] जिसमें निम्नलिखित जोड़ दिए गए हैं–
(क) संदत्त या संदेय आय-कर की रकम और उसके लिए व्यवस्था; या
(ख) किन्हीं आरक्षितियों में ले जाई गई रकमें, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों जो धारा 33कग के अधीन विनिर्दिष्ट किसी आरक्षिती से भिन्न हो; या
(ग) अभिनिश्चित दायित्वों से भिन्न दायित्वों को चुकाने के लिए व्यवस्था के रूप में अलग रखी गई रकम या रकमें; या
(घ) समनुषंगी कंपनियों की हानियों के लिए व्यवस्था के रूप में रकम; या
(ड़) संदत्त या प्रस्तावित लाभांश की रकम या रकमें; या
(च) किसी ऐसी आय से, जिसको धारा 10 (उसके खंड (38) में अंतर्विष्ट उपबंधों को छोड़कर) या धारा 11 या धारा 12 लागू होती हो, संबंधित व्यय की रकम या रकमें; या
(चक) किसी ऐसी आय, जो व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय की आय में निर्धारिती का ऐसा हिस्सा हो, जिस पर धारा 86 के उपबंधों के अनुसार कोई आय-कर संदेय नहीं है, से संबंधित व्यय की रकम या रकमें;
(चख) किसी निर्धारिती को, जो कोई विदेशी कंपनी है, –
(अ) प्रतिभूतियों में से संव्यवहारों पर उद्भूत पूंजी अभिलाभों से;
(आ) तकनीकी सेवाओं के लिए अध्याय 12 में विनिर्दिष्ट दर या दरों पर कर से 26क[प्रभार्य ब्याज, लाभांश, स्वामित्त्व] या फीस से,
प्रोद्भूत या उद्भूत आय से संबंधित व्यय की रकम या रकमें,
यदि इस अधिनियम के, इस अध्याय के उपबंधों से भिन्न, उपबंधों के अनुसार उस पर संदेय आय-कर उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दर से कम दर पर है; या
(चग) ऐसी किसी पूंजी आस्ति के, जो विशेष प्रयोजन एकक का शेयर है, किसी कारबार न्यास को धारा 47 के खंड (xvii) में निर्दिष्ट उस न्यास द्वारा आबंटित यूनिटों के बदले, अंतरण पर काल्पनिक हानि को दर्शाने वाली रकम या उक्त यूनिटों की धारित रकम में किसी परिवर्तन के परिणामस्वरूप काल्पनिक हानि को दर्शाने वाली रकम या धारा 47 के खंड (xvii) में निर्दिष्ट यूनिटों के अंतरण पर हानि की रकम; या
(चघ) धारा 115खखच के अधीन कर से प्रभार्य पेटेंट के संबंध में राजस्व के माध्यम से आय से संबंधित व्यय की रकम; या
(छ) अवक्षयण की रकम;
(ज) आस्थगित कर की रकम और उसके लिए व्यवस्था
(झ) किसी आस्ति के मूल्य में कमी के लिए व्यवस्था किए जाने के रूप में अलग रखी गई रकम या रकमें,
(ञ) ऐसी आस्ति के पूर्व भुगतान या व्ययन पर पुनर्मूल्यांकित आस्ति के संबंध में पुनर्मूल्यांकन आरक्षिति में जमा रकम,
(ट) धारा 47 के खंड (xvii) में निर्दिष्ट यूनिटों के अंतरण पर, उक्त खंड में निर्दिष्ट यूनिटों के साथ बदले गए शेयरों की लागत को या शेयरों की, उनके बदले जाने के समय, जहां कि ऐसे शेयर लागत से भिन्न ऐसे मूल्य पर, यथास्थिति, 28[लाभ और हानि का विवरण] के माध्यम से धारित किए जाते हैं, धारित रकम को हिसाब में लेते हुए संगणित अभिलाभ की रकम;
यदि खंड (क) से खंड (झ) में निर्दिष्ट कोई रकम 29[लाभ और हानि का विवरण] में विकलित की जाती है या यदि खंड (ञ) में निर्दिष्ट कोई रकम 29[लाभ और हानि का विवरण] में जमा नहीं की जाती है और उसमें से निम्नलिखित रकम घटा दी जाती है,
(i) किसी आरक्षिती या व्यवस्था में से वापस ली गई रकम (29[लाभ और हानि का विवरण] में डेबिट रूप से भिन्न रूप में, 1 अप्रैल, 1997 से पूर्व सृजित किसी आरक्षिती को छोड़कर) यदि ऐसी कोई रकम 29[लाभ और हानि का विवरण] में जमा की जाती है :
परंतु जहां यह धारा किसी पूर्ववर्ष में किसी निर्धारिती को लागू होती है वहां 1 अप्रैल, 1997 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में सृजित आरक्षितियों में से या की गई व्यवस्थाओं में से वापस ली गई रकम को बही लाभ में से तभी घटाया जाएगा जब उन आरक्षितियों या व्यवस्थाओं को (जिनमें से उक्त रकम वापस ली गई थी), यथास्थिति, इस स्पष्टीकरण या धारा 115ञक के दूसरे परंतुक के नीचे के स्पष्टीकरण के अधीन ऐसे वर्ष के बही लाभ में जोड़ा गया हो; या
(ii) ऐसी आय की रकम, जिसको धारा 10 (उसके खंड (38) में अंतर्विष्ट उपबंधों को छोड़कर) या धारा 11 या धारा 12 के कोई उपबंध लागू होते हैं, यदि ऐसी रकम 30[लाभ और हानि का विवरण] में जमा की जाती है; या
(iiक) 30[लाभ और हानि का विवरण] में डेबिट किए गए अवक्षयण की रकम (आस्तियों के पुनर्मूल्यांकन के मद्दे अवक्षयण को छोड़कर); या
(iiख) पुनर्मूल्यांकन आरक्षिती से निकाली गई और 30[लाभ और हानि का विवरण] में जमा की गई रकम, उस लेखा में जमा की गई रकम, उस सीमा तक जहां तक वह खंड (iiक) में निर्दिष्ट आस्तियों के पुनर्मूल्यांकन के मद्दे अवक्षयण की रकम से अधिक नहीं होती है; या
(iiग) आय की ऐसी रकम, जो व्यक्तियों के संगम या व्यष्टियों के निकाय की आय में निर्धारिती का हिस्सा है, जिस पर धारा 86 के उपबंधों के अनुसार कोई आय-कर संदेय नहीं है, यदि ऐसी कोई रकम 30[लाभ और हानि का विवरण] में जमा की जाती है; या
(iiघ) किसी निर्धारिती को, जो कोई विदेशी कंपनी है,-
(अ) प्रतिभूतियों में के संव्यवहारों पर उद्भूत पूंजी अभिलाभों से; या
(आ) तकनीकी सेवाओं के लिए अध्याय 12 में विनिर्दिष्ट दर या दरों पर कर से 30क[प्रभार्य ब्याज, लाभांश, स्वामिस्व] या फीस से, प्रोद्भूत या उद्भूत आय की रकम,
यदि ऐसी आय को 30[लाभ और हानि का विवरण] में जमा किया जाता है और इस अधिनियम के, इस अध्याय के उपबंधों से भिन्न, उपबंधों के अनुसार उस पर संदेय आय-कर उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दर से कम दर पर है; या
(iiड़) (अ) किसी पूंजी आस्ति के, जो विशेष प्रयोजन एकक का शेयर है, किसी कारबार न्यास को, धारा 47 के खंड (xvii) में निर्दिष्ट उस न्यास द्वारा आबंटित यूनिटों के बदले अंतरण पर काल्पनिक अभिलाभ को;
(आ) उक्त यूनिटों की धारित रकम में किसी परिवर्तन के परिणामस्वरूप काल्पनिक अभिलाभ को;
(इ) धारा 47 के खंड (xvii) में निर्दिष्ट यूनिटों के अंतरण पर अभिलाभ को;
यदि कोई हो, दर्शाने वाली रकम, जिसे 31[लाभ और हानि का विवरण] में जमा किया गया हो; या
(iiच) धारा 47 के खंड (xvii) में निर्दिष्ट यूनिटों के अंतरण पर, उक्त खंड में निर्दिष्ट यूनिटों के साथ बदले गए शेयरों की लागत को या शेयरों को, उनके बदले जाने के समय, जहां कि ऐसे शेयर लागत से भिन्न मूल्य पर, यथास्थिति 32[लाभ और हानि का विवरण] के माध्यम से धारित किए जाते हैं, धारित रकम को हिसाब में लेकर संगणित हानि की रकम; या
(iiछ) धारा 115खखच के अधीन कर से प्रभार्य पेटेंट के संबंध में राजस्व के माध्यम से आय की रकम; या
33[(iiज) निम्नलिखित की दशा में शेष अवक्षयण और हानि की अग्रनीत की गई सकल रकम,–
(अ) कंपनी और उसकी समनुषंगी और ऐसी समनुषंगी की समनुषंगी, जहां अधिकरण ने केंद्रीय सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 241 के अधीन किए गए आवेदन पर ऐसी कंपनी के निदेशक बोर्ड को निलंबित कर दिया है और नए निदेशकों को नियुक्त किया है, जिन्हें केंद्रीय सरकार द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 242 के अधीन नामनिर्दिष्ट किया गया है;
(आ) कंपनी, जिसके विरुद्ध दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 7 या धारा 9 या धारा 10 के अधीन न्यायनिर्णायक प्राधिकारी द्वारा निगम दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए आवेदन को ग्रहण कर लिया गया है।
स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "न्यायनिर्णायक प्राधिकारी" का वही अर्थ होगा, जो दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 5 के खंड (1) में उसका है;
(ii) "अधिकरण" का वही अर्थ होगा, जो कंपनी अधिनियम, 2013(2013 का 18) की धारा 2 के खंड (90) में उसका है;
(iii) कोई कंपनी, किसी अन्य कंपनी की समनुषंगी उस समय होगी, यदि ऐसी अन्य कंपनी, उस कंपनी की साम्या शेयर पूंजी के अंकित मूल्य के आधे से अधिक को धारण करती है;
(iv) "हानि" में अवक्षयण सम्मिलित नहीं होगा; या]
(iii) अग्रनीत की गई हानि या शेष अवक्षयण की राशि, 34[खंड (iiज) में निर्दिष्ट कंपनी से भिन्न कंपनी की दशा में] लेखा बहियों के अनुसार इनमें से जो भी कम हो;
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए–
(क) हानि के अंतर्गत अवक्षयण नहीं आएगा;
(ख) इस खंड के उपबंध तब लागू नहीं होंगे यदि अग्रनीत की गई हानि या शेष अवक्षयण की राशि शून्य हो; या
(iv) से (vi) [***]
(vii) रुग्ण औद्योगिक कंपनी के, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उक्त कंपनी, रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 17 की उपधारा (1) के अधीन रुग्ण औद्योगिक कंपनी हो गई है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ही आरंभ होने वाले और उस निर्धारण वर्ष को, जिसके दौरान ऐसी कंपनी का समस्त शुद्ध मूल्य संचित हानियों के बराबर या उनसे अधिक हो जाता है, समाप्त होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए लाभ की रकम।
स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''शुद्ध मूल्य'' का वही अर्थ है जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक) में है;
(viii) आस्थगित कर की रकम, यदि ऐसी कोई रकम 35[लाभ और हानि का विवरण] में क्रेडिट की गई हो।
स्पष्टीकरण 2.–स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, आय-कर की रकम में निम्नलिखित सम्मिलित होगा–
(i) धारा 115ण के अधीन वितरित लाभों या धारा 115द के अधीन वितरित आय पर कोई कर ;
(ii) इस अधिनियम के अधीन प्रभारित कोई ब्याज ;
(iii) केंद्रीय अधिनियमों द्वारा समय-समय पर यथा उद्गृहीत अधिभार, यदि कोई हो ;
(iv) केंद्रीय अधिनियमों द्वारा समय-समय पर आय-कर पर यथा उद्गृहीत शिक्षा उपकर, यदि कोई हो ; और
(v) केंद्रीय अधिनियमों द्वारा समय-समय पर आय-कर पर यथा उद्गृहीत सेकेंडरी और उच्चतर शिक्षा उपकर, यदि कोई हो।
स्पष्टीकरण 3.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि इस धारा के प्रयोजनों के लिए, निर्धारिती के पास, जो ऐसी कोई कंपनी है जिसे 36[कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 129 की उपधारा (1) का दूसरा परंतुक] लागू होता है, 1 अप्रैल, 2012 को या उससे पूर्व आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए या तो 37[कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की अनुसूची 3] के उपबंधों के अनुसार या ऐसी कंपनी को शासित करने वाले अधिनियम के उपबंधों के अनुसार सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए अपना 38[लाभ और हानि का विवरण] तैयार करने का विकल्प है।
स्पष्टीकरण 4.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि इस धारा के उपबंध किसी निर्धारिती को, जो कोई विदेशी कंपनी है, लागू नहीं होंगे और कभी भी लागू हुए नहीं समझे जाएंगे, यदि–
(i) निर्धारिती किसी ऐसे देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र का निवासी है, जिसके साथ भारत ने धारा 90 की उपधारा (1) के अधीन करार किया हुआ है या केंद्रीय सरकार ने धारा 90क की उपधारा (1) के अधीन किसी करार को अंगीकार किया है और निर्धारिती के पास ऐसे करार के उपबंध के अनुसरण में भारत में कोई स्थायी स्थापन नहीं है; या
(ii) निर्धारिती किसी ऐसे देश का निवासी है, जिसके साथ भारत ने खंड (i) में निर्दिष्ट प्रकृति का कोई करार नहीं किया है और निर्धारिती से तत्समय प्रवृत्त कंपनियों से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकरण की ईप्सा करना अपेक्षित नहीं है।
39[स्पष्टीकरण 4क.–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस धारा के उपबंध किसी निर्धारिती को, जो विदेशी कंपनी है, वहां लागू नहीं होंगे और कभी भी लागू हुए नहीं समझे जाएंगे, जहां उसके कुल आय केवल धारा 44ख या धारा 44खख या धारा 44खखक या धारा 44खखख में निर्दिष्ट कारबार के लाभों और अभिलाभों से है और ऐसी आय का उन धाराओं में विनिर्दिष्ट कर की दरों के लिए प्रस्ताव किया गया है।]
स्पष्टीकरण 5.–उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, ''प्रतिभूति'' पद का वही अर्थ होगा जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (ग) में उसका है।
40[(2क) किसी कंपनी के, जिसके वित्तीय विवरणों को कंपनी (भारतीय लेखांकन मानक) नियम, 2015 के उपाबंध में विनिर्दिष्ट भारतीय लेखांकन मानकों का अनुपालन करते हुए तैयार किया गया है, उपधारा (2) के स्पष्टीकरण 1 के अनुसार यथा संगणित बही-लाभ,–
(क) को ऐसी सभी रकमों द्वारा और बढ़ा दिया जाएगा, जो 'मदें, जो लाभ या हानि के रूप में पुन:वर्गीकृत नहीं की जाएंगी' शीर्ष के अधीन लाभ और हानि विवरण में अन्य समग्र आय में जमा की जाती हैं;
(ख) में से ऐसी सभी रकमों को और घटा दिया जाएगा, जो 'मदें, जो लाभ या हानि के रूप में पुन:वर्गीकृत नहीं की जाएंगी' शीर्ष के अधीन लाभ और हानि विवरण में अन्य समग्र आय में से विकलित की जाती हैं;
(ग) को ऐसी रकमों या कुल रकमों द्वारा और बढ़ा दिया जाएगा, जो भारतीय लेखांकन मानक 10 के परिशिष्ट 'क' के अनुसार किसी निर्विलयन में शेयर धारकों को गैर-नकद आस्तियों के वितरण पर लाभ और हानि विवरण में से विकलित की जाती हैं;
(घ) में से ऐसी रकमों या कुल रकमों को और घटा दिया जाएगा, जो भारतीय लेखांकन मानक 10 के परिशिष्ट 'क' के अनुसार किसी निर्विलयन में शेयर धारकों को गैर-नकद आस्तियों के वितरण पर लाभ और हानि विवरण में जमा की जाती हैं:
परंतु खंड (क) या खंड (ख) में अंतर्विष्ट कोई बात, निम्नलिखित के संबंध में, 'मदें, जो लाभ या हानि के रूप में पुन:वर्गीकृत नहीं की जाएंगी' शीर्ष के अधीन अन्य समग्र आय में जमा या उससे विकलित की गई रकम को लागू नहीं होगी,–
(i) भारतीय लेखांकन मानक 16 और भारतीय लेखांकन मानक 38 के अनुसार आस्तियों के लिए पुनर्मूल्यांकन अधिशेष; या
(ii) भारतीय लेखांकन मानक 109 के अनुसार अन्य समग्र आय के माध्यम से उचित मूल्य पर अभिहित साम्या लिखतों में विनिधानों से अभिलाभ या हानियां:
परंतु यह और कि उस पूर्ववर्ष के, जिसमें पहले परंतुक में निर्दिष्ट आस्ति या विनिधान की निवृत्ति, व्ययन, वसूली या उसे अन्यथा अंतरित किया गया है, बही-लाभ को पूर्ववर्ष के लिए या उससे पूर्ववर्ती पूर्ववर्षों के लिए, जो ऐसी आस्ति या विनिधान से संबंधित हैं, निर्दिष्ट रकमों द्वारा, यथास्थिति, बढ़ा दिया जाएगा या उसमें से उन रकमों को घटा दिया जाएगा।
(2ख) किसी परिणामी कंपनी की दशा में, जहां उसके द्वारा प्राप्त की जाने वाली उद्यम या उद्यमों की संपत्ति और दायित्वों को उन मूल्यों से, जो निर्विलयन से तुरंत पूर्व निर्विलीन कंपनी की लेखा-बहियों में उपदर्शित मूल्यों से भिन्न मूल्यों पर अभिलिखित किया जाता है, वहां ऐसे मूल्य में परिवर्तन पर, इस धारा के अधीन परिणामी कंपनी के बही-लाभ की संगणना के प्रयोजन के लिए ध्यान नहीं दिया जाएगा।
(2ग) उपधारा (2क) में निर्दिष्ट किसी कंपनी के लिए, अभिसरण के वर्ष के और चार पूर्ववर्ती वर्षों में से प्रत्येक के आगामी वर्ष के बही-लाभ को, यथास्थिति, संक्रमण रकम के पांचवें भाग द्वारा आगे और बढ़ाया जाएगा या उस रकम को उसमें से घटाया जाएगा:
परंतु उस पूर्ववर्ष के, जिसमें स्पष्टीकरण के खंड (iii) के उपखंड (ख) से उपखंड (ड़) में निर्दिष्ट आस्ति या विनिधान की निवृत्ति, व्ययन, वसूली या उसे अन्यथा अंतरित किया गया है, बही-लाभ को ऐसी आस्ति या विनिधान से संबंध रखने वाले उक्त उपखंड में निर्दिष्ट रकम या कुल रकमों द्वारा, यथास्थिति, बढ़ा दिया जाएगा या उसमें से उन रकमों को घटा दिया जाएगा:
परंतु यह और कि उस पूर्ववर्ष के, जिसमें स्पष्टीकरण के उपखंड (iii) के उपखंड (च) में निर्दिष्ट विदेशी प्रचालन का व्ययन या उसका अन्यथा अंतरण किया गया है, बही-लाभ को ऐसे विदेशी प्रचालनों से संबंध रखने वाले उक्त उपखंड में निर्दिष्ट रकम या कुल रकमों द्वारा, यथास्थिति, बढ़ा दिया जाएगा या उसमें से उन रकमों को घटा दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, पद–
(i) "अभिसरण का वर्ष" से वह पूर्ववर्ष अभिप्रेत है जिसमें अभिसरण तारीख आती है;
(ii) "अभिसरण तारीख" से भारतीय लेखांकन मानक 101 में यथा परिभाषित प्रथम भारतीय लेखांकन मानक रिर्पोंटग अवधि का प्रथम दिवस अभिप्रेत है;
(iii) "संक्रमण रकम" से ऐसी रकम या कुल रकमें अभिप्रेत हैं, जिन्हें अभिसरण की तारीख को अन्य साम्या (पूंजी आरक्षिति और प्रतिभूति, प्रीमियम आरक्षिती को छोड़कर) में समायोजित किया गया है, किन्तु इनके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं है:–
(अ) अभिसरण की तारीख को अन्य समग्र आय में समायोजित रकम या कुल रकमें, जिन्हें तत्पश्चात् लाभ या हानि में पुन:वर्गीकृत किया जाएगा;
(आ) भारतीय लेखांकन मानक 16 और भारतीय लेखांकन मानक 38 के अनुसार आस्तियों के लिए पुनर्मूल्यांकन अधिशेष, जिसे अभिसरण की तारीख को समायोजित किया गया है;
(इ) भारतीय लेखांकन मानक 109 के अनुसार अन्य समग्र आय के माध्यम से उचित मूल्य पर अभिहित साम्या लिखतों में विनिधानों से लाभ या हानियां, जिसे अभिसरण की तारीख को समायोजित किया गया है;
(ई) अभिसरण की तारीख को भारतीय लेखांकन मानक 101 के पैरा घ5 और घ7 के अनुसार समझी गई लागत के रूप में उचित मूल्य पर लेखबद्ध संपत्ति, संयंत्र और उपस्कर तथा अमूर्त आस्तियों की मदों से संबंधित समायोजन;
(उ) अभिसरण की तारीख को भारतीय लेखांकन मानक 101 के पैरा घ 15 के अनुसार समझी गई लागत के रूप में उचित मूल्य पर लेखबद्ध समनुषंगियों, संयुक्त उद्यमों और सहयुक्तों में विनिधानों से संबंधित समायोजन;
(ऊ) अभिसरण की तारीख को भारतीय लेखांकन मानक 101 के पैरा घ 13 के अनुसार किसी विदेशी प्रचालन में संचयी संपरिवर्तन अंतर से संबंधित समायोजन।]
40क[(2घ) किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो कोई कंपनी है और जहां निर्धारिती द्वारा धारा 92गग के अधीन किए गए किसी अग्रिम कीमत निर्धारण करार के मद्दे या धारा 92गड़ के अधीन किए जाने के लिए अपेक्षित द्वितीय समायोजन के मद्दे बही लाभ में किसी पूर्व वर्ष या बही लाभ में सम्मिलित वर्षों की आय के कारण पूर्व वर्ष में कोई वृद्धि हुई है, वहां निर्धारण अधिकारी उसे निर्धारिती द्वारा इस निमित्त् किए गए आवेदन पर पूर्व वर्ष या वर्षों के बही लाभ और निर्धारिती द्वारा उपधारा (1) के अधीन पूर्व वर्ष के दौरान संदेय कर, यदि कोई हो, की पुन: संगणना ऐसी रीति में करेगा, जिसे विहित किया जाए और धारा 154 के उपबंध यथा शक्य रूप से लागू होंगे तथा उस धारा की उपधारा (7) में विनिर्दिष्ट चार वर्ष की अवधि को उस वित्तीय वर्ष के अंत से गणना में लिया जाएगा, जिसमें निर्धारण अधिकारी को उक्त आवेदन प्राप्त होता है:
पंरतु इस उपधारा के उपबंध तभी लागू होंगे, यदि निर्धारिती ने धारा 115ञकक के अधीन किसी पश्चातवर्ती निर्धारण वर्ष में इस धारा के अधीन संदत्त कर के प्रत्यय का उपयोग नहीं किया है:
परंतु यह और कि इस उपधारा के उपबंध 1 अप्रैल, 2020 या उसके पूर्व आरंभ होने वाले उस निर्धारण वर्ष को भी लागू होंगे और इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस उपधारा के उपबंधों के मद्दे उद्भूत प्रतिदाय पर ऐसी निर्धारिती को कोई ब्याज संदेय नहीं होगा।]
(3) उपधारा (1) की कोई बात किसी सुसंगत पूर्ववर्ष के संबंध में पश्चात्वर्ती वर्ष या वर्षों को धारा 32 की उपधारा (2) या धारा 32क की उपधारा (3) या धारा 72 की उपधारा (1) के खंड (ii) या धारा 73 या धारा 74 या धारा 74क की उपधारा (3) के उपबंधों के अधीन अग्रनीत की जाने वाली रकमों के अवधारण पर प्रभाव नहीं डालेगी।
(4) ऐसी प्रत्येक कंपनी, जिसे यह धारा लागू होती है, धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित लेखापात्र की विहित प्ररूप में एक रिपोर्ट, यह प्रमाणित करते हुए कि बही लाभ इस धारा के उपबंधों के अनुसार संगणित किया गया है, 40कक[धारा 44कख के निर्दिष्ट तारीख से पहले] या धारा 142 की उपधारा (1) के खंड (i) के अधीन सूचना के उत्तर में प्रस्तुत की गई आय की विवरणी के साथ प्रस्तुत करेगी।
(5) इस धारा में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, इस अधिनियम के सभी अन्य उपबंध इस धारा में उल्लिखित ऐसे प्रत्येक निर्धारिती को जो कंपनी है, लागू होंगे।
40कख[(5क) इस धारा के उपबंध,—
(i) धारा 115ख में निर्दिष्ट जीवन बीमा कारबार से किसी कंपनी को उद्भत या होने वाली कोई आय;
(ii) किसी व्यक्ति को, जिसने धारा 115खकक या धारा 115खकख के अधीन निर्दिष्ट विकल्प का प्रयोग किया है,
को लागू नहीं होंगे।]
(6) इस धारा के उपबंध किसी उद्यमकर्ता या विकासकर्ता द्वारा, यथास्थिति, किसी यूनिट या किसी विशेष आर्थिक जोन में किए गए किसी कारबार या प्रदान की गई सेवाओं से 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् या उद्भूत होने वाली आय को लागू नहीं होंगे:
परंतु इस उपधारा के उपबंध 1 अप्रैल, 2012 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष की बाबत प्रभावी नहीं रहेंगे।
(7) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इसमें निर्दिष्ट निर्धारिती, किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित कोई इकाई है और अपनी आय पूर्ण रूप से संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त करती है, वहां उपधारा (1) के उपबंध ऐसे प्रभावी होंगे मानो "साढ़े अठारह प्रतिशत" शब्द जहां कहीं वे उस उपधारा में आते हैं, "नौ प्रतिशत" शब्दों से प्रतिस्थापित कर दिए गए हों ।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (थ) में उसका है;
(ख) "इकाई" से किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में स्थापित कोई इकाई अभिप्रेत है;
(ग) "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में समझा गया है।
26क. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से "प्रभार्य ब्याज, स्वामित्व" शब्दो के स्थान पर प्रतिस्थापित।
40क. वित अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंतस्थापित।
19कक. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।
20. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''कंपनी अधिनियम 1956 (1956 का 1)'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
21. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''अनुसूची 6 का भाग 2'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
22. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
23. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''धारा 211 की उपधारा (2) का परन्तुक'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
24. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''कंपनी अधिनियम 1956 (1956 का 1)'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
25. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''धारा 210'' शब्दों और अकों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
26. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
27. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''शुद्ध लाभ'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
28. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ या हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
29. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
30. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
30क. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से "प्रभार्य ब्याज, स्वामित्व" शब्दो के स्थान पर प्रतिस्थापित।
31. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
32. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ या हानि लेखा'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
33. वित्त (सं 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (iiज) निम्न प्रकार था।
"(iiज) किसी कंपनी की दशा में, जिसके विरुद्ध निगमित दिवाला समाधान की प्रक्रिया के लिए कोई आवेदन न्यायनिर्णायक प्राधिकरण द्वारा दिवाला और धन-शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 7 या धारा 9 या धारा 10 के अधीन स्वीकार किया गया है, के शेष मूल्यàास की समग्र रकम और अग्रनीत हानि।
स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''न्यायनिर्णायक प्राधिकरण'' पद का वही अर्थ होगा, जो दिवाला और धन-शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) की धारा 5 के खंड (1) में उसका है और हानि में मूल्यàास सम्मिलित नहीं होगा; या;"
34. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।
35. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
36. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 211 की उपधारा (2) का परन्तुक'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
37. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की अनुसूची 6 के भाग 2 और भाग 3'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
38. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से ''लाभ और हानि लेखा'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
39. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2001 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
40. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।
40कक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2020 से "धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन फाइल की गई आय की विवरणी के साथ" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
40कख. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (5क) निम्न प्रकार थी
"(5क) इस धारा के उपबंध धारा 115ख में निर्दिष्ट जीवन बीमा कारबार से किसी कंपनी को प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली किसी आय को लागू नहीं होंगे"
[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

