1[अधिनियम की धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (viiक) में निर्दिष्ट वार्षिक अभिवृद्धि।
3ख. अधिनियम की धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (vii क) के प्रयोजनों के लिए वार्षिक अभिवृद्धि पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान ब्याज, लाभांश अथवा अन्य कोई रकम जा समरूप प्रकृति की हो (जिसे इस नियम में इसके पश्चात् चालू पूर्ववर्ती वर्ष कहा गया है), अधिनियम की धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट निधि या स्कीम के जमा शेष वह रकम अथवा रकमों का योग होगा जिसकी गणना निम्नलिखित सूत्र के अनुसार की जाएगी:-
टीपी=(पीसी/2)* आर+(पीसी 1+टीपी 1)* आर
जहां,
टीपी = चालू पूर्ववर्ती वर्ष के लिए अधिनियम की धारा 17 के खंड 2 के उपखंड (viiक) के अधीन कर योग्य परिलब्धियां;
टीपी1 = चालू पूर्ववर्ती वर्ष से भिन्न, पूर्ववर्ती वर्ष या 1 अप्रैल, 2020 से आरंभ होने वाले वर्षों के लिए अधिनियम की धारा 17 के खंड 2 के उपखंड (vii क) के अधीन कर योग्य परिलब्धियों का योग्य (टिप्पण देखें);
पीसी = पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान नियोक्ता द्वारा विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम में 7.5 लाख रुपए से अधिक के मूल अंशदान की रकम अथवा रकमों का योग;
पीसी1 = पूर्वपर्ती चालू वर्ष से भिन्न 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले पूर्ववर्ती वर्ष अथवा वर्षों के लिए नियोक्ता द्वारा विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम में 7.5 लाख रुपए से अधिक के मूल अंशदान की रकम अथवा रकमों का योग (टिप्पण देखें);
आर = आई/एफ.ए.वी.जी.;
आई = चालू पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम खाते में प्रोदभूत आय की रकम अथवा रकमों का योग;
एफ.ए.वी.जी. = (चालू पूर्ववर्ती वर्ष के पहले दिन विनिर्दिष्ट निधि अथवा स्कीम में जमा शेष की रकम या रकमों या योग + चालू पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम दिन विनिर्दिष्ट निधि अथवा स्कीम में जमा शेष की रकम या रकमो या योग)/2.
स्पष्टीकरण : - इस नियम के प्रयोजनों के लिए "विनिर्दिष्ट निधि अथवा स्कीम" से अधिनियम की धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (vii) में निर्दिष्ट निधि अथवा स्कीम अभिप्रेत होगी।
टिप्पण : यदि चालू पूर्ववर्ती वर्ष के पहले दिन पर टीपी1 तथा पीसी1 की रकम या रकमों का योग विनिर्दिष्ट निधि अथवा स्कीम की रकम या रकमों के योग के जमा शेष से अधिक हो तो रकम या रकमों के योग के शेष को टीपी1 तथा पीसी1 के रकम या रकमों के योग की गणना हेतु उपेक्षित किया जाएगा।]
1. आय-कर (पहला संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंत:स्थापित।

