वित्तीय संव्यवहारों के विवरण का प्रस्तुत किया जाना
114ड़. (1) अधिनियम की धारा 285खक की उपधारा (1) के अधीन प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित वित्तीय संव्यवहारों का विवरण, किसी वित्तीय वर्ष के संबंध में प्ररूप सं. 61क में प्रस्तुत किया जाएगा और उसे उसमें उपदर्शित रीति में सत्यापित किया जाएगा।
(2) उपनियम (1) में निर्दिष्ट विवरण, नीचे दी गई सारणी के स्तंभ (3) में उल्लिखित प्रत्येक व्यक्ति द्वारा उपनियम (3) के उपबंधों के अनुसार उक्त सारणी के स्तंभ (2) में की तत्स्थानी प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट ऐसे सभी संव्यवहारों की प्रकृति और मूल्य के संबंध में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसे उसके द्वारा 1 अप्रैल, 2016 को या उसके पश्चात् रजिस्ट्रीकृत या लेखबद्ध किया गया है, अर्थात्:–
| क्रम सं. | संव्यवहार की प्रकृति और मूल्य | व्यक्ति का वर्ग (रिपोर्टिंग व्यक्ति) |
| (1) | (2) | (3) |
| 1. | (क) किसी वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपए या अधिक के कुल मूल्य वाले बैंक ड्राफ्टों या संदाय आदेशों या बैंकर चेक के क्रय के लिए नकद में किए गए संदाय। (ख) वित्तीय वर्ष के दौरान कुल दस लाख रुपए या अधिक के नकद के संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (2007 का 51) की धारा 18 के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी पूर्व संदत्त लिखतों के क्रय के लिए किए गए संदाय। (ग) किसी वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति के एक या अधिक चालू खाते में या उससे पचास लाख रुपए या अधिक के कुल नकद निक्षेप या नकद निकाला जाना (जिसके अंतर्गत वाहक चैक) के माध्यम से निकाली गई रकम भी है।) |
कोई बैंककारी कंपनी या कोई सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत) उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है)। |
| 2. | किसी एक वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति के एक या अधिक खातों (चालू खाते और सावधि निक्षेप से भिन्न खाते) में दस लाख रुपए या अधिक के कुल मूल्य के नकद निक्षेप। | (i) कोई बैंककारी कंपनी या कोई सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है)। (ii) भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1898 का 6) की धारा 2 के खंड (ञ) में यथानिर्दिष्ट पोस्टमास्टर जनरल6। |
| 3. | किसी व्यक्ति के एक या अधिक सावधि निक्षेपों (किसी अन्य सावधि निक्षेप के नवीकरण के माध्यम से किए गए सावधि निक्षेप से भिन्न) में किसी वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपए या अधिक की कुल रकम का सावधि निक्षेप। | (i) कोई बैंककारी कंपनी या कोई सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है)। (ii) भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1898 का 6) की धारा 2 के खंड (ञ) में यथानिर्दिष्ट पोस्टमास्टर जनरल। (iii) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 406 में निर्दिष्ट निधि7; (iv) ऐसी कोई गैर बैंककारी वित्तीय कंपनी, जो जनता से निक्षेप धारण या स्वीकार करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 7a[(1934 का 2)] की धारा 45झक के अधीन रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र धारण करती है। |
| 4. | किसी व्यक्ति द्वारा किए गए निम्नलिखित कुल रकम के संदाय- (i) नकद में एक लाख या अधिक; या (ii) किसी अन्य पद्धति द्वारा दस लाख रुपए या अधिक, जिसका संदाय उस व्यक्ति द्वारा किसी वित्तीय वर्ष में, उसे जारी एक या अधिक क्रेडिट कार्ड के संबंध में जारी बिल के लिए किया गया है। |
कोई बैंककारी कंपनी या कोई सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है) या क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कोई अन्य कंपनी या संस्था। |
| 5. | किसी व्यक्ति से किसी वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपए या अधिक की रकम की प्राप्ति, जिसे कंपनी या संस्था द्वारा जारी बंधपत्रों या डिबेंचरो के अर्जन के लिए प्राप्त किया गया है (उस कंपनी द्वारा जारी बंधपत्र या डिबेंचर के नवीकरण के मुद्दे प्राप्त रकम से भिन्न) | बंधपत्र या डिबेंचर जारी करने वाली कोई कंपनी या संस्था। |
| 6. | किसी व्यक्ति से दस लाख रूपए या अधिक की कुल रकम की प्राप्ति, जिसे किसी वित्तीय वर्ष में कंपनी द्वारा जारी शेयरों का अर्जन करने के लिए प्राप्त किया गया है (जिसके अंतर्गत शेयर आवेदन धन भी है)। | शेयर जारी करने वाली कोई कंपनी। |
| 7. | किसी व्यक्ति से क्रय द्वारा शेयर वापिस लेना (खुले बाजार में क्रय किए गए शेयरों से भिन्न) जिसके लिए किसी वित्तीय वर्ष में दस लाख रुपए या अधिक की कुल रकम या मूल्य के लिए संदाय किया गया है। | कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 68 के अधीन अपनी स्वयं की प्रतिभूतियों का क्रय करने के लिए किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कोई कंपनी। |
| 8. | किसी व्यक्ति से, किसी वित्तीय वर्ष में किसी परस्पर निधि की एक या अधिक स्कीमों के यूनिटों का अर्जन करने के लिए दस लाख रुपए या अधिक की कुल रकम की प्राप्ति (उस परस्पर निधि की एक स्कीम से अन्य स्कीम में अंतरण के मद्दे प्राप्त रकम से भिन्न) | किसी परस्पर निधि का कोई न्यासी या ऐसा अन्य व्यक्ति, जो उस परस्पर निधि के कार्यों का प्रबंधन कर रहा है, जिसे न्यासी द्वारा इस निमित सम्यक रूप से प्राधिकृत किया गया है। |
| 9. | किसी व्यक्ति से विदेशी मुद्रा के विक्रय के लिए, जिसके अंतर्गत किसी विदेशी विनिमय में ऐसी मुद्रा का कोई प्रत्यय या डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऐसी मुद्रा का व्यय या कोई यात्री चैक या ड्राफ्ट जारी करके या किसी अन्य लिखत द्वारा ऐसी मुद्रा में किसी वित्तीय वर्ष के दौरान दस लाख रुपए या अधिक की कुल रकम के व्यय के लिए प्राप्ति। | विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2 के खंड (ग) में यथा निर्दिष्ट प्राधिकृत व्यक्ति8। |
| 10. | किसी व्यक्ति द्वारा किसी स्थावर संपत्ति का क्रय या विक्रय जिसकी कीमत तीस लाख रुपए या अधिक है या जिसका मूल्य स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा अधिनियम की धारा 50ग में निर्दिष्ट किए गए अनुसार तीस लाख रुपए या अधिक निश्चित किया गया है। | रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 3 के अधीन नियुक्त महानिरीक्षक या उस अधिनियम की धारा 6 के अधीन नियुक्ति रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार। |
| 11. | किसी व्यक्ति द्वारा किसी प्रकृति के माल या सेवाओं के विक्रय के लिए दो लाख रुपए से अधिक के नकद संदाय की प्राप्ति (इस नियम के क्रम सं. 1 से 10 में विनिर्दिष्ट से भिन्न, यदि कोई हों)। | ऐसा कोई व्यक्ति जो अधिनियम की धारा 44कख के अधीन लेखापरीक्षा के लिए दायी है। |
| 12. | नवम्बर, 2016 से 30 दिसम्बर, 2016 की कालावधि के दौरान नकद जमा– (i) किसी व्यक्ति के एक या अधिक चालू खाते में बारह लाख पचास हजार रुपए या अधिक; या (ii) किसी व्यक्ति के (चालू खाते से भिन्न) एक या अधिक खातों में दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक। |
(i) कोई बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक, जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था सम्मिलित है); (ii) भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1898 का 6) की धारा 2 के खंड (ञ) में यथानिर्दिष्ट महा डाकपाल। |
| 9[13. | ऐसे खातों जो क्रम संख्यांक 12 के अधीन रिपोर्ट करने योग्य है, के संबंध में 1 अप्रैल, 2016 से 9 नवंबर, 2016 तक की अवधि के दौरान नकद जमा। | (i) ऐसी कोई बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है) लागू होता है; (ii) भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 (1898 का 6 की धारा 2 के खंड (ञ) में यथानिर्दिष्ट महा-डाकपाल।] |
(3) सारणी के स्तंभ (3) में उल्लिखित रिपोर्टिंग व्यक्ति, उपनियम (2) के अधीन(क्रम सं. 10 और क्रम सं. 11 पर के व्यक्तियों से भिन्न), उक्त सारणी के स्तंभ (2) में यथाविनिर्दिष्ट किसी व्यक्ति के संबंध में रिपोर्ट किए जाने के लिए अवसीमा रकम का अवधारण करने के लिए,–
(क) वित्तीय वर्ष के दौरान उस व्यक्ति के संबंध में बनाए रखे गए उक्त सारणी के स्तंभ (2) में यथाविनिर्दिष्ट समान प्रकृति के सभी खातों को ध्यान में रखेगा;
(ख) वित्तीय वर्ष के दौरान उस व्यक्ति के संबंध में लेखबद्ध उक्त सारणी के स्तंभ (2) में यथाविनिर्दिष्ट समान प्रकृति के सभी संव्यवहारों के कुल योग को ध्यान में रखेगा;
(ग) उस दशा में, जहां खातों को एक से अधिक व्यक्ति के नाम पर रखा जाता है या संव्यवहार को एक से अधिक व्यक्ति के नाम पर लेखबद्ध किया जाता है, वह संव्यवहार या सभी संव्यवहारों के कुल मूल्य के संपूर्ण मूल्य को सभी व्यक्तियों पर गुणरोपित करेगा;
(घ) उक्त सारणी के क्रम सं. 1 के सामने स्तंभ (2) के अधीन मद (ग) में विनिर्दिष्ट संव्यवहार के संबंध में अवसीमा को पृथक रूप से निक्षेपों और आहरणों को लागू करेगा।
(4) (क) विवरण को, उपनियम (1) में विनिर्दिष्ट प्ररूप सं. 61क में आय कर निदेशक (आसूचना और आपराधिक अन्वेषण) या आयकर संयुक्त निदेशक (आसूचना और आपराधिक अन्वेषण) को उपनियम (7) में विनिर्दिष्ट व्यक्ति के अंकीय हस्ताक्षर के अधीन इस प्रयोजन के लिए पदाभिहित किसी सर्वर को इलैक्ट्रोनिक डाटा के आनलाइन पारेषण के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा और यह आय कर प्रधान महानिदेशक (प्रणाली) द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट डाटा संरचना के अनुसार किया जाएगा:
परंतु रिपोर्टिंग व्यक्ति के उपनियम (2) में निर्दिष्ट पोस्टमास्टर जनरल या रजिस्ट्रार या कोई महानिरीक्षक होने की दशा में, प्ररूप 61क में दिए जाने वाले उक्त विवरण को किसी कंप्यूटर में पठनीय मीडिया में प्रस्तुत किया जा सकेगा जो कि कोई कंपेक्ट डिस्क या डिजिटल वीडियो डिस्क (डीवीडी) के रूप में हो सकेगी और उसके साथ पत्र में प्ररूप V में सत्यापन प्रस्तुत किया जाएगा।
स्पष्टीकरण - इस उपनियम के प्रयोजनों के लिए, "अंकीय हस्ताक्षर" से किसी ऐसे प्रमाणन प्राधिकारी द्वारा, जो प्रमाणन प्राधिकरण के नियंत्रक द्वारा ऐसे प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्राधिकृत है, जारी कोई अंकीय हस्ताक्षर अभिप्रेत है।
(ख) आयकर प्रधान महानिदेशक (प्रणाली) डाटा तक सुरक्षित पहुंच और उसके पारेषण के लिए उपयुक्त सुरक्षा विकसित करने और उसे कार्यान्वित करने, आर्किवल और रिट्रीवल नीतियों को सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाएं, डाटा संरचनाएं और मानक विनिर्दिष्ट करेगा।
(ग) बोर्ड विवरणियों या विवरणों को प्रस्तुत करने के संबंध में दिन प्रतिदिन के प्रशासन के प्रयोजनों के लिए सूचना विवरण प्रशासक के रूप में किसी अधिकारी को पदाभिहित कर सकेगा, जो आय कर संयुक्त निदेशक की रैंक से न्यून नहीं होगा।
(5) उपनियम (1) में निर्दिष्ट वित्तीय संव्यवहारों के विवरण को उस वित्तीय वर्ष, जिसमें संव्यवहार रजिस्ट्रीकृत या लेखबद्ध किया गया था, से ठीक पश्चात 31 मई को या उससे पूर्व प्रस्तुत किया जाएगा :
परंतु उपनियम (2) के अधीन सारणी में क्रम सं. 12 10[और क्रम सं.13] में सूचीबद्ध संव्यवहारों के संबंध में वित्तीय संव्यवहार की विवरणी 31 जनवरी, 2017 को या उससे पूर्व प्रस्तुत की जाएगी।
11[(5क) आय विवरणी भरने से पूर्व के प्रयोजनों के लिए, अधिनियम की धारा 285खक की उपधारा (1) के अधीन, एक वित्तिय संव्यवहार का विवरण, जिसमें नीचे सारणी के स्तंभ (2) में उल्लिखित, सूचीबद्ध प्रतिभूतियों या म्यूचल फंडस, लाभांश आय तथा ब्याज आय की इकाईयों के संव्यवहार पर लाभ से संबंधित जानकारी सम्मिलित हो, उक्त सारणी के स्तंभ 3 में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा ऐसे प्ररूप, अंतरा और रूप में दी जाएगी जैसा की बोर्ड के अनुमोदन सहित यथास्थिती प्रधान आयकर महानिदेशक (पद्धति) या आयकर महानिदेशक (पद्धति) द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया है।
तालिका
| क्रं. सं. | संव्यवहार की प्रकृति | व्यक्ति का वर्ग {रिपोर्टिंग व्यक्ति} |
| (1) | (2) | (3) |
1. |
म्यूचल फंडस ईकाई या सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के संव्यवहार पर अभिलाभ |
(i) मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज (ii) निक्षेपागार अधिनियम 1996 की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ड) में परिभाषित निक्षेपागार (iii) मान्यता प्राप्त समाशोधन निकाय; (iv) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम 1992 (1992 के 15) की धारा 12 की उपधारा के अंतर्गत पंजीकृत अंश जारी व हस्तांतरण अभिकर्ता व रजिस्ट्रार |
| 2. | लाभांश आय | कंपनी |
3. |
ब्याज आय |
(i) बैंकिग कंपनी अथवा सहकारी बैंक जिसमें बैंकिग विनिमय अधिनियम 1949 (1949 का 10) उक्त अधिनियम की धारा 51 में वर्णित किसी बैंक अथवा बैंकिग संस्थानों सहित लागू होता है। (ii) भारतीय डाक घर अधिनियम 1898 (1898 का 6) की धारा 2 के खंड 1 में निर्दिष्ट मुख्य पोस्टमास्टर (iii) गैर-बैंकिग आर्थिक कंपनी जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 (1934 का 6) की धारा 45-1क के अधीन जनसाधारण से जमा राशि लेने या रखने, पंजीकरण प्रमाण पत्र रखती है। |
स्पष्टीकरण :- इस नियम के प्रयोजन के लिए,-
(क) सूचीबद्ध प्रतिभूतियों से वह प्रतिभूतियां अभिप्रेत है जो भारत में मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है।
(ख) म्यूचल फंड से धारा 10 के खंड (23घ) के अंतर्गत विनिर्दिष्ट म्यूचल फंड अभिप्रेत है।
(ग) मान्यताप्राप्त समाशोधन निकाय विनियम का अर्थ वही होगा जो कि प्रतिभूति संविदा अधिनियम 1956 (1956 का 42) एवं भारतीय प्रतिभूति व विनियमबोर्ड अधिनियम 1992 (1992 का 15) के अंतर्गत प्रतिभूति संविदा (विनियम) स्टॉक विनियम व समाशोधन निकाय के विनियम के उपविनियम (1) के खंड (ण) में नियत किया गया है।
(घ) मान्यताप्राप्त स्टॉक विनिमय का अर्थ प्रतिभूति संविदा (विनियम) अधिनियम 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (च) में नियत मान्यताप्राप्त स्टॉक विनियम होगा।
(ड.) प्रतिभूति का अर्थ वही होगा जैसा कि प्रतिभूति संविदा (विनिमय) अधिनियम 1956 की धारा 2 के खंड (ज) में नियम किया गया है।]
(6) (क) उपनियम (2) के अधीन सारणी स्तंभ (3) 12[और उपनियम (5क) के अधीन सारणी का स्तंभ (3)] में उल्लिखित प्रत्येक रिपोर्टिंग व्यक्ति आय कर प्रधान महानिदेशक (प्रणाली) को पदाभिहित निदेशक और प्रधान अधिकारी का नाम, पदनाम, पता और टेलीफोन नं. संसूचित करेगा और उससे एक रजिस्ट्रीकरण संख्यांक अभिप्राप्त करेगा।
(ख) उपनियम (2) के अधीन सारणी के स्तंभ (3) 12[और उपनियम (5क) के अधीन सारणी का स्तंभ (3)] में विनिर्दिष्ट प्रत्येक व्यक्ति, उसके पदाभिहित निदेशक, प्रधान अधिकारी और कर्मचारियों का यह कर्तव्य होगा कि वह उसके विनियामक द्वारा यथाविनिर्दिष्ट सूचना को बनाए रखने संबंधी प्रक्रिया और रीति का पालन करें तथा अधिनियम की धारा 285खक और इस नियम तथा नियम 114ख से 114घ के अधीन अधिरोपित बाध्यताओं का अनुपालन सुनिश्चित करें।
स्पष्टीकरण 1 - "पदाभिहित निदेशक" से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसे रिपोर्टिंग व्यक्ति द्वारा अधिनियम की धारा 285खक और इस नियम तथा नियम 114ख से 114घ के अधीन अधिरोपित बाध्यताओं का सकल अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पदाभिहित किया गया है और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं–
(i) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) में यथा परिभाषित प्रबंध निदेशक या कोई पूर्णकालिक निदेशक 12a, जिसे यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति कोई कंपनी है तो निदेशक बोर्ड द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत किया गया है;
(ii) यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति कोई भागीदारी फर्म है तो प्रबंध भागीदार;
(iii) यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति कोई स्वायत्त इकाई है तो उसका स्वामी;
(iv) यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति कोई न्यास है तो प्रबंध न्यासी;
(v) यदि रिपोर्टिंग व्यक्ति कोई अनिगमित संगम या व्यष्टिक निकाय या कोई अन्य व्यक्ति है तो, यथास्थिति, ऐसा कोई व्यक्ति या व्यष्टि, जो रिपोर्टिंग अस्तित्व के कार्यों का नियंत्रण और प्रबंध करता है।
स्पष्टीकरण 2 - "प्रधान अधिकारी" से ऐसा कोई अधिकारी अभिप्रेत है जिसे उपनियम (2) की सारणी 12[और उपनियम (5क) की सारणी] में निर्दिष्ट रिपोर्टिंग व्यक्ति द्वारा पदाभिहित किया गया है।
स्पष्टीकरण 3 - "विनियामक" से ऐसा कोई व्यक्ति या प्राधिकरण या कोई सरकार अभिप्रेत है जिसमें उपनियम (2) की सारणी 12[और उपनियम (5क) की सारणी] में निर्दिष्ट रिपोर्टिंग व्यक्ति के क्रियाकलापों का विनियमन या अधीक्षण करने या उसे अनुज्ञप्ति प्रदान करने, उसे प्राधिकृत, रजिस्ट्रीकृत, विनियमित करने की शक्ति निहित है।
(7) उपनियम (1) 12[और उपनियम (5क) में निर्दिष्ट] वित्तीय संव्यवहार के विवरण को उपनियम (6) में विनिर्दिष्ट पदाभिहित निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित, सत्यापित और प्रस्तुत किया जाएगा:
परंतु जहां रिपोर्टिंग व्यक्ति अनिवासी है, वहां विवरण को ऐसे व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित, सत्यापित और प्रस्तुत किया जा सकेगा, जो पदाभिहित निदेशक से विधिमान्य मुख्तारनामा धारण करता है।
6. 'पोस्टमास्टर जनरल' और 'निधि' की परिभाषा के लिए परिशिष्ट देखिए।
7. 'पोस्टमास्टर जनरल' और 'निधि' की परिभाषा के लिए परिशिष्ट देखिए।
7a. आय-कर (चौथा संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 12.3.2021 से "(1934 का 6) " के स्थान पर प्रतिस्थापित।
8. 'प्राधिकृत व्यक्ति' की परिभाषा के लिए परिशिष्ट देखिए।
9. आय-कर (पहला संशोधन) नियम, 2017 द्वारा 6.1.2017 से अंत:स्थापित।
10. आय-कर (पहला संशोधन) नियम, 2017 द्वारा 6.1.2017 से अंत:स्थापित।
11. आय-कर (चौथा संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 12.3.2021 से अंत:स्थापित।
12. आय-कर (चौथा संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 12.3.2021 से अंत:स्थापित।
12a. "निदेशक/प्रबंध निदेशक" की परिभाषा के लिए परिशिष्ट देखिए।

