लाभांश, रॉयल्टी और विदेशी कंपनियों के मामले में तकनीकी सेवा फीस पर टैक्स
98[विदेशी कंपनियों की दशा में लाभांश, स्वामिस्व और तकनीकी सेवाओं की फीस पर कर
(क) किसी अनिवासी (जो कंपनी नहीं है) या किसी विदेशी कंपनी की कुल आय में,--
(i) लाभांश 2[(जो धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिé हैं]; या
(ii) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त ब्याज; या
(iii) धारा 10 के खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की या भारतीय यूनिट ट्रस्ट के, विदेशी मुद्रा में खरीदे गए यूनिटों की बाबत प्राप्त आय,
सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात्--
(अ) कुल आय में सम्मिलित 2क[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिé] लाभांशों के रूप में आय की रकम पर, यदि कोर्इ हो, बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(आ) कुल आय में सम्मिलित, उपखंड (ii) में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय की रकम पर, यदि कोर्इ हो, बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(इ) कुल आय में सम्मिलित, उपखंड (iii) में निर्दिष्ट यूनिटों की बाबत आय पर, यदि कोर्इ हो, बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(र्इ) आय-कर की वह रकम जो उस पर प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय में से उपखंड (i), उपखंड (ii) और उपखंड (iii) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती;
(ख) किसी विदेशी कंपनी की कुल आय में, सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से प्राप्त स्वामिस्व या तकनीकी सेवाओं के लिए प्राप्त फीसों के रूप में कोर्इ आय 31 मार्च, 1976 के पश्चात विदेशी कंपनी द्वारा सरकार या भारतीय समुत्थान के साथ किए गए किसी करार के अनुसरण में और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ किया जाता है और उस करार का केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदन कर दिया गया है या जहां वह करार भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है वहां ऐसा करार उस नीति के अनुसार है, सम्मिलित है वहां, उपधारा (1क) और उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :--
3[(अ) कुल आय में सम्मिलित स्वामिस्व के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम, यदि ऐसा स्वामिस्व 31 मर्इ, 1997 को या उससे पूर्व किए गए करार के अनुसरण में प्राप्त किया जाता है और बीस प्रतिशत जहां ऐसा स्वामिस्व 31 मर्इ, 1997 के पश्चात् किए गए करार के अनुसरण में प्राप्त किया जाता है;
(आ) कुल आय में सम्मिलित तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय पर कर, यदि कोर्इ हो, तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम, यदि तकनीकी सेवाओं के लिए ऐसी फीस 31 मर्इ, 1997 को या उसके पश्चात् किए गए करार के अनुसरण में प्राप्त की जाती है और वहां बीस प्रतिशत जहां तकनीकी सेवाओं के लिए ऐसी फीस 31 मर्इ, 1997 के पश्चात् किए गए करार के अनुसरण में प्राप्त की जाती है; और
(इ) आय-कर की वह रकम जो उस पर प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय में से स्वामिस्व और तकनीकी सेवाओं की फीस के रूप में आय की रकम घटा दी गर्इ होती।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,--
(क) "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के स्पष्टीकरण 2 में है;
(ख) "विदेशी करेंसी" का वही अर्थ है जो धारा 10 के खंड (15) के उपखंड (iv) की मद (छ) के नीचे के स्पष्टीकरण में है;
(ग) "स्वामिस्व" का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण 2 में है;
(घ) "भारतीय यूनिट ट्रस्ट" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट अभिप्रेत है।
4[(1क) जहां उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट स्वामिस्व किसी भारतीय समुत्थान को किसी पुस्तक के प्रतिलिप्यधिकार की बाबत 5[या भारत में निवासी किसी व्यक्ति को किसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर की बाबत सभी या किन्हीं अधिकारों के (जिनके अंतर्गत अनुज्ञप्ति देना भी है) अंतरण के प्रतिफल के रूप में है वहां उपधारा (1) के उपबंध ऐसे स्वामिस्व के संबंध में ऐसे लागू होंगे मानो उक्त खंड में आने वाले 6[7[, जहां करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह करार भारत सरकार की, तत्समय प्रवृत्त, औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है] वहां ऐसा करार उस नीति के अनुसार है] शब्दों का लोप कर दिया गया हो :
परन्तु यह तब जबकि ऐसी पुस्तक ऐसे विषय पर है जिस पर पुस्तकें, भारत सरकार की 1 अप्रैल, 1977 से प्रारम्भ होने वाली और 31 मार्च, 1978 को समाप्त होने वाली अवधि के लिए आयात व्यापार नियंत्रण नीति के अनुसार खुले साधारण लाइसेंस के अधीन भारत में आयात किए जाने के लिए अनुज्ञात है :
8[परन्तु यह और कि ऐसी कम्प्यूटर साफ्टवेयर, तत्समय प्रवृत्त भारत सरकार की आयात व्यापार नियंत्रण नीति के अनुसार खुले साधारण लाइसेंस के अधीन भारत में आयात किए जाने के लिए अनुज्ञात है।
9[स्पष्टीकरण 1].–इस उपधारा में "खुला साधारण लाइसेंस" से अभिप्रेत है आयात (नियंत्रण) आदेश, 1955 के अनुसरण में केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किया गया खुला साधारण लाइसेंस।]
10[स्पष्टीकरण 2.–इस उपधारा में "कंप्यूटर साफ्टवेयर" पद का वही अर्थ है जो धारा 80जजड़ के स्पष्टीकरण के खंड (ख) में है।]
(2) उपधारा (1) की कोर्इ बात स्वामिस्व के रूप में किसी आय के संबंध में लागू नहीं होगी जो किसी भारतीय समुत्थान के साथ किसी विदेशी कम्पनी द्वारा 31 मार्च, 1976 के पश्चात किए गए किसी करार के अनुसरण में उसने ऐसे भारतीय समुत्थान से उस दशा में प्राप्त की है जिसमें ऐसा करार धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के 11[पहले परंतुक के प्रयोजनों के लिए] 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किया गया समझा जाए और आय-कर परिकलन, प्रभारण, कटौती या संगणना करने के लिए वार्षिक वित्त अधिनियम के उपबंध ऐसी आय के संबंध में इस प्रकार लागू होंगे मानो ऐसी आय 1 अप्रैल, 1976 के पूर्व किए गए किसी करार के अनुसरण में प्राप्त की गर्इ थी।]
12[(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट निर्धारिती की आय की संगणना करने में, धारा 28 से धारा 44ग और धारा 57 के अधीन उसको किसी व्यय या मोक की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(4) जहां उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी निर्धारिती की दशा में,--
(क) सकल कुल आय में केवल उस उपधारा के खंड (क) में निर्दिष्ट आय समाविष्ट है वहां अध्याय 6क के अधीन उसको कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;
(ख) सकल कुल आय में उस उपधारा के खंड (क) में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटा कर आर्इ सकल कुल आय निर्धारिती की सकल कुल आय हो।
(5) उपधारा (1) में निर्दिष्ट निर्धारिती के लिए अपनी आय की विवरणी धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन देना आवश्यक नहीं होगा यदि--
(क) पूर्ववर्ष के दौरान उसकी कुल आय में जिसके संबंध में वह इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, केवल उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट आय समाविष्ट है; और
(ख) अध्याय 17ख के उपबंधों के अधीन स्रोत पर कटौती योग्य कर की ऐसी आय में से कटौती कर ली गर्इ है।]
98. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से अंत:स्थापित।
99. देखिये परिपत्र सं. 473, तारीख 29.10.1986 और परिपत्र सं. 740, तारीख 17.4.1996। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
1. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1977/1.4.1978 से, वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.6.1983 से, वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से संशोधित उपधारा (1) इस प्रकार थी–
'(1) उपधारा (1क) और उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां, किसी निर्धारिती की जो विदेशी कंपनी है, कुल आय में,–
(क) लाभांश; या
(कक) सरकार या किसी भारतीय समुत्थान द्वारा विदेशी करेंसी में उधार लिए गए धन या उपगत ऋण पर सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त ब्याज; या
(कख) धारा 10 के खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की, विदेशी करेंसी में क्रय किए गए यूनिटों की बाबत प्राप्त आय; या
(ख) 31 मार्च, 1976 के पश्चात् सरकार या किसी भारतीय समुत्थान के साथ विदेशी कंपनी द्वारा किए गए करार के अनुसरण में सरकार या भारतीय समुत्थान से प्राप्त रायल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस और जहां ऐसा करार किसी भारतीय समुत्थान के साथ है वहां वह करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है या जहां वह करार भारत सरकार की, तत्समय प्रवृत्त, औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है वहां ऐसा करार उस नीति के अनुसार है;]
सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–
(i) कुल आय में सम्मिलित लाभांशों के रूप में यदि कोर्इ हो, आय की रकम पर, पच्चीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(iक) कुल आय में सम्मिलित, खंड (कक) में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, पच्चीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(iख) कुल आय में सम्मिलित खंड (कख) में निर्दिष्ट यूनिटों की बाबत आय पर, यदि कोर्इ हो, पच्चीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;
(ii) कुल आय में सम्मिलित रायल्टी के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय कर की रकम;
(iii) कुल आय में सम्मिलित तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो [तीस प्रतिशत] की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(iv) आय-कर की वह रकम जो उस पर प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय में से खंड (क), खंड (कक) और खंड (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "तकनीकी सेवाओं के लिए फीस" का वही अर्थ है जो उसका धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के स्पष्टीकरण 2 में है;
(ख) "विदेशी करेंसी" का वही अर्थ है जो धारा 10 के खंड (15) के उपखंड (iv) की मद (छ) के नीचे स्पष्टीकरण 2 में है।
(ग) "स्वामिस्व" का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण 2 में है।
2. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।
2क. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।
3. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व उपखंड (अ) और (आ) निम्न प्रकार थे–
"(अ) कुल आय में सम्मिलित स्वामिस्व के रूप में, यदि कोर्इ हो, आय पर परिकलित आय-कर राशि, तीस प्रतिशत की दर से;
(आ) कुल आय में सम्मिलित तकनीकी सेवाओं की फीस के रूप में यदि कोर्इ हो, आय पर परिकलित आय-कर राशि, तीस प्रतिशत की दर से; और"
4. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
5. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।
6. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.6.1992 से "और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
7. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से "केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित या जहां करार ऐसे विषय के संबंध में है", शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
8. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।
9. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से पुनर्संख्यांकित किया गया।
10. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से अन्त:स्थापित।
11. यथोक्त द्वारा "परन्तुक के प्रयोजनों के लिए" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
12. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा संशोधित रूप में]

