आयकर विभाग
वित्त मंत्रालय, भारत सरकार
आयकर अधिनियम के अधीन आवासीय स्थिति
परिचय
किसी करदाता की आवासीय स्थिति का निर्धारण भारत में उसकी भौतिक उपस्थिति अथवा कंपनियों के मामले में प्रभावी प्रबंधन के स्थान के आधार पर किया जाता है। इसका आकलन प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए अलग से किया जाता है और यह भारत में कर योग्य आय के दायरे को प्रभावित करता है। यदि कोई व्यक्ति किसी पूर्ववर्ती वर्ष में आय के किसी स्रोत के लिए भारत में निवासी है, तो उसे आय के सभी स्रोतों के लिए निवासी माना जाएगा।
आवासीय स्थिति की श्रेणियां
आवासीय स्थिति के आधार पर करदेयता
आवासीय स्थिति का निर्धारण
किसी व्यक्ति की आवासीय स्थिति संबंधित वित्तीय वर्ष के दौरान भारत में रहने के आधार पर निर्धारित की जाती है। एक भारतीय नागरिक को भारत में निवासी माना जाएगा, भले ही वह निवास की आवश्यकता को पूरा न करता हो, यदि:
किसी व्यक्ति को भारत में अनिवासी माना जाता है यदि वह निवासी बनने के लिए ऊपर वर्णित शर्तों में से किसी को भी पूरा नहीं करता है।
किसी हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) की आवासीय स्थिति का निर्धारण उसके नियंत्रण एवं प्रबंधन के स्थान के आधार पर किया जाता है। इसके अतिरिक्त, इसके कर्ता की आवासीय स्थिति, किसी एचयूएफ को निवासी एवं सामान्य निवासी (आरओआर), निवासी किन्तु सामान्य निवासी नहीं (आरएनओआर), अथवा अनिवासी (एनआर) के रूप में वर्गीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारतीय कंपनी को सदैव भारत में निवासी माना जाता है। एक विदेशी कंपनी को भारत में निवासी तब माना जाएगा यदि उस संबंधित वित्तीय वर्ष के दौरान उसका प्रभावी प्रबंधन स्थान (प्लेस ऑफ इफेक्टिव मैनेजमेंट-पीओईएम) भारत में है। पीओईएम नियम केवल तभी लागू होते हैं यदि विदेशी कंपनी का सकल कारोबार वित्तीय वर्ष में 50 करोड़ रुपये से अधिक है।
किसी साझेदारी फर्म, व्यक्तियों के संघ (एओपी), व्यक्तियों के निकाय (बीओआई), स्थानीय प्राधिकरण या कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की आवासीय स्थिति उसके नियंत्रण और प्रबंधन के स्थान पर निर्भर करती है। इन संस्थाओं को निवासी या अनिवासी के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, लेकिन इन्हें सामान्यतः निवासी नहीं (आरएनओआर) का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।