आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115खकग

व्यष्टियों और हिंदू अविभक्त कुटुंब की आय पर कर

धारा

धारा संख्या

115खकग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - कुछ विशेष मामलों में कर का निर्धारण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2020

व्यष्टियों और हिंदू अविभक्त कुटुंब की आय पर कर

व्यष्टियों और हिंदू अविभक्त कुटुंब की आय पर कर

वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से धारा 115खक अंत:स्थापित की जाएगी

व्यष्टियों और हिंदू अविभक्त कुटुंब की आय पर कर

115खकग. (1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, किन्तु इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष के लिए, किसी ऐसे व्यक्ति की, जो व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब है, कुल आय की बाबत संदेय आय-कर, ऐसे व्यक्ति के विकल्प पर, नीचे सारणी में दी गर्इ दर पर संगणित किया जाएगा, यदि उपधारा (2) में अंतर्विष्ट शर्तों का समाधन हो जाता है, अर्थात: —

सारणी
कुल आय दर
2,50,000 रुपए तक शून्य
2,50,000 रुपए से 5,00,000 रुपए तक 5 प्रतिशत
5,00,001 रुपए से 7,50,000 रुपए तक 10 प्रतिशत
7,50,001 रुपए से 10,00,000 रुपए तक 15 प्रतिशत
10,00,001 रुपए से 12,50,000 रुपए तक 20 प्रतिशत
12,50,001 रुपए से 15,00,000 रुपए तक 25 प्रतिशत
15,00,000 रुपए से अधिक 30 प्रतिशत

परंतु जहां व्यक्ति, किसी पूर्ववर्ष में उपधारा (2) में अंतर्विष्ट शर्तों का समाधन करने में असफल हो जाता है, वहां उस पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष की बाबत विकल्प अविधिमान्य हो जाएगा और अधिनियम के अन्य उपबंध इस प्रकार लागू होंगे, मानो उस पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए विकल्प का प्रयोग नहीं किया गया था:

परंतु यह और कि जहां उपधारा (5) के खंड (i) के अधीन विकल्प का प्रयोग किया जाता है, वहां उपधारा (2) में अंतर्विष्ट शर्तों के समाधन में असफलता की दशा में, यह पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए भी अविधिमान्य हो जाएगा और उन वर्षों के लिए अधिनियम के अन्य उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुंब की कुल आय की संगणना,—

(iधारा 10 के खंड (5) या खंड (13क) के अधीन या खंड (14) के अधीन विहित (उनसे भिन्न, जो इस प्रयोजन के लिए विहित किए जाएं), या खंड (17) या खंड (32) या धारा 10कक या धारा 16 या धारा 24 के खंड (क) या धारा 24 के खंड (ख) [धारा 23 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट संपत्ति की बाबत] या धारा 25क की उपधारा (2) या उपधारा 32 की उपधारा (1) के खंड (iiक) या धारा 32कघ या धारा 33कख या धारा 33कखक या धारा 35 की उपधारा (1) के उपखंड (ii) या उपखंड (iiक) या उपखंड (iii) या उपधारा (2कक) या धारा 35कघ या धारा 35गगग या धारा 57 के खंड (iiक) के अधीन या धारा 80गगघ की उपधारा (2) या धारा 80 ञञकक के उपबंधों से भिन्न अध्याय 6क के किसी उपबंध के अधीन किसी छूट या कटौती के बिना की जाएगी;

(ii) किसी हानि का,—

() जिसे किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष से अग्रनीत किया गया है या अवक्षयण का, यदि ऐसी हानि या अवक्षयण खंड (i) में निर्दिष्ट किसी कटौती के कारण हुआ माना गया है;

() जो ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अधीन हुर्इ है, आय के किसी अन्य शीर्ष से, मुजरा किए बिना, की जाएगी;

(iiiधारा 32 के किसी उपबंध के अधीन, उक्त धारा की उपधारा (1) के खंड (iiक) के सिवाय, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अवधारित अवक्षयण, यदि कोर्इ हो, का दावा करके की जाएगी; और

(iv) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन उपबंधित भत्ते या परिलब्धि, चाहे जिस नाम से ज्ञात हो, के लिए किसी छूट या कटौती के बिना की जाएगी।

(3) उपधारा (2) के खंड (ii) में निर्दिष्ट हानि और अवक्षयण को पूर्ण प्रभाव दिया गया समझा जाएगा और ऐसी हानि या अवक्षयण के लिए किसी पश्चात्वर्ती वर्ष के लिए किसी और कटौती को अनुज्ञात नहीं किया जाएगा:

परंतु जहां आस्ति के ऐसे ब्लॉक की बाबत किसी अवक्षयण मोक को, जिसे 1 अप्रैल, 2021 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के पहले पूर्ण प्रभाव नहीं दिया गया है, वहां तत्स्थानी समायोजन, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, 1 अप्रैल, 2020 को आस्तियों के ऐसे ब्लॉक के अवलिखित मूल्य पर किया जाएगा, यदि उपधारा (5) के अधीन विकल्प का प्रयोग 1 अप्रैल, 2021 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए किया गया है।

(4) ऐसे व्यक्ति की दशा में, जिसकी धारा 80ठक की उपधारा (1क) में यथानिर्दिष्ट अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में कोर्इ यूनिट है, जिसने उपधारा (5) के अधीन विकल्प का प्रयोग किया है, उपधारा (2) में अंतर्विष्ट शर्तें उस सीमा तक उपांतरित की जाएंगी, जहां तक ऐसी यूनिट को धारा 80ठक के अधीन कटौती, उक्त धारा में अंतर्विष्ट शर्तों को पूरा किए जाने के अधीन रहते हुए उपलब्ध है।

स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ''यूनिट'' पद का वही अर्थ होगा, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (यग) में उसका है।

(5) इस धारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात तभी लागू होगी, जब ऐसे व्यक्ति द्वारा,—

 (i) जिसकी कारबार या वृत्ति से आय है, 1 अप्रैल, 2021 को या उसे पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष के लिए, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने हेतु विनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उससे पहले विकल्प का प्रयोग विहित रीति में कर दिया गया है और एक बार प्रयोग किए जाने पर ऐसा विकल्प पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों को लागू होगा;

(ii) जिसकी खण्ड (i) में निर्दिष्ट आय से भिन्न कोर्इ आय है, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन किसी निर्धारण वर्ष के पूर्व सुसंगत वर्ष के लिए प्रस्तुत की जाने वाली आय की विवरणी के साथ विकल्प का प्रयोग विहित रीति में कर दिया गया है:

परंतु खंड (i) के अधीन विकल्प, यदि किसी पूर्ववर्ष के लिए एक बार प्रयोग कर लिया गया है, तो उस वर्ष से, जिसके लिए विकल्प या प्रयोग किया गया है, भिन्न किसी पूर्ववर्ष के लिए केवल एक बार वापस लिया जा सकेगा और उसके पश्चात्, वह व्यक्ति इस धारा के अधीन विकल्प का प्रयोग करने के लिए तब के सिवाय कभी पात्र नहीं होगा, जब उस व्यक्ति की कारबार या वृत्ति नहीं रह जाती है, उस दशा में खंड (ii) के अधीन विकल्प उपलब्ध होगा।

 

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

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