देशी कंपनियों से प्राप्त कतिपय लाभाशों पर कर
देशी कंपनियों से प्राप्त कतिपय लाभाशों पर कर
115खखघक. (1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी 14[विनिर्दिष्ट निर्धारिती]जो भारत में निवासी है, की कुल आय में किसी देशी कंपनी या कंपनियों द्वारा घोषित, वितरित या संदंत्त लाभांशों के द्वारा दस लाख रुपए से अधिक की सकल आय सम्मिलित है तो संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा–
(क) दस लाख रुपए से अधिक के ऐसे सकल लाभांशों द्वारा आय पर संगणित आय-कर की रकम पर दस प्रतिशत की दर से; और
(ख) आय-कर की रकम, जिससे निर्धारिती प्रभार्य होता यदि उसकी कुल आय में से लाभांशों द्वारा आय की पूर्वोक्त रकम को घटा दिया जाता।
(2) उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट लाभांशों द्वारा उसकी आय को संगणित करने में इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन निर्धारिती को किसी खर्चे या मोक या हानि के मुजरा के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
15[स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "लाभांश" का वही अर्थ होगा, जो धारा 2 के खंड (22) में उसका है, किन्तु इसमें उसका खंड (ड़) सम्मिलित नहीं होगा;
(ख) "विनिर्दिष्ट निर्धारिती" से निम्नलिखित से भिन्न व्यक्ति अभिप्रेत है,–
(i) देशी कंपनी; या
(ii) धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या कोर्इ विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या अन्य अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था; या
(iii) धारा 12क या धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोर्इ न्यास या संस्था।]
14. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से ''निर्धारिती, जो कोर्इ व्यष्टि, हिन्दू अविभक्त कुटुंब या कोर्इ फर्म है'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
15. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से उपधारा (3) के स्थान पर स्पष्टीकरण प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (3) निम्नलिखित प्रकार थी।
"(3) इस धारा में, "लाभांश" का वही अर्थ होगा जो "लाभांश" का धारा 2 के खंड (22) में है किंतु उसका उपखंड (ड़) सम्मिलित नहीं होगा।''
[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

