देशी कंपनियों से प्राप्त कतिपय लाभाशों पर कर
वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से धारा 115खखघ के पश्चात् निम्नलिखित धारा 115खखघक अंत:स्थापित की जाएगी :
देशी कंपनियों से प्राप्त कतिपय लाभाशों पर कर
115खखघक. (1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निर्धारिती, जो कोर्इ व्यष्टि, हिन्दू अविभक्त कुटुंब या कोर्इ फर्म, जो भारत में निवासी है, की कुल आय में किसी देशी कंपनी या कंपनियों द्वारा घोषित, वितरित या संदंत्त लाभांशों के द्वारा दस लाख रुपए से अधिक की सकल आय सम्मिलित है तो संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा-
(क) दस लाख रुपए से अधिक के ऐसे सकल लाभांशों द्वारा आय पर संगणित आय-कर की रकम पर दस प्रतिशत की दर से; और
(ख) आय-कर की रकम, जिससे निर्धारिती प्रभार्य होता यदि उसकी कुल आय में से लाभांशों द्वारा आय की पूर्वोक्त रकम को घटा दिया जाता ।
(2) उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट लाभांशों द्वारा उसकी आय को संगणित करने में इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन निर्धारिती को किसी खर्चे या मोक या हानि के मुजरा के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(3) इस धारा में, "लाभांश" का वही अर्थ होगा जो "लाभांश" का धारा 2 के खंड (22) में है किंतु उसका उपखंड (ड़) सम्मिलित नहीं होगा ।
[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

