पूर्वोत्तर क्षेत्र में कतिपय औद्योगिक उपक्रमों की बाबत विशेष उपबंध
99[पूर्वोत्तर क्षेत्र में कतिपय औद्योगिक उपक्रमों की बाबत विशेष उपबंध
10ग. (1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारिती द्वारा ऐसे औद्योगिक उपक्रम से, जिसने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवस्थित किसी एकीकृत अवसंरचना विकास केन्द्र या औद्योगिक विकास केन्द्र में (जिसे इस धारा में इसके बाद औद्योगिक उपक्रम कहा गया है) 1 अप्रैल, 1998 को या उसके पश्चात् किसी वस्तु या चीज का विनिर्माण या उत्पादन आरम्भ किया है या कर रहा है, प्राप्त किन्हीं लाभों या अभिलाभों को निर्धारिती की कुल आय में सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
(2) यह धारा ऐसे किसी औद्योगिक उपक्रम को लागू होती है जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करता है, अर्थात्:–
(i) यह पहले से ही विद्यमान किसी कारबार को खंडित करके या पुनर्गठित करके नहीं बनाया गया है :
परन्तु यह शर्त ऐसे किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम की बाबत लागू नहीं होगी जो निर्धारिती द्वारा धारा 33ख में उल्लिखित किसी ऐसे औद्योगिक उपक्रम के कारबार के उस धारा में निर्दिष्ट परिस्थितियों में और अवधि के भीतर पुनस्र्थापन, पुनर्गठन या पुन:चालन के परिणामस्वरूप बनाया गया है;
(ii) इसे किसी प्रयोजन के लिए पूर्व में उपयोग की गर्इ मशीनरी या प्लांट का किसी नए कारबार को अंतरण करके नहीं बनाया गया है।
स्पष्टीकरण.–धारा 80झक की उपधारा (3) के स्पष्टीकरण 1 और 2 के उपबंध इस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे ये उस उपधारा के खंड (ii) को लागू होते हैं।
(3) उपधारा (1) में उल्लिखित लाभ और अभिलाभ उस पूर्ववर्ष से, जिसमें औद्योगिक उपक्रम वस्तुओं या चीज़ों का विनिर्माण या उत्पादन आरम्भ करता है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरम्भ होने वाले किन्हीं दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की बाबत निर्धारिती की कुल आय में सम्मिलित नहीं किए जाएंगे।
(4) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में,–
(i) धारा 32, धारा 35 और धारा 36 की उपधारा (1) का खंड (ix) इस प्रकार लागू होंगे मानो उनमें निर्दिष्ट और ऐसे निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए उपयोग किए गए किसी भवन, मशीनरी, प्लांट या फर्नीचर के संबंध में सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी से संबंधित और उनके लिए अनुज्ञेय कटौती या ऐसे पूर्ववर्ष में उस कारबार के प्रयोजनों के लिए उपगत किसी व्यय को उस निर्धारण वर्ष में ही पूर्ण प्रभाव दिया गया हो और तदनुसार, यथास्थिति, धारा 32 की उपधारा (2), धारा 35 की उपधारा (4) या धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) का दूसरा परन्तुक किसी ऐसी कटौती के संबंध में लागू नहीं होगा;
(ii) धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 74 की उपधारा (1) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोर्इ हानि, जहां तक ऐसी हानि औद्योगिक उपक्रम के कारबार से संबंधित है, उस दशा में अग्रनीत या मुजरा नहीं की जाएगी जिसमें ऐसी हानियां किसी सुसंगत निर्धारण वर्ष से संबंधित हों;
(iii) औद्योगिक उपक्रमों के लाभों या अभिलाभों की बाबत धारा 80जज या धारा 80जजक या धारा 80झ या धारा 80झक या धारा 80झख या धारा 80ञञक के अधीन कटौती अनुज्ञेय नहीं होगी; और
(iv) धारा 32 के अधीन अवक्षयण मोक की संगणना करने में, औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए उपयोग की गर्इ किसी आस्ति का अवलिखित मूल्य ऐसे संगणित किया जाएगा मानो निर्धारिती ने प्रत्येक सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए अवक्षयण की बाबत कटौती का दावा किया हो और वह वास्तव में अनुज्ञात की गर्इ हो।
(5) धारा 80झक की उपधारा (8) या उपधारा (10) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा में निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रम के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे कि वे, यथास्थिति, धारा 80झक या धारा 80झख में निर्दिष्ट औद्योगिक उपक्रम के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।
(6) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारिती धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन अपनी आय की विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तारीख से पूर्व निर्धारण अधिकारी को यह घोषणा लिखित में प्रस्तुत करता है कि इस धारा के उपबंध उसे लागू नहीं किए जाने चाहिएं, वहां इस धारा के उपबंध किसी सुसंगत निर्धारण वर्ष में उसे लागू नहीं होंगे :
1[परंतु इस धारा के अधीन किसी भी उपक्रम को 1 अप्रैल, 2004 से प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) "एकीकृत अवसंरचना विकास केन्द्र" से पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में अवस्थित ऐसे केन्द्र अभिप्रेत हैं जिन्हें केन्द्रीय सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट2 करे;
(ii) "औद्योगिक विकास केन्द्र" से पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में अवस्थित ऐसे केन्द्र अभिप्रेत हैं जिन्हें केन्द्रीय सरकार, इस धारा के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट3 करे;
(iii) "पूर्वोत्तर क्षेत्र" से वह क्षेत्र अभिप्रेत है जिसमें अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा राज्य सम्मिलित हैं;
(iv) "सुसंगत निर्धारण वर्ष" से उस वर्ष से, जिसमें औद्योगिक उपक्रम वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन प्रारम्भ करता है, प्रारम्भ होने वाले दस क्रमवर्ती वर्ष अभिप्रेत हैं।]
99. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.1999 से अंत:स्थापित।
1. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।
2. अधिसूचित "एकीकृत अवसंरचना विकास केन्द्र" और "औद्योगिक विकास केन्द्र" के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
3. धारा 11, जिसका प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप कर दिया गया था, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा उपांतरणों सहित उसी तारीख से पुन: स्थापित की गर्इ थी।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

