विदेशी करेन्सी में खरीदी गर्इ ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय या उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ पर कर
60[विदेशी करेन्सी में खरीदी गर्इ ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय या उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ पर कर
115कगक. 61[(1) जहां निर्धारिती की, जो ऐसा व्यष्टि है, जो निवासी है और विनिर्दिष्ट ज्ञान परक उद्योग या सेवा में लगी किसी भारतीय कंपनी का कर्मचारी है या विनिर्दिष्ट ज्ञान परक उद्योग या सेवा में लगी उसकी समनुषंगी का कर्मचारी है (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् निवासी कर्मचारी कहा गया है) की कुल आय में,-
(क) विनिर्दिष्ट ज्ञान आधारित उद्योग या सेवा में लगी किसी भारतीय कंपनी की ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों पर, जो ऐसी कर्मचारी स्टॉक विकल्प स्कीम के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र62 में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, जारी की गर्इ और विदेशी मुद्रा में उसके द्वारा खरीदी गर्इ हैं, 63[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों] के रूप में आय; या
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों के अंतरण से होने वाले दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय,
सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :-
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत 63क[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों के रूप में आय] पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(iii) आय-कर की वह रकम, जो निवासी कर्मचारी पर प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।
स्पष्टीकरण.-इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) ''विनिर्दिष्ट ज्ञान परक उद्योग या सेवा'' से अभिप्रेत है,-
(i) सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर;
(ii) सूचना प्रौद्योगिकी सेवा;
(iii) मनोरंजन सेवा;
(iv) भेषजीय उद्योग;
(v) जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग; और
(vi) कोर्इ ऐसा अन्य उद्योग या सेवा, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए;
(ख) ''समनुषंगी'' का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4 में है और इसके अंतर्गत भारत के बाहर निगमित समनुषंगी भी है।]
(2) जहां निवासी कर्मचारी की-
(क) सकल कुल आय में केवल उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट यथास्थिति बंधपत्रों या उस उपखंड के खंड (ख) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत 64[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों] के रूप में आय है वहां उसके लिए इसे अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;
(ख) सकल कुल आय में उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो सकल कुल आय निर्धारिती की सकल कुल आय हो।
(3) धारा 48 के प्रथम और दूसरे परन्तुकों की कोर्इ बात दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट बंधपत्र या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें हैं, अंतरण से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।
स्पष्टीकरण.-इस धारा के प्रयोजनों के लिए-
65[(क) "ग्लोबल निक्षेपागार रसीद'' से भारत के बाहर विदेशी निक्षेपागार बैंक द्वारा सृजित और-
(i) निर्गम कंपनी के, जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबठ्ठ कोर्इ कंपनी है, साधारण शेयरों; या
(ii) निर्गम कंपनी के विदेशी करेंसी संपरिवर्तनीय बघंपत्रों,
के निर्गम के प्रति विनिधान कर्ताओं को जारी की गर्इ निक्षेपागार रसीद या प्रमाणपत्र (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) के रूप में कोर्इ लिखित अभिप्रेत है;]
(ख) ''सूचना प्रौद्योगिकी सेवा'' से ऐसी कोर्इ सेवा अभिप्रेत है जो मूल्य अभिवृद्धि प्राप्त करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों की एक प्रणाली के ऊपर किसी सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर के फलस्वरूप मिलती है;
(ग) ''सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर'' से अनुदेशों, आंकड़ों, ध्वनि या छवि का कोर्इ प्रतिरूपण अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत स्रोत कोड और वस्तू कोड भी है, जो सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद शीर्षक के अंतर्गत आने वाली स्वचालित डाटा प्रोसेसिंग मशीन के माध्यम से एक मशीन में सुपाठ्य रूप में और घट-बढ़ योग्य और प्रयोक्ता को अन्तक्रिया सुलभ कराने में समर्थ रूप में लेखबद्ध हो, किंतु गैर-सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद उसके अंतर्गत नहीं आते;
(घ) ''विदेशी निक्षेपागार बैंक'' से कोर्इ बैंक अभिप्रेत है जो निर्गम कंपनी के साधारण शेयर या विदेशी मुद्रा संपरिवर्तनीय बंधपत्रों के निर्गम के विरुद्ध ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें जारी करने के लिए निर्गम कंपनी द्वारा प्राधिकृत किया गया हो।
60. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
61. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, उपधारा (1) निम्न प्रकार थी :
''(1) जहां किसी निर्धारिती की, जो कोर्इ ऐसा व्यष्टि है जो निवासी है और सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में लगी हुर्इ किसी भारतीय कंपनी का कोर्इ कर्मचारी (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् निवासी कर्मचारी कहा गया है) है, की कुल आय में-
(क) ऐसे कर्मचारी के स्टॉक विकल्प स्कीम के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त अधिसूचित करे, जारी की गर्इ और विदेशी करेंसी में उसके द्वारा क्रय की गर्इ सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में लगी हुर्इ किसी भारतीय कंपनी की विश्व निक्षेपागार रसीदों पर धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों के रूप में आय; या
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों के अंतरण से उत्पन्न दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय,
सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात्-
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों के रूप में आय पर यदि कोर्इ हो, जो कुल आय से सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय कर की रकम;
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय पर यदि कोर्इ हो, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(iii) आय कर की यह रकम, जिस पर निवासी कर्मचारी की आय प्रभार्य होगी यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।''
62. अधिसूचित स्कीम के लिए सम्बंधित अधिसूचना देखिए।
63. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "लाभांशों" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया।
63क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "लाभांशों" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया।
64. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "लाभांशों" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया था।
65. वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा 1.4.2016 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (क) इस प्रकार था :
'(क) ''ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों'' से भारत के बाहर विदेशी निक्षेपागार बैंक द्वारा सृजित और साधारण शेयरों के निर्गम या निर्गम कंपनी के विदेशी मुद्रा संपरिवर्तनीय बंधपत्रों के विरुद्ध अनिवासी विनिधानकर्ताओं को जारी की गर्इ निक्षेपागार रसीद या प्रमाणपत्र (चाहे जो भी नाम हो) के रूप में कोर्इ लिखत अभिप्रेत है;'
[वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा संशोधित रूप में]

