आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 114

धारा 78 के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

धारा

धारा संख्या

114

अध्याय शीर्षक

अध्याय V - सेवा कर

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2015

धारा 78 के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

धारा 78 के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

धारा 78 के स्थान पर नर्इ धारा का प्रतिस्थापन

114. 1994 के अधिनियम की धारा 78 के स्थान पर निम्नलिखित धारा रखी जाएगी, अर्थात् :-

"78. कपट आदि के कारण सेवा कर का संदाय करने में असफलता के लिए शास्ति— (1) जहां सेवा कर के संदाय के अपवंचन के आशय से, कोर्इ सेवा कर उद्गृहीत नहीं किया गया है या संदत्त नहीं किया गया है या कम उद्गृहीत किया गया है या कम संदत्त किया गया है या दुरभिसंधि या जानबूझकर किए गए मिथ्या कथन या तथ्यों को छिपाने या इस अध्याय या उसके अधीन बनाए गए नियमों के किन्हीं उपबंधों का उल्लंघन किया गया है, वहां ऐसा व्यक्ति, जिस पर धारा 73 की उपधारा (1) के अधीन सूचना की तामील की गर्इ है, सूचना में विनिर्दिष्ट सेवा कर और ब्याज के अतिरिक्त ऐसी शास्ति का संदाय करने का भी दायी होगा जो ऐसी सेवा कर की रकम के शत प्रतिशत बराबर होगी :

परंतु ऐसे मामलों के संबंध में, ऐसे संव्यवहारों से संबंधित ब्यौरों को जहां 8 अप्रैल, 2011 से आरंभ होने वाली और उस तारीख तक की, जिसको वित्त विधेयक, 2015 को राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त होती है (जिसमें दोनों दिन सम्मिलित हैं) अवधि के लिए विनिर्दिष्ट अभिलेख में अभिलिखित किया जाता है, वहां शास्ति इस प्रकार अवधारित सेवा कर का पचास प्रतिशत होगी।

परंतु यह और कि जहां ऐसा सेवा कर और ब्याज,-

  (i) धारा 73 की उपधारा (1) के परंतुक के अधीन सूचना की तामील होने की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर संदत्त कर दिया जाता है वहां संदेय शास्ति ऐसे सेवा कर के पन्द्रह प्रतिशत होगी और सेवा कर, ब्याज और शास्ति के संबंध में कार्यवाहियों को समाप्त हुआ समझा जाएगा;

 (ii) धारा 73 की उपधारा (2) के अधीन सेवा कर की रकम का अवधारण करने वाले केंद्रीय उत्पाद-शुल्क अधिकारी के आदेश की प्राप्ति की तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर संदत्त कर दिया जाता है, वहां संदेय शास्ति इस प्रकार अवधारित सेवा कर का पच्चीस प्रतिशत होगी :

परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक के अधीन घटार्इ गर्इ शास्ति का फायदा केवल तभी उपलब्ध होगा यदि ऐसी घटार्इ गर्इ शास्ति की रकम का भी ऐसी अवधि के भीतर संदाय कर दिया जाता है।

स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट अभिलेख" से ऐसे अभिलेख अभिप्रेत हैं जिनके अंतर्गत ऐसा कम्प्यूटरीकृत डाटा सम्मिलित है जिनको तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अनुसार किसी निर्धारिती द्वारा बनाए रखा जाना अपेक्षित है या जहां ऐसी कोर्इ अपेक्षा नहीं हैं वहां निर्धारिती द्वारा लेखा पुस्तकों में अभिलिखित बीजकों को विनिर्दिष्ट अभिलेख माना जाएगा।"

"(2) जहां, यथास्थिति, आयुक्त (अपील), अपील अधिकरण या न्यायालय, धारा 73 की उपधारा (2) के अधीन अवधारित सेवा कर की रकम को उपांतरित करता है, वहां उपधारा (1) के अधीन संदेय शास्ति की रकम और धारा 75 के अधीन उस पर संदेय ब्याज तद्नुसार उपांतरित हो जाएगा और ऐसा व्यक्ति भी जो सेवा कर की ऐसी रकम का संदाय करने का दायी है और इस प्रकार उपांतरित सेवा कर की रकम को हिसाब में लेने के पश्चात्, वह व्यक्ति, जो सेवा कर की ऐसी रकम का संदाय करने के लिए दायी है, इस प्रकार उपांतरित शास्ति और ब्याज की रकम का संदाय करने का दायी होगा।

(3) जहां, यथास्थिति, आयुक्त (अपील), अपील अधिकरण, या न्यायालय द्वारा सेवा कर या शास्ति की रकम को धारा 73 की उपधारा (2) के अधीन यथा अवधारित रकम से अधिक बढ़ा दिया जाता है वहां ऐसे समय की, जिसके भीतर सेवा कर की बढ़ार्इ गर्इ ऐसी रकम के संबंध में उपधारा (1) के दूसरे परंतुक के खंड (ii) के अधीन घटार्इ गर्इ शास्ति संदेय है, संगणना, यथास्थिति आयुक्त (अपील) अधिकरण या न्यायालय के आदेश की तारीख से की जाएगी।"।

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