आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 10कक

विशेष आर्थिक जोनों में नए सिरे से स्थापित यूनिटों की बाबत विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

10कक

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - आय जो कुल आय का हिस्सा नहीं है

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

विशेष आर्थिक जोनों में नए सिरे से स्थापित यूनिटों की बाबत विशेष उपबंध

विशेष आर्थिक जोनों में नए सिरे से स्थापित यूनिटों की बाबत विशेष उपबंध

विशेष आर्थिक जोनों में नए सिरे से स्थापित यूनिटों की बाबत विशेष उपबंध

10कक. (1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसे निर्धारिती की, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड () में निर्दिष्ट उद्यमकर्ता है, उसकी ऐसी यूनिट से, जो 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 2021 के पूर्व प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन आरंभ करती है या कोई सेवा प्रदान करती है, कुल आय की संगणना करने में,–

(i) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें यूनिट, यथास्थिति, ऐसी वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन करना या सेवाएं प्रदान करना आरंभ करती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए ऐसी वस्तुओं या चीजों के निर्यात से या सेवाओं से व्युत्पन्न लाभों और अभिलाभों के सौ प्रतिशत की तथा अगले पांच निर्धारण वर्षों के लिए और उसके पश्चात् ऐसे लाभों और अभिलाभों के पचास प्रतिशत की;

(ii) आगामी पांच क्रमवर्ती वर्षों के लिए ऐसे लाभ के पचास प्रतिशत से अनधिक उतनी रकम की, जिसे उस पूर्ववर्ष को, जिसकी बाबत कटौती अनुज्ञात की जानी है; लाभ और हानि लेखे से विकलित किया गया हो, और उपधारा (2) में अधिकथित रीति में निर्धारिती के कारबार के प्रयोजनों के लिए सृजित और उपयोजित किए जाने वाले आरक्षित खाते में (जिसे "विशेष आर्थिक जोन पुनर्विनिधान आरक्षित खाता" कहा जाएगा) जमा किया गया हो,

कटौती अनुज्ञात की जाएगी।

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10कक कीे उपधारा (1) के खंड (ii) के पश्चात् और स्पष्टीकरण से पहले पंरतुक अंत:स्थापित किया जाएगा

परंतु ऐसी कोई कटौती किसी निर्धारिती को अनुज्ञात नहीं की जाएगी, जो धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उसके पूर्व आय की विवरणी प्रस्तुत नहीं करता है ।

20[स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस धारा के अधीन कटौती की रकम, इस धारा के उपबंधों को प्रभावी करने से पूर्व, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित निर्धारिती की कुल आय से अनुज्ञात की जाएगी और इस धारा के अधीन कटौती, निर्धारिती की ऐसी कुल आय से अधिक नहीं होगी।]

(2) उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन कटौती केवल उस दशा में अनुज्ञात की जाएगी, जब निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाती हैं, अर्थात् :–

() विशेष आर्थिक जोन पुनर्विनिधान आरक्षिति खाते में जमा रकम को–

(i) ऐसी मशीनरी या संयंत्र को अर्जित करने के प्रयोजनों के लिए, जिसको पहली बार उस पूर्ववर्ष के, जिसमें आरक्षिति सृजित की गई थी, आगामी तीन वर्षों की अवधि की समाप्ति से पूर्व उपयोग में लाया जाता है; और

(ii) पूर्वोक्त रूप में मशीनरी या संयंत्र का अर्जन किए जाने तक उपक्रम के कारबार, के ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो लाभांशों या लाभों के वितरण या भारत के बाहर लाभों के रूप में विप्रेषण या भारत के बाहर किसी आस्ति के सृजन से भिन्न हों,

उपयोजित किया जाय;

() निर्धारिती द्वारा मशीनरी या संयंत्र की बाबत ऐसी विशिष्टियां, जो धारा 10क की उपधारा (1ख) के खंड () के अधीन केन्द्रीय प्रत्यक्ष-कर बोर्ड द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट की जाएं, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें ऐसे संयंत्र या मशीनरी को पहली बार उपयोग में लाया गया था, सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी सहित प्रस्तुत कर दी गई है।

(3) जहां उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन विशेष आर्थिक जोन पुनर्विनिधान आरक्षिति खाते में जमा की गई किसी रकम को,–

() उपधारा (2) में निर्दिष्ट प्रयोजनों से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए उपयोजित किया गया है, इस प्रकार उपयोजित की गई रकम को; या

() उपधारा (2) के खंड () के उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व उपयोजित नहीं किया गया है, इस प्रकार उपयोजित न की गई रकम को,–

(i) खंड () में निर्दिष्ट दशा में, उस वर्ष में, जिसमें रकम इस प्रकार उपयोजित की गई थी; या

(ii) खंड () में निर्दिष्ट दशा में, उपधारा (2) के खंड () के उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट तीन वर्ष की अवधि के ठीक बाद आने वाले वर्ष में,–

लाभ समझा जाएगा और तद्नुसार उस पर कर प्रभारित किया जाएगा :

परंतु जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए यूनिट की कुल आय की संगणना करने के लिए उसके लाभ और अभिलाभ को धारा 10क की उपधारा (7ख) के उपबंधों को लागू करके सम्मिलित नहीं किया गया हो, वहां उपक्रम, जो यूनिट है, दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्ष की अनवस्ति अवधि के लिए ही इस उपधारा में निर्दिष्ट कटौती का हकदार होगा और तत्पश्चात् वह उपधारा (1) के खंड (ii) में उपबंधित रूप में आय से कटौती के लिए पात्र होगा।

स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि कोई उपक्रम, जो यूनिट है, जिसने विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 के प्रारंभ के पूर्व धारा 10क में निर्दिष्ट कटौतियों का दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों तक पहले ही लाभ उठा लिया है, तो ऐसी यूनिट इस धारा के अधीन आय से कटौती के लिए पात्र नहीं होगी :

परंतु यह और कि जहां आरंभ में किसी मुक्त व्यापार जोन या निर्यात प्रसंस्करण जोन में अवस्थित कोई यूनिट बाद में ऐसे मुक्त व्यापार जोन या निर्यात प्रसंस्करण जोन के विशेष आर्थिक जोन में संपरिवर्तन के कारण विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित हो जाती है, वहां ऊपर निर्दिष्ट दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि की संगणना, उस पूर्ववर्ष से, जिसमें यूनिट ने, ऐसे मुक्त व्यापार जोन या निर्यात प्रसंस्करण जोन में ऐसी वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन या प्रसंस्करण करना या सेवाएं प्रदान करना आरंभ किया था, सुसंगत निर्धारण वर्ष से की जाएगी:

परंतु यह भी कि जहां आरम्भ में किसी मुक्त व्यापार क्षेत्र या निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र में अवस्थित कोई यूनिट बाद में ऐसे मुक्त व्यापार जोन या निर्यात प्रसंस्करण जोन के विशेष आर्थिक जोन में संपरिवर्तन के कारण किसी विशेष आर्थिक जोन में अवस्थित हो जाती है और उसने ऊपर निर्दिष्ट दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि पूरी कर ली है, वहां वह 1 अप्रैल, 2006 से उपधारा (1) के खंड (ii) में यथा उपबंधित आय से कटौती के लिए पात्र नहीं होगी।

(4) यह धारा ऐसे किसी उपक्रम को जो यूनिट है, लागू होती है, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–

(i) इसने किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र में 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन करना अथवा सेवाएं प्रदान करना कर दिया है या ऐसा आरंभ करता है ;

(ii) इसे पहले से विद्यमान किसी कारबार को विभाजित करके या उसकी पुनर्संरचना करके नहीं बनाया गया है :

परंतु यह शर्त किसी ऐसे उपक्रम के संबंध में, जो यूनिट है, लागू नहीं होगी, जो किसी ऐसे उपक्रम के कारबार के निर्धारिती द्वारा, जो धारा 33ख में निर्दिष्ट है, उस धारा में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में और अवधि के भीतर पुनस्र्थापना, पुनर्संरचना या पुनरुद्धार के परिणामस्वरूप बनाया जाता है;

(iii) इसे पूर्व में किसी प्रयोजन के लिए प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र को किसी नए कारबार में अंतरित करके नहीं बनाया गया है।

स्पष्टीकरण–धारा 80झक की उपधारा (3) के स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के उपबंध इस उपधारा के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10कक कीे उपधारा (4) के पश्चात् उपधारा (4क) अंत:स्थापित की जाएगी

(4क) यह धारा ऐसी किसी इकाई को लागू होती है, यदि माल के विक्रय या सेवाओं के उपबंध से प्राप्त आगम निर्धारिती द्वारा भारत में संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में, पूर्ववर्ष के अंत से छह मास की अवधि के भीतर या ऐसी और अवधि के भीतर, जो सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त अनुज्ञात करे, प्राप्त होते हैं या लाए जाते हैं ।

स्पष्टीकरण 1—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "सक्षम प्राधिकारी" पद से भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा प्राधिकारी अभिप्रेत है, जो विदेशी मुद्रा में संदायों और व्यौहारों का विनियमन करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत है ।

स्पष्टीकरण 2—माल का विक्रय या सेवाओं का उपबंध उस समय भारत में प्राप्त किया गया समझा जाएगा, जहां ऐसी निर्यात आवर्त भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से भारत के बाहर किसी बैंक में निर्धारिती द्वारा इस प्रयोजन के लिए रखे गए किसी पृथक् खाते में जमा की जाती है ।

(5) जहां कोई ऐसा उपक्रम, जो यूनिट है, और जो इस धारा के अधीन कटौती का हकदार है, इस धारा में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के पूर्व किसी समामेलन या विलयन की स्कीम में किसी अन्य उपक्रम को, जो यूनिट है, अंतरित किया जाता है, वहां–

() उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन या विलयन होता है, समामेलक या विलयित यूनिट को, जो कंपनी है, कोई कटौती अनुज्ञेय नहीं होगी; और

() इस धारा के उपबंध समामेलक या विलयित कंपनी को उसी प्रकार लागू होंगे मानो समामेलन या विलयन हुआ ही न हो।

(6) धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 74 की उपधारा (1) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट हानि, जहां तक ऐसी हानि ऐसे उपक्रम, जो यूनिट है, के कारबार से संबंधित है, अग्रेषित या मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात की जाएगी।

(7) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, वस्तुओं या चीजों के निर्यात या सेवाओं से (जिसमें कंप्यूटर सॉफ्टवेयर भी है) व्युत्पन्न लाभ वह रकम होगी, जिसका ऐसे उपक्रम के, जो यूनिट है, कारबार के लाभ से वही अनुपात है, जो ऐसी वस्तुओं या चीजों के निर्यात या सेवाओं की बाबत निर्यात आवर्त का उपक्रम द्वारा किए जा रहे कारबार के कुल आवर्त से है :

परंतु यह कि इस उपधारा के उपबंध [वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2009 (2009 का 33) की धारा 6 द्वारा यथासंशोधित], 1 अप्रैल, 2006 से आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष तथा पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के लिए प्रभावी होंगे।

(8) धारा 10क की उपधारा (5) और (6) के उपबंध उपधारा (1) में निर्दिष्ट वस्तुओं या चीजों या सेवाओं को इस प्रकार लागू होंगे, मानो–

() "1 अप्रैल, 2001" अंकों और शब्द के स्थान पर "1 अप्रैल, 2006" अंक और शब्द रखे गए हों;

() "उपक्रम" शब्द के स्थान पर "उपक्रम, जो यूनिट है" शब्द रखे गऐ हों।

(9) धारा 80झक की उपधारा (8) और उपधारा (10) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा में निर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 80झक में निर्दिष्ट उपक्रम के प्रयोजन के लिए लागू होते हैं।

(10) जहां इस धारा के अधीन किसी कटौती का दावा किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 35कघ की उपधारा (8) के खंड () में निर्दिष्ट किसी विनिर्दिष्ट कारबार के लाभों की बाबत किया जाता है और उसे मंजूर किया जाता है, वहां उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए उस विनिर्दिष्ट कारबार के संबंध में धारा 35कघ के उपबंधों के अधीन कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) "निर्यात आवर्त" से उपक्रम द्वारा, जो यूनिट है, भारत में प्राप्त की गई या लाई गई वस्तुओं या चीजों के निर्यात या निर्धारिती द्वारा भारत में प्राप्त की गई या लाई गई, सेवाओं की बाबत प्रतिफल अभिप्रेत है, किन्तु इसके अंतर्गत भारत से बाहर वस्तुओं या चीजों के परिदान के कारण हुआ माना जा सकने वाला भाड़ा, दूर-संचार प्रभार या बीमा अथवा भारत से बाहर सेवाएं प्रदान करने में (जिसमें कंप्यूटर सॉफ्टवेयर भी है) विदेशी मुद्रा में उपगत व्यय, यदि कोई हो, सम्मिलित नहीं है;

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10कक के स्पष्टीकरण 1 के खंड (i) के स्थान पर खंड (i) और खंड (iक) प्रतिस्थापित किया जाएगा

(i) "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" का वही अर्थ होगा, जो धारा 10क के स्पष्टीकरण 2 के खंड (ii) में उसका है ;

(iक) "निर्यात आवर्त" से निर्धारिती द्वारा उपधारा (4क) के उपबंधों के अनुसार संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में भारत में प्राप्त की गई या लाई गई वस्तुओं या चीजों या सेवाओं के उपक्रम द्वारा, जो यूनिट है, निर्यात के संबंध में प्रतिफल अभिप्रेत है, किंतु इसके अंतर्गत भारत से बाहर वस्तुओं या चीजों के परिदान के कारण माने जा सकने वाले भाड़ा, दूर-संचार प्रभार या बीमा या भारत से बाहर सेवाएं (जिसमें कंप्यूटर साफ्टवेयर भी है) प्रदान करने में विदेशी मुद्रा में उपगत व्यय, यदि कोई हो, सम्मिलित नहीं है ;।

(ii) "विशेष आर्थिक जोन के संबंध में निर्यात" से भूमिमार्ग, समुद्री मार्ग, वायु मार्ग द्वारा या किसी अन्य ढंग द्वारा, चाहे शारीरिक या अन्यथा, विशेष आर्थिक जोन से भारत के बाहर माल ले जाना या सेवा प्रदान करना अभिप्रेत है;

(iii) "विनिर्माण" का वही अर्थ है जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खण्ड () में है;

(iv) "सुसंगत निर्धारण वर्ष" से इस धारा में निर्दिष्ट पंद्रह क्रमवर्ती निर्धारण वर्ष की अवधि के अंतर्गत आने वाला कोई निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है;

(v) "विशेष आर्थिक जोन" और "यूनिट" के वही अर्थ हैं जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यक) और (यग) में उनके हैं।

स्पष्टीकरण 2.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि भारत के बाहर कंप्यूटर साफ्टवेयर के स्थल पर विकास से (जिसके अंतर्गत साफ्टवेयर के विकास के लिए सेवा भी है) व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ भारत के बाहर कंप्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे।]

 

20. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट