धारा 92ग के अधीन निकटतम कीमत का अवधारण
10ख. (1) धारा 92ग की उपधारा (2) के प्रयोजनों के लिए, अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के संबंध में निकटतम कीमत निम्नलिखित पद्धतियों में से किसी एक पद्धति द्वारा, जो सर्वाधिक उपयुक्त पद्धति हो, निम्नलिखित रीति में अवधारित की जाएगी, अर्थात् :—
(क) तुलनीय अनियंत्रित कीमत पद्धति, जिसके द्वारा,—
(i) ऐसी कीमत, जो अंतरित संपत्ति के लिए अथवा तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहार में या ऐसे कर्इ संव्यवहारों में उपबंधित सेवाओं के लिए प्रभारित या संदत्त की जाती है, एकसम की जाती है;
(ii) ऐसी कीमत, अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार और तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहार के बीच या ऐसे संव्यवहार करने वाले उद्यमों के बीच, जो खुले बाजार में कीमत को पर्याप्त रूप में प्रभारित कर सकते हैं, अंतर संबंधी लेखा में समायोजित की जाती है;
(iii) ऐसी समायोजित कीमत, जो उपखंड (ii) के अधीन निकाली गर्इ है, अंतरित संपत्ति या अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार में उपबंधित सेवाओं के बारे में निकटतम कीमत मानी जाती है;
(ख) पुनर्विक्रय कीमत पद्धति, जिसके द्वारा,—
(i) ऐसी कीमत, जिस पर उद्यम द्वारा किसी सहयुक्त उद्यम से क्रय की गर्इ संपत्ति का पुनर्विक्रय किया जाता है या ली गर्इ सेवाएं किसी असंबद्ध उद्यम को उपलब्ध करार्इ जाती है, एकसम की जाती है;
(ii) ऐसी पुनर्विक्रय कीमत में से, किसी तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहार या ऐसे कर्इ संव्यवहारों में उस संपत्ति या वैसी ही संपत्ति के क्रय और पुनर्विक्रय से या उन सेवाओं या वैसी ही सेवाओं को प्राप्त करने या उपलब्ध कराने से उस उद्यम या किसी असंबद्ध उद्यम को होने वाले सामान्य सकल लाभ मार्जिन की रकम कम की जाती है;
(iii) इस प्रकार निकाली गर्इ कीमत में से, संपत्ति के क्रय या प्राप्त सेवाओं के संबंध में उद्यम द्वारा किए गए व्ययों को और कम किया जाता है;
(iv) इस प्रकार निकाली गर्इ कीमत को, फलनीय और अन्य अंतर को, जिनके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार और तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहारों के बीच अथवा ऐसे संव्यवहारों को करने वाले उद्यमों के बीच लेखांकन पद्धति में अंतर, यदि कोर्इ हो जो खुले बाजार में सकल लाभ मार्जिन की रकम को पर्याप्त रूप से प्रभावित कर सकते हैं, हिसाब में लेने के लिए समायोजित किया जाता है;
(v) खंड (iv) के अधीन निकाली गर्इ समायोजित कीमत उद्यम द्वारा सहयुक्त उद्यम से संपत्ति के क्रय या सेवाओं को प्राप्त करने की बाबत निकटतम कीमत मानी जाती है;
(ग) लागत (खर्च) जमा पद्धति, जिसके द्वारा,—
(i) ऐसे उद्यम द्वारा किसी सहयुक्त उद्यम को अंतरित संपत्ति या उपलब्ध करार्इ गर्इ सेवाओं की बाबत किए गए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उत्पादन खर्चों का अवधारण किया जाता है;
(ii) ऐसे उद्यम द्वारा या किसी असंबद्ध उद्यम द्वारा किसी तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहार में या ऐसे कर्इ संव्यवहारों में उस या उसी प्रकार की संपत्ति के अंतरण से या उस या उसी प्रकार की सेवाओं का उपबंध किए जाने से उद्भूत ऐसे खर्चों के (उसी लेखांकन मापदंड के अनुसार संगणित) सामान्य सकल लाभ लक्ष्य (मार्क-अप की) रकम का अवधारण किया जाता है;
(iii) उपखंड (ii) में निर्दिष्ट सामान्य सकल लाभ मार्क-अप को, अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार और तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहारों के बीच अथवा ऐसे संव्यवहारों को करने वाले उद्यमों के बीच फलनीय और अन्य अंतर को, यदि कोर्इ हो, जो खुले बाजार में ऐसे लाभ मार्क-अप को पर्याप्त रूप से प्रभावित कर सकता है, हिसाब में लेने के लिए समायोजित किया जाता है;
(iv) उपखंड (i) में निर्दिष्ट खर्चों में उपखंड (iii) के अधीन निकाले गए समायोजित लाभ मार्क-अप बढ़ाया जाता है;
(v) इस प्रकार निकाली गर्इ राशि उद्यम द्वारा संपत्ति के प्रदाय या सेवाओं का उपबंध करने के संबंध में निकटतम कीमत मानी जाती है;
(घ) लाभ विभाजन पद्धति, जो मुख्यतया ऐसे अंतरराष्ट्रीय संव्यवहारों या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहारों में, जिनमें अनुपम अमूर्त सपंत्तियों का अंतरण अंतर्वलित हो, या बहुविध अंतरराष्ट्रीय संव्यवहारों या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहारों में, जो आपस में इतने जुड़े हों कि उनका किसी एक संव्यवहार में निकटतम कीमत का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए पृथक्तया मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, लागू हो सकेगी, जिसके द्वारा,—
(i) ऐसे अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार से, जिनमें सहयुक्त उद्यम लगे हुए हों, उनके सम्मिलित शुद्ध लाभ का अवधारण किया जाता है;
(ii) ऐसे सम्मिलित शुद्ध लाभ के उपार्जन के प्रति सहयुक्त उद्यमों में से प्रत्येक द्वारा किए गए सापेक्ष अभिदाय का तब प्रत्येक उद्यम द्वारा किए गए कृत्यों, प्रयुक्त या प्रयुक्त की जाने वाली आस्तियों और कल्पित जोखिमों के आधार पर तथा उस विश्वसनीय बाह्य मार्किट डाटा के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है, जिससे यह उपदर्शित होता हो कि वैसी ही परिस्थितियों में तुलनीय कृत्य करने वाले असंबद्ध उद्यमों द्वारा ऐसे अभिदाय का किस प्रकार मूल्यांकन किया जाएगा;
(iii) सम्मिलित शुद्ध लाभ को तब उद्यमों के बीच उपखंड (ii) के अधीन मूल्यांकित उनके सापेक्ष अभिदायों के अनुपात में विभाजित किया जाता है;
(iv) इस प्रकार निर्धारिती को प्रभाजित लाभ को अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के संबंध में निकटतम निकालने के लिए हिसाब में लिया जाता है :
परन्तु यह कि उपखंड (i) में निर्दिष्ट सम्मिलित शुद्ध लाभ को, प्रथम बार में आंशिक रूप से प्रत्येक उद्यम को आबंटित किया जा सकेगा जिससे कि उसे अंतरराष्ट्रीय किस्म के संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू किस्म के संव्यवहार के लिए जिसमें वह लगा हुआ है, स्वतंत्र उद्यमों द्वारा वैसी ही किस्म के संव्यवहारों के लिए प्राप्त बाजार प्रत्यागम के संबंध में उपयुक्त मूलभूत प्रत्यागम उपलब्ध कराया जा सके, और उसके पश्चात् ऐसे आबंटन के पश्चात् शेष बचे अवशिष्ट शुद्ध लाभ को उपखंड (ii) और (iii) के अधीन विनिर्दिष्ट रीति में उनके सापेक्ष अभिदाय के अनुपात में उद्यमों के बीच विभाजित किया जा सकेगा, और ऐसे मामले में, ऐसे उद्यम को प्रथम बार में आबंटित कुल शुद्ध लाभ को उस उद्यम को उसके सापेक्ष अभिदाय के आधार पर प्रमाणित अवशिष्ट शुद्ध लाभ सहित अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार से उस उद्यम को होने वाला शुद्ध लाभ माना जाएगा;
(ड़) संव्यवहारात्मक शुद्ध अंतर (मार्जिन) पद्धति, जिसके द्वारा,—
(i) ऐसे उद्यम द्वारा किसी सहयुक्त उद्यम के साथ किए गए अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार से वसूल किए गए शुद्ध लाभ अंतर की संगणना उद्यम द्वारा किए गए खर्चों या किए गए विक्रयों या प्रयुक्त या प्रयुक्त की जाने वाली आस्तियों के संबंध में या किसी अन्य सुसंगत आधार को देखते हुए की जाती है;
(ii) ऐसे उद्यम द्वारा या किसी अन्य असंबद्ध उद्यम द्वारा तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहार या ऐसे कर्इ संव्यवहारों से वसूल किए गए शुद्ध लाभ अंतर की संगणना उसी आधार को देखते हुए की जाती है;
(iii) उपखंड (ii) में निर्दिष्ट ऐसे शुद्ध लाभ अंतर को, जो तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहारों से होता है, अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार और तुलनीय अनियंत्रित संव्यवहारों के बीच अथवा ऐसे संव्यवहारों को करने वाले उद्यमों के बीच अंतर को, यदि कोर्इ हो, जो खुले बाजार में शुद्ध लाभ अंतर को पर्याप्त रूप में प्रभावित कर सकता है, हिसाब में लेने के लिए समायोजित किया जाता है;
(iv) उद्यम द्वारा वसूल किए गए और उपखंड (i) में निर्दिष्ट शुद्ध लाभ अंतर को उपखंड (iii) में निर्दिष्ट शुद्ध लाभ अंतर के समान ही सिद्ध किया जाता है;
(v) इस प्रकार सिद्ध किए गए शुद्ध लाभ अंतर को तब अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के संबंध में निकटतम कीमत निकालने के लिए हिसाब में लिया जाता है।
(च) नियम 10कख में यथा उपबंधित कोर्इ अन्य पद्धति।
(2) उपनियम (1) के प्रयोजनों के लिए, अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार की अनियंत्रित संव्यवहार से तुलनीयता निम्नलिखित के संबंध में आंकी जाएगी, अर्थात् :—
(क) दोनों में से किसी भी संव्यवहार में अंतरित संपत्ति या उपलब्ध करार्इ गर्इ सेवाओं की विनिर्दिष्ट विशेषताएं;
(ख) प्रयुक्त या प्रयुक्त की जाने वाली आस्तियों और कल्पित जोखिमों को देखते हुए संव्यवहारों के संबद्ध पक्षकारों द्वारा किए गए कृत्य;
(ग) संव्यवहारों के संविदात्मक निबंधन (चाहे ऐसे निबंधन विधिवत् या लिखित में हों अथवा नहीं) जिनमें स्पष्ट रूप से या अस्पष्ट रूप से उन उत्तरदायित्वों, जोखिमों और फायदों को विहित किया गया है, जो उन संव्यवहारों के संबद्ध पक्षकारों के बीच बांटे जाने हैं;
(घ) बाजारों में व्याप्त स्थितियां, जिनमें संव्यवहारों के संबद्ध पक्षकार कार्य करते हैं, इनके अंतर्गत भूगोलीय स्थिति और बाजारों का आकार, प्रवृत्त विधियां और सरकारी आदेश, श्रम लागत और बाजार पूंजी, समग्र आर्थिक विकास और प्रतियोगिता का स्तर और चाहे बाजार थोक बाजार हो या खुदरा बाजार भी आता है।
(3) अनियंत्रित संव्यवहार की अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार से तुलना की जा सकेगी, यदि—
(i) उन संव्यवहारों के बीच, जिनकी तुलना की जा रही है, या ऐसे संव्यवहारों को करने वाले उद्यमों के बीच के किसी भी अंतर के, यदि कोर्इ हो, खुले बाजार में ऐसे संव्यवहारों में प्रभारित या संदत्त कीमत या लागत को या खुले बाजार में ऐसे संव्यवहारों से होने वाले लाभ को पर्याप्त रूप से प्रभावित करने की संभावना नहीं है; या
(ii) ऐसे अंतर के पर्याप्त प्रभाव को समाप्त करने के लिए युक्तियुक्त रूप से सही समायोजन किए जा सकते हैं ।
(4) अनियंत्रित संव्यवहार की अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के साथ तुलनीयता का विश्लेषण करने में प्रयुक्त किया जाने वाला डाटा उस वित्तीय वर्ष से संबंधित (इस नियम में इसके पश्चात् और 'चालू वर्ष' के रूप में नियम 10गक में निर्दिष्ट) डाटा होगा जिसमें कि अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार किया गया है :
परन्तु यह कि चालू वर्ष से पूर्व की दो वर्ष से अनधिक की अवधि से संबंधित डाटा पर भी विचार किया जा सकेगा यदि ऐसे डाटा से ऐसे तथ्यों का पता चलता है जिनका ऐसे संव्यवहारों के संबंध में, जिनकी तुलना की जा रही हो, अंतरण कीमतों का अवधारण करने पर प्रभाव हो सकता है :
परंतु यह और कि प्रथम अपै्रल, 2014 को या उसके पश्चात् प्रविष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या किसी विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के साथ किसी अनियंत्रित संव्यवहार की तुलनीयता का विश्लेषण करते हुए पहला परंतुक लागू नहीं होगा:
(5) किसी ऐसे मामले में जहां प्रथम अप्रैल, 2014 को या उसके पश्चात् प्रविष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या किसी विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के सन्निकट मूल्य के अवधारण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त पद्धति के साथ धारा 92ग की उपधारा (1) के खंड (ख), खंड (ग) या खंड (ड.) में विनिर्दिष्ट पद्धति है, वहां उपनियम (4) में किसी बात के होते हुए भी किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या किसी विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के साथ अनियंत्रित संव्यवहार की तुलनीयता का विश्लेषण करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले आंकडे़—
(i) चालू वर्ष से संबंधित आंकडे़; या
(ii) यदि चालू वर्ष से संबंधित आंकड़े निर्धारिती द्वारा चालू वर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए आय-कर की विवरणी देने के समय उपलब्ध नहीं है, तो चालू वर्ष से ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष से संबंधित आंकड़े होंगे:
परंतु जहां चालू वर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए किसी निर्धारण कार्यवाही के दौरान किसी अंतरराष्ट्रीय संव्यवहार या किसी विनिर्दिष्ट घरेलू संव्यवहार के सन्निकट मूल्य का अवधारण करते समय चालू वर्ष से संबंधित आंकड़े पश्चातवर्ती उपलब्ध हों, वहां ऐसे आंकडे़ ऐसा अवधारण करने के लिए, इस बात पर विचार किए बिना कि सुसंगत निर्धारण वर्ष की आय की विवरणी देते समय आंकडे़ उपलब्ध नहीं थे, उपयोग में लाए जाएंगे।

