कतिपय वस्तुओं या चीजों के निर्यात के संबंध में विशेष उपबंध
कतिपय वस्तुओं या चीजों के निर्यात के संबंध में विशेष उपबंध
10खक. (1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, ऐसे लाभों और अभिलाभों की, जो किसी उपक्रम द्वारा पात्र वस्तुओं या चीजों का भारत से बाहर निर्यात करने से व्युत्पन्न हों, कटौती निर्धारिती की कुल आय से अनुज्ञात की जाएगी:
परन्तु जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपक्रम की कुल आय की संगणना करने में धारा 10क या धारा 10ख के अधीन कटौती का दावा किया गया है, वहां उपक्रम इस धारा के अधीन कटौती का हकदार नहीं होगा:
परन्तु यह और कि किसी भी उपक्रम को तारीख 1 अप्रैल, 2010 से प्रारंम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष तथा पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(2) यह धारा ऐसे किसी भी उपक्रम को लागू होती है, जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हैं, अर्थात्:–
(क) यह पात्र वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन आयातित कच्ची सामग्री का प्रयोग किए बिना करना है,
(ख) यह पहले से विद्यमान किसी कारबार को विभाजित करके या उसका पुनर्निर्माण करके नहीं बनाया गया है:
परन्तु यह शर्त ऐसे किसी प्रकार उपक्रम के संबंध में लागू नहीं होगी, जो धारा 33ख में यथानिर्दिष्ट किसी ऐसे उपक्रम के कारबार के निर्धारिती द्वारा पुनस्र्थापन, पुनर्निर्माण या पुन:चालू करने के परिणामस्वरूप उस धारा में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों और अवधि के भीतर बनाया गया है;
(ग) यह किसी प्रयोजन के लिए पहले से प्रायुक्त मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार में अंतरण करके नहीं बनाया गया है।
स्पष्टीकरण.–धारा 80झ की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के उपबंध इस खंड के प्रयोजनों के लिए ऐसे लागू होंगें जैसे वे उस धारा की उपधारा (2) के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं;
(घ) इसका निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान नब्बे प्रतिशत या उससे अधिक विक्रय पात्र वस्तुओं या चीजों के निर्यात के रूप में हुआ है;
(ड़) इसमें पूर्ववर्ष के दौरान बीस या उससे अधिक कर्मकार विनिर्माण या उत्पादन की प्रक्रिया में नियोजित है।
(3) यह धारा उपक्रम को उस दशा में लागू होती है यदि भारत से बाहर निर्यात की गर्इ पात्र वस्तुओं या चीजों के विक्रय आगम, निर्धारिती द्वारा पूर्ववर्ष की समाप्ति से छह मास के भीतर या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर, जो इस निमित्त सक्षम प्राधिकारी अनुज्ञात करे, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में भारत में प्राप्त की जाती है या भारत के भीतर लाए जाते हैं।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "सक्षम प्राधिकारी" पद से भारतीय रिज़र्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी अभिप्रेत है जो विदेशी मुद्रा में संदायों और व्यवहारों को विनियमित करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत किया जाए।
(4) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, पात्र वस्तुओं या चीजों के भारत से बाहर निर्यात करने से व्युत्पन्न लाभ ऐसी रकम होंगे जो उपक्रम के कारबार के लाभों की उसी अनुपात में है जो ऐसी वस्तुओं या चीजों के संबंध में निर्यात आवर्त का उस उपक्रम द्वारा किए जा रहे कारबार के कुल आवर्त से है।
(5) उपधारा (1) के अधीन कटौती तब तक अनुज्ञेय नहीं होगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ विहित प्ररूप में धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखापाल की रिपोर्ट, जिसमें यह प्रमाणित हो कि इस धारा के उपबंधों के अनुसार कटौती का सही रूप से दावा किया गया है, नहीं देता है।
(6) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां इस धारा के अधीन निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में कोर्इ कटौती अनुज्ञात की जाती है, वहां इसके निर्यात लाभों की बाबत किसी अन्य धारा में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(7) धारा 80झक की उपधारा और उपधारा (10) के उपबंध यावत्शक्य इस धारा में निर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में ऐसे लागू होंगे जैसे वे धारा 80झक में निर्दिष्ट उपक्रम के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (1999 का 42) तथा उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या तत्समय प्रवृत किसी अन्य तत्स्थानी विधि के प्रयोजनों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा समझा गया है;
(ख) "पात्र वस्तु या चीज" से हाथ से बनार्इ गर्इ सभी वस्तुएं या चीजें अभिप्रेत हैं जिनका कलात्मक मूल्य है और जिनमें काष्ठ का मुख्य कच्ची सामग्री के रूप में उपयोग अपेक्षित होता है।
(ग) "निर्यात आवर्त" से निर्धारिती द्वारा उपधारा (3) के अनुसरण में संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में भारत में प्राप्त की गर्इ या लार्इ गर्इ पात्र वस्तुओं या चीजों का उपक्रम द्वारा निर्यात किए जाने की बाबत प्रतिफल अभिप्रेत है किन्तु इसके अंतर्गत भारत से बाहर वस्तुओं या चीजों के परिदान के लिए माना जा सकने वाला भाड़ा प्रभार, दूरसंचार प्रभार या बीमा नहीं आता है;
(घ) "भारत के बाहर निर्यात" के अंतर्गत भारत में स्थित किसी दुकान, एम्पोरियम या किसी अन्य स्थापन में विक्रय के रूप में या अन्यथा रूप में ऐसा कोर्इ संव्यवहार नहीं आता, जिसमें सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) में यथा परिभाषित किसी कस्टम स्टेशन की निकासी अंतर्वलित नहीं है।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

