आरोप-पत्र ।
262. (1) जहां विहित प्राधिकारी की अपने कब्जे में सूचना के आधार पर, यह राय है कि प्रथम दृष्टया किसी आयकर कार्यवाही के संबंध में प्राधिकृत आयकर व्यवसायी कदाचार का दोषी वह आयकर व्यवसायी के विरुद्ध निश्चित आरोप तैयार करेगा और उन पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में अभिकथन के विवरण के साथ उन्हें लिखित में सूचित करेगा।
(2) प्राधिकृत आयकर व्यवसायी को ऐसे समय के भीतर, जैसा कि विहित प्राधिकारी द्वारा निर्दिष्ट किया जाए, अपनी प्रतिरक्षा का कोई लिखित कथन प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित होगा और यह भी कथन करना होगा कि क्या वह व्यक्तिगत रूप से सुने जाने की ईप्सा रखता है।

