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वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 6ड़क

वित्तीय संस्थाओं, बैंक आदि के डूबंत और ऋणों पर ब्याज के विषय में विशेष उपबंध

नियम संख्या.

6ड़क

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/12/2025

वित्तीय संस्थाओं, बैंक आदि के डूबंत और ऋणों पर ब्याज के विषय में विशेष उपबंध

*वित्तीय संस्थाओं, बैंक आदि के डूबंत और ऋणों पर ब्याज के विषय में विशेष उपबंध

6ड़क. धारा 43घ के उपबंध प्रत्येक लोक वित्तीय संस्था, अनुसूचित बैंक, राज्य वित्तीय निगम और राज्य औद्योगिक निवेश निगम की दशा में वहां लागू होंगे जहां ब्याज के रूप में इसकी आय डूबंत और शंकास्पद ऋणों की निम्नलिखित श्रेणियों से संबंधित है, अर्थात् :--

() (i) अव्यवहार्य और गलत अग्रिमों अर्थात् जहां उपखंड (ii) में विनिर्दिष्ट प्रकृति की अनियमितताएं छह मास या उससे अधिक की अवधि के लिए उधार लेने वाले के खातों में दिखार्इ पड़ती हैं और खातों को विनियमित किए जाने की कोर्इ न्यूनतम संभावनाएं नहीं हैं या जहां खाते या ऐसे खातों से संबंधित जानकारी रुग्णता के प्रायिक संकेतों को दर्शाते हैं, जैसे--

(1)  धीमे या नगण्य आवर्त्त के परिणामस्वरूप कारबार में स्पष्ट स्थिरता होना;

(2)  खाते में निधि की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना सीमा से अधिक धन निकालने या चैक जारी करने के लिए बारम्बार अनुरोध करना;

(3)  क्रय किए गए या मितिकाटा विनिमय पत्र तीन मास और उससे अधिक अवधि के लिए अतिदेय रहना या उधार लेने वाले से ऐसे विनिमय पत्रों की वसूली में कठिनार्इ होना;

(4)  आवधिक ऋणों की दशा में ऐसी किस्तें, जो 6 मास या अधिक अवधि से अतिदेय हों;

(5)  बैंक द्वारा अपेक्षित त्रैमासिक या अर्द्धवार्षिक परिचालन विवरणियों या स्टाक विवरणियों या तुलन-पत्रों और अन्य जानकारी के प्रस्तुत करने में उधार लेने वाले द्वारा अस्पष्ट विलम्ब होना;

(6)  निरीक्षणों के दौरान पार्इ गर्इ स्टाकों की धीमी गति या स्थिरता होना;

(7)  कारबार के निरीक्षण या निलम्बन या समापन के दौरान क्रियाकलाप का निम्न या नगण्य स्तर पाया जाना;

(8)  दस्तावेजों का निष्पादन, जब अपेक्षित हो, अतिरिक्त प्रतिभूति प्रस्तुत करने जैसी महत्त्वपूर्ण अपेक्षाओं के अनुपालन में निरंतर विलम्ब या ऐसी अपेक्षाओं का अननुपालन किया जाना;

(9)  ऐसी सिस्टर यूनिटों में निधियों का अपवर्जन या ऐसी पूंजी आस्तियों का अर्जन करना जो कारबार से सुसंगत नहीं हैं या उधार लेने वालों द्वारा बड़ी संख्या में निजी प्रत्याहार करना;

(10) परियोजना कार्यक्रमों का आशयित रूप से पालन न करना जिसके परिणाम- स्वरूप लागत में भारी वृद्धि होना और अतिरिक्त आवधिक-वित्त की आवश्यकता होना;

(11) नकदी पर दबाव जिसके परिणामस्वरूप कर्मकारों को मजदूरी या कार्यालय और कारखाने परिसर के कानूनी बकाया राशि या किराए का भुगतान न किया जाना;

(12) वर्तमान आस्तियों से वर्तमान दायित्व का अधिक होना;

(13) संपरीक्षकों द्वारा उधार लेने वालों की ओर से गंभीर अनियमितताएं की गर्इ पाना जिन्हें परिशुद्ध किया जाना बाकी है;

(14) यूनिट की वित्तीय विवरणियों से मूलभूत कमजोरी का पता चलना उदाहरण के लिए, एक वर्ष से अधिक लगातार नकदी की हानि बने रहना;

(ii) उधार लेने वालों के खातों में की, उपखंड (i) में निर्दिष्ट, अनियमितताएं निम्नलिखित हैं :–

 (1) जहां किसी अस्थायी अवधि के लिए खाते में आहरण शक्ति या स्वीकृत सीमा से अधिक अध्यादान कर लिया जाता है;

 (2) आवधिक ऋणों के संबंध में किस्तें छह मास से कम की अवधि के लिए अतिदेय हैं या प्रत्यय पत्र के अंतर्गत आयात बिल या अग्रणीत आस्थगित भुगतान के अंतर्गत किस्तें तीन मास से कम की अवधि के लिए अतिदेय हैं;

 (3) उधार लेने वाले के क्रय किए गए बिलों या मितिकाटा खाते में कुल बकाया के 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत से अनधिक बिलों का तीन मास से कम अवधि से भुगतान अतिदेय है और भुगतान न किए बिलों के संबंध में भविष्य में प्रतिदाय की तत्काल कोर्इ संभावना नहीं है।

() वापस लिए गए अग्रिम अर्थात् जहां प्रतिदाय अत्यधिक शंकास्पद हैं और यूनिट का पुन:प्रचलन उचित नहीं समझा जाता है तथा अग्रिमों को वापस लेने का निर्णय किया गया है।

() फाइल किए गए वाद से संबंधित खाते अर्थात् जहां विधिक कार्रवार्इ या वसूली की कार्यवाही आरंभ की गर्इ है और अग्रिमों की वसूली के लिए मुकदमा लंबित है।

() डिक्री किए गए ऋण अर्थात् जहां मुकदमे फाइल किए गए हैं और डिक्री प्राप्त कर ली गर्इ है तथा ऐसी डिक्री निष्पादन के लिए लंबित है।

() जिनकी ऋण वसूली प्रतिभूति के मूल्य में कमी, प्रतिभूतियों को लागू करने में और वसूल करने में कठिनार्इ या भागत: या पूर्णत: बैंक के बकायाओं का प्रतिदाय करने के लिए उधार लेने वाले की असमर्थता या अनिच्छुकता के कारण संदेहपूर्ण बन गर्इ है और ऐसे ऋण पूर्व खंड () से खंड () में सम्मिलित नहीं किए गए हैं।

 

* शीर्षक संपादक ने दिया है।

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