किसी अनिवासी, जो कोर्इ कंपनी न हो, या किसी विदेशी कंपनी को संदाय हेतु सूचना देना
37खख. (1) किसी अनिवासी को, जो कोर्इ कंपनी न हो, या किसी विदेशी कंपनी को अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य किसी रकम का संदाय करने हेतु उत्तरदायी व्यक्ति निम्नलिखित जानकारी देगा, अर्थात:–
(i) प्ररूप 15गक के भाग क में जानकारी, यदि वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए, यथास्थिति संदाय की रकम या ऐसे संदायों का कुल योग पांच लाख रुपये से अनधिक न हों;
(ii) खंड (i) में निर्दिष्ट संदायों से अन्यथा संदायों के लिए, जानकारी,–
(क) प्ररूप संख्या 15गक के भाग ख में निम्नलिखित को अभिप्राप्त करने के पश्चात्,–
(I) धारा 197 के अधीन निर्धारण अधिकारी से प्रमाणपत्र; या
(II) धारा 195 की उपधारा (2) या उपधारा (3) की अधीन निर्धारण अधिकारी से आदेश;
(ख) प्ररूप संख्या 15गक के भाग ग में, धारा 288 के उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथापरिभाषित किसी लेखाकार से प्ररूप संख्या 15गख में प्रमाण-पत्र अभिप्राप्त करने के पश्चात्।
(2) किसी अनिवासी को, जो कोर्इ कंपनी न हो, या किसी विदेशी कंपनी को अधिनियम के उपबंधों के अधीन अप्रभार्य किसी रकम का संदाय करने हेतु उत्तरदायी व्यक्ति निम्नलिखित जानकारी प्ररूप संख्या 15गक के भाग घ में देगा।
(3) उपनियम (2) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी रकम, जो अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रभार्य नहीं है के लिए कोर्इ जानकारी देना अपेक्षित नहीं है, यदि,–
(i) विप्रेषण किसी व्यष्टि द्वारा किया गया है और उसके लिए विदेशी विनिमय (चालू लेखा संव्यवहार) नियम, 2000 की अनुसूची III के साथ पठित विदेशी विनियम प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 5 के उपबंधों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक का पूर्व अनुमोदन अपेक्षित नहीं है ; या
1[(iक) विप्रेषण, धारा 80ठक की उपधारा (1क) में, निर्दिष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की यूनिट द्वारा किया गया है; या]
(ii) विप्रेषण नीचे विनिर्दिष्ट सूची के संतम्भ तीन में विनिर्दिष्ट प्रकृति का है:
विनिर्दिष्ट सूची
क्रम सं. |
आरबीआर्इ के अनुसार प्रयोजन कोड |
संदाय की प्रकृति |
(1) |
(2) |
(3) |
1 |
एस0001 |
विदेश में भारतीय विनिधान - साधारण पूंजी (शेयरों) में |
2 |
एस0002 |
विदेश में भारतीय विनिधान - ऋण प्रतिभूतियों में |
3 |
एस0003 |
विदेश में भारतीय विनिधान - शाखाओं और पूर्ण स्वामित्वाधीन समनुषंगियों में |
4 |
एस0004 |
विदेश में भारतीय विनिधान - समनुषंगियों और सहयुक्तों में |
5 |
एस0005 |
विदेश में भारतीय विनिधान - स्थावर संपदा में |
6 |
एस0011 |
अनिवासियों को विस्तारित ऋण |
7 |
एस0101 |
आयातों के विरूद्ध अग्रिम संदाय |
8 |
एस0102 |
बीजक के आयात निपटान हेतु संदाय |
9 |
एस0103 |
राजनयिक मिशनों द्वारा आयात |
10 |
एस0104 |
मध्यवर्ती व्यापार |
11 |
एस0190 |
5,00,000 रूपये से कम आयात (र्इसीडी अधिकारियों द्वारा उपयोग हेतु) |
12 |
एस0202 |
विदेश में प्रचालित भारतीय जहाजरानी कंपनियों के प्रचालन व्ययों का संदाय |
13 |
एस0208 |
विदेश में प्रचालित भारतीय हवार्इ कंपनियों के प्रचालन व्यय |
14 |
एस0212 |
विदेश में मार्ग का आरक्षण - हवार्इ कंपनिया |
15 |
एस0301 |
व्यवसाय यात्रा हेतु विप्रेषण |
16 |
एस0302 |
आधारभूत यात्रा कोटा (बीटीक्यू) के अधीन यात्रा |
17 |
एस0303 |
तीर्थ यात्रा हेतु यात्रा |
18 |
एस0304 |
चिकित्सा उपचार हेतु यात्रा |
19 |
एस0305 |
शिक्षा (जिसके अंतर्गत फीस, छात्रावास व्यय इत्यादि है) हेतु यात्रा |
20 |
एस0401 |
डाक सेवाएं |
21 |
एस0501 |
भारतीय कंपनियों द्वारा विदेश में परियोजनाओं का निर्माण, जिनके अंतर्गत प्रयोजना स्थल पर माल का आयात है |
22 |
एस0602 |
माल-भाड़ा बीमा-माल के आयात और निर्यात संबंधी |
23 |
एस1011 |
विदेश में कार्यालयों के अनुरक्षण हेतु संदाय |
24 |
एस1201 |
विदेश में भारतीय राजदूतावासों का अनुरक्षण |
25 |
एस1202 |
भारत में विदेशी राजदूतावासों द्वारा विपेषण |
26 |
एस1301 |
अनिवासियों द्वारा कुटंभ भरण पोषण और बचत हेतु विप्रेषण |
27 |
एस1302 |
व्यक्तिगत दान और संदान हेतु विप्रेषण |
28 |
एस1303 |
विदेश में धार्मिक और पूर्त संस्थाओं को संदान हेतु विप्रेषण |
29 |
एस1304 |
अन्य सरकारों और सरकारों द्वारा स्थापित पूर्त संस्थाओं को अनुदान और संदानों हेतु विप्रेषण |
30 |
एस1305 |
सरकार द्वारा अंर्तराष्ट्रीय संस्थाओं को अभिदान या संदान |
31 |
एस1306 |
करों के संदाय या प्रतिदाय हेतु विपे्रषण |
32 |
एस1501 |
निर्यात के कारण बीजक मूल्य में प्रतिदाय या रिबेट या घटाना |
33 |
एस1503 |
निवासियों द्वारा अंर्तराष्ट्रीय बोली लगाने हेतु संदाय |
(4) प्ररूप संख्या 15गक में जानकारी,–
(i) उपनियम (8) के अधीन प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) 2[या महानिदेशक आयकर (प्रणाली)] द्वारा विनिर्दिष्ट प्रक्रियों, प्ररूपों और मानकों के अनुसार डिजीटल हस्ताक्षर के अधीन इल्कट्रोनिक रूप में दी जाएगी और उसके पश्चात उक्त प्ररूप का मुद्रित रूप, संदाय के विप्रेषण के पूर्व, प्राधिकृत व्यौहारी को प्रस्तुत की जाएगी; या
(ii) उपनियम (8) के अधीन प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) 2[या महानिदेशक आयकर (प्रणाली)] द्वारा विनिर्दिष्ट प्रक्रियों, प्ररूपों और मानकों के अनुसार इल्कट्रोनिक रूप में दी जाएगी और उसके पश्चात उक्त प्ररूप का मुद्रित रूप, संदाय के विप्रेषण से पूर्व, प्राधिकृत व्यौहारी को प्रस्तुत की जाएगी।
(5) आयकर प्राधिकारी, अधिनियम के अधीन किन्हीं कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिए उपनियम (4) के खंड (ii) में विनिर्दिष्ट प्ररूप संख्या 15गक के हस्ताक्षरित मुद्रित प्ररूप को प्राधिकृत व्यौहारी से देने की अपेक्षा कर सकेगा।
(6) प्ररूप 15गक में प्रमाण-पत्र उपनियम (8) के अधीन प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) 2[या महानिदेशक आयकर (प्रणाली)] द्वारा विनिर्दिष्ट प्रक्रियों, प्ररूपों और मानकों के अनुसार इल्कट्रोनिक रूप में दिया जाएगा और सत्यापित किया जाएगा।
3[(7) वित्तीय वर्ष की प्रत्येक तिमाही के लिए उपनियम (1), (2) और उपनियम (3) में निर्दिष्ट सभी विप्रेषणों के संबंध में एक त्रैमासिक विवरण, -
(i) प्राधिकृत व्यौहारी द्वारा प्ररूप सं. 15गग में;
(ii) धारा 80ठक की उपधारा (1क) में, निर्दिष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की यूनिट द्वारा, जो किसी अनिवासी को जो कंपनी नहीं है या किसी विदेशी कंपनी को भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, प्ररूप सं. 15गघ में,
प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) या महानिदेशक आयकर (प्रणाली) को या प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) या महानिदेशक आयकर (प्रणाली) द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को, उपनियम (8) के उधीन प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) या महानिदेशक आयकर (प्रणाली) के द्वारा विनिर्दिष्ट प्रक्रिया, रूपविधान और मानकों के अनुसार वित्तीय वर्ष, जिससे ऐसे विवरण संबंधित है की तिमाही की समाप्ति से पंद्रह दिन के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर के अधीन इलैक्ट्रानिकी रूप में प्रस्तुत करेगा]
4[(8) प्रधान महानिदेशक आयकर (प्रणाली) या महानिदेशक आयकर (प्रणाली), प्ररूप सं. 15गक, प्ररूप सं. 15गख, प्ररूप सं. 15गग और प्ररूप सं. 15गघ को प्रस्तुत करने और सत्यापन के प्रयोजन हेतु प्रक्रियाएं, रूपविधान और मानक विनिर्दिष्ट करेगा और उपनियम (4), (6) तथा उपनियम (7) के उपबंधो के अनुसार सूचना, प्रमाणपत्र और त्रैमासिक विवरण प्रस्तुत करने या सत्यापन करने के संबंध में दिन-प्रतिदिन के प्रशासन के लिए उत्तरदायी होगा।];
5[स्पष्टीकरण.—इस नियम के प्रयोजनों के लिए,—
(i) "प्राधिकृत व्यौहारी" से विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन कोई प्राधिकृत व्यौहारी के रूप में प्राधिकृत कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;
(ii) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो उसे विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (थ) में दिया गया है;
(iii) "यूनिट" का वही अर्थ होगा जो उसे विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (यग) में दिया गया है]

