विदेशी करेंसी में क्रय किए गए बंधपत्रों या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय पर अथवा उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों से उद्भूत आय पर कर
53[विदेशी करेंसी में क्रय किए गए बंधपत्रों या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय पर अथवा उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों से उद्भूत आय पर कर
115कग. (1) जहां किसी निर्धारिती की, जो अनिवासी है, कुल आय में,–
(क) किसी भारतीय कंपनी के ऐसे बंधपत्रों पर, जो ऐसी स्कीम के अनुसार जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र54 में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, विदेशी करेंसी में जारी किए जाते हैं या पब्लिक सेक्टर कंपनी के ऐसे बंधपत्रों पर जो सरकार द्वारा बेचे जाते हैं और जो विदेशी करेंसी में उसके द्वारा खरीदे जाते हैं ब्याज के रूप में आय; या
(ख) ऐसी ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों पर, 55[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों] के रूप में आय,–
(i) जो ऐसी स्कीम के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार, किसी भारतीय कंपनी के शेयरों के आरंभिक रूप में जारी किए जाने के संबंध में, राजपत्र में अधिसूचना55क द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, जारी की जाती है और किसी अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से उसके द्वारा विदेशी करेंसी में क्रय की जाती है;
(ii) जो किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी के ऐसे शेयरों के संबंध में, जिनका सरकार द्वारा विक्रय किया जाता है, जारी की जाती हैं और किसी अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से उसके द्वारा विदेशी करेंसी में क्रय किए जाते हैं; या
(iii) जो ऐसी स्कीम के अनुसार जो केंद्रीय सरकार किसी अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से विदेशी करेंसी में उसके द्वारा क्रय किए गए किसी भारतीय कंपनी के विद्यमान शेयरों के संबंध में, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, 56[जारी या पुन: जारी] की जाती हैं; या
(iv) 57[***]
(ग) यथास्थिति, खंड (क) में निर्दिष्ट बंधपत्रों के अंतरण या खंड (ख) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय,
सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा,–
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट बंधपत्रों या खंड (ख) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत, यथास्थिति, ब्याज या 58[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों] के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(ii) खंड (ग) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(iii) आय-कर की वह रकम, जो अनिवासी पर प्रभार्य होती, यदि उसकी कुल आय में से खंड (क), खंड (ख) और खंड (ग) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।
(2) जहां अनिवासी की सकल कुल आय में,–
(क) यथास्थिति, उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट, बंधपत्रों या उस उपधारा के खंड (ख) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत केवल ब्याज या 58क[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों] के रूप में आय सम्मिलित है वहां धारा 28 से धारा 44ग या धारा 57 के खंड (i) या खंड (iii) के अधीन या अध्याय 6क के अधीन उसे कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;
(ख) उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती इस प्रकार अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटा कर आर्इ सकल कुल आय निर्धारिती की सकल कुल आय हो।
(3) धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुकों की कोर्इ बात, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो उपधारा (1) के खंड (ग) में निर्दिष्ट बंधपत्र या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें हैं, अंतरण से होने वाले दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।
(4) किसी अनिवासी के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन अपनी आय की विवरणी देना आवश्यक नहीं होगा, यदि–
(क) उसकी कुल आय में, जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, केवल उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट आय सम्मिलित है; और
(ख) अध्याय 17ख के उपबंधों के अधीन स्रोत पर कटौती योग्य कर की ऐसी आय से कटौती की गर्इ है।
(5) जहां निर्धारिती ने उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, समामेलक या अविलयित कंपनी में अपनी ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें या बंधपत्र धारण करने के आधार पर समामेलित या परिणामी कंपनी में ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें या बंधपत्र अर्जित किए हैं, वहां उस उपधारा के उपबंध ऐसी ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों या बंधपत्रों को लागू होंगे।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "अनुमोदित मध्यवर्ती" से ऐसा मध्यवर्ती अभिप्रेत है, जो ऐसी स्कीम के अनुसार अनुमोदित है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित59 करे;
(ख) "ग्लोबल निक्षेपागार रसीद" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 115कगक के स्पष्टीकरण के खंड (क) में है।]
53. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित तथा वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.10.1996 से, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से और वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से यथा संशोधित धारा 115कग इस प्रकार थी :
"115कग. विदेशी मुद्रा में क्रय किए गए बंधपत्रों या शेयरों से आय पर अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर–(1) जहां किसी निर्धारिती की, जो अनिवासी है, कुल आय में–
(क) भारतीय कंपनी के ऐसे बंधपत्रों या शेयर पर जो ऐसी स्कीम के अनुसार जारी किए जाते हैं, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित विनिर्दिष्ट करे, ब्याज या धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांश पर या पब्लिक सेक्टर कंपनी के बंधपत्रों या शेयरों पर, जो सरकार द्वारा विक्रय किए जाते हैं और उसके द्वारा विदेशी मुद्रा में क्रय किए जाते हैं ब्याज या लाभांश के रूप में आय; या
(ख) खंड (क) में निर्दिष्ट यथास्थिति, बंधपत्रों या शेयरों के अंतरण से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय,
सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–
(i) खंड (क) में निर्दिष्ट बंधपत्रों या शेयरों की बाबत, यथास्थिति, ब्याज या धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांश के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(ii) खंड (ख) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय की रकम; और
(iii) आय-कर की वह रकम जो अनिवासी पर प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।
(2) जहां अनिवासी की–
(क) सकल कुल आय केवल उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट, यथास्थिति, बंधपत्रों या शेयरों की बाबत ब्याज या धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांश के रूप में आय से मिलकर बनती है वहां उसे धारा 28 से 44ग या धारा 57 के खंड (i) या खंड (iii) के अधीन या अध्याय 6क के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;
(ख) सकल कुल आय में उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ सकल कुल आय निर्धारिती की सकल कुल आय हो।
(3) धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुकों की कोर्इ बात दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट बंधपत्र या शेयर हैं, अंतरण से उद्भूत होने वाले दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।
(4) किसी अनिवासी के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन अपनी आय की विवरणी देना आवश्यक नहीं होगा यदि–
(क) उसकी कुल आय जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, केवल उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आय से मिलकर बनती है; और
(ख) अध्याय 17ख के उपबंधों के अधीन स्रोत पर कटौती-योग्य कर की ऐसी आय से कटौती कर ली गर्इ है।
(5) जहां निर्धारिती ने, उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, समामेलक या अविलयित कंपनी में अपने शेयर धारण या बंधपत्र के आधार पर समामेलित या परिणामी कंपनी में, यथास्थिति, शेयरों या बंधपत्रों को अर्जित किया है, वहां उक्त उपधारा के उपबंध ऐसे शेयरों को लागू होंगे।"
54. विदेशी करेंसी परिवर्तनीय बंधपत्र और साधारण शेयर निर्गमन (निक्षेपागार रसीद तंत्र के माध्यम से) स्कीम अधिसूचित की जा चुकी है–अधिसूचना सं. का.आ. 987(र्इ), तारीख 10.9.2002.
55. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "लाभांशों" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया था।
55क. विदेशी करेंसी परिवर्तनीय बंधपत्र और साधारण शेयर निर्गमन (निक्षेपागार रसीद तंत्र के माध्यम से) स्कीम अधिसूचित की जा चुकी है–अधिसूचना सं. का.आ. 987(र्इ), तारीख 10.9.2002।
56. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2002 से "पुन: जारी" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
57. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2002 से लोप किया गया। लोप से पूर्व, खंड (iv) इस प्रकार था:
"(iv) जो ऐसी स्कीम के अनुसार, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, जारी की जाती हैं और भारतीय कंपनी द्वारा उसकी समनुषंगी कंपनियों में विनिवेश से उद्भूत किसी भारतीय कंपनी के शेयरों के संबंध में अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से विदेशी करेंसी में क्रय की जाती हैं और ऐसी दोनों भारतीय कंपनियों के शेयर भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं,"
58. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "लाभांशों" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया था।
58क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "लाभांशों" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न" शब्दों का लोप किया गया था।
59. विदेशी करेंसी परिवर्तनीय बंधपत्र ओर साधारण शेयर निर्गमन (निक्षेपागार रसीद तंत्र के माध्यम से) स्कीम, 1993 अधिसूचना सं. का.आ. 987(र्इ.), तारीख 10.9.2002 देखिए।

